जाट आंदोलन के दौरान उपद्रव करने वालों से केस नहीं होंगे वापस: हाईकोर्ट

सरकार को निर्देश दिए है कि 407 मामलों में यथा स्थिति बनाए रखें, साथ ही सभी जिला अदालतों को भी आदेश दिया गया कि वो भी इन मामलों में कोई आदेश अभी पारित नहीं करें.

News18 Haryana
Updated: August 30, 2018, 4:32 PM IST
जाट आंदोलन के दौरान उपद्रव करने वालों से केस नहीं होंगे वापस: हाईकोर्ट
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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Updated: August 30, 2018, 4:32 PM IST
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को बड़ा आदेश दिया है. साल 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान कुल मामलों में से 407 मुकदमों को वापस लेने के फैसले पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है. सरकार को निर्देश दिए है कि 407 मामलों में यथा स्थिति बनाए रखें, साथ ही सभी जिला अदालतों को भी आदेश दिया गया कि वो भी इन मामलों में कोई आदेश अभी पारित नहीं करें. इसके साथ ही हाईकोर्ट में अगली सुनवाई में कथित मुरथल गैंगरेप के मामले को सीबीआई को सौंपे जाए या नहीं इस पर भी बहस होगी.

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बुधवार को सुनवाई के दौरान गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार शांति और सौहार्द का बहाना बना हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी के 2015 मामलों में से 407 केस वापस लेने की तैयारी कर रही है. गुप्ता ने बताया कि प्रकाश सिंह कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में इन 407 मामलों में से 129 को बेहद ही गंभीर मामला बताया है. बावजूद इसके सरकार की मंशा आरोपियों को बचाने की है ताकि जाट वोटरों को साध सके.

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अनुपम गुप्ता ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने शुरुआत से ही दंगों के दौरान सोनीपत जिले के मुरथल में महिलाओं से दुष्कर्म की घटनाओं को छिपाने- दबाने का प्रयास किया है. इसलिए इसकी सीबीआई से जांच करवाए जाने की आवश्यकता है. उन्होंने कहा कि अगर सीबीआइ भी जांच में मुरथल में महिला यात्रियों से दुष्कर्म के तथ्य नहीं खोज पाती तो यह मानना पड़ेगा कि ये आरोप सही नहीं थे.
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