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नए कृषि कानून लागू होते ही पेट्रोल की तरह बढ़ जाएंगे खाद्यान्न के दाम: चढ़ूनी

भाकियू नेता गुरनाम चढ़ूनी ने किसान आंदोलन को बताया ‘धर्मयुद्ध’

भाकियू नेता गुरनाम चढ़ूनी ने किसान आंदोलन को बताया ‘धर्मयुद्ध’

भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने शनिवार को कृषि कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यदि केंद्र के नए कृषि कानून लागू हो जाते हैं तो देश में ईंधन की तरह ही खाद्यान्न के दाम बढ़ जाएंगे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 21, 2021, 12:01 AM IST
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चंडीगढ़. भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने शनिवार को कृषि कानूनों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि यदि केंद्र के नए कृषि कानून लागू हो जाते हैं तो देश में ईंधन की तरह ही खाद्यान्न के दाम बढ़ जाएंगे. कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन को ‘धर्मयुद्ध’ करार देते हुए चढूनी ने समाज के सभी तबकों से आंदोलन से जुडऩे का आह्वान किया.

भारतीय किसान यूनियन के हरियाणा प्रमुख गुरनाम सिंह चढूनी ने चंडीगढ़ में आयोजित किसान महापंचायत को संबोधित किया. उनके साथ कई अन्य नेता भी किसान महापंचायत में पहुंचे. महापंचायत का आयोजन नौजवान किसान एकता संगठन ने किया था.

किसान महापंचायत के दौरान गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा, ‘हम इसे (आंदोलन) धर्मयुद्ध कहते हैं. यदि कृषि-कारोबार कानून लागू होते हैं तो देश का अनाज कुछ लोगों के गोदामों में चला जाएगा. फिर खाद्यान्न के दाम उसी तरह बढ़ जाएंगे जैसे अब पेट्रोल के दाम बढ़ रहे हैं.’ उन्होंने कहा, ‘इसलिए यह केवल किसानों की लड़ाई नहीं है और हम समाज के सभी तबकों से अपील करते हैं कि वे इस आंदोलन से जुड़ें. यह देश को बचाने का आंदोलन है. यह धर्मयुद्ध है.’



चढूनी ने कहा कि नए कृषि कानून अगर लागू होते हैं तो किसान अपनी जमीन के मालिक नहीं रह पाएंगे और जमीन के बड़े हिस्से पर कंपनी खेती करती दिखाई देंगी. उन्होंने कहा, ‘यदि यह होता है, तो कृषि पर निर्भर 65 प्रतिशत आबादी कैसे बचेगी. इसलिए सवाल हमारे बचे रहने और हमारे भविष्य का है. यदि हम यह लड़ाई हार गए तो कोई भी हमें आर्थिक गुलामी से नहीं बचा सकता.’ किसान नेता ने आरोप लगाया कि केंद्र कॉरपोरेट घरानों को वित्तीय मदद दे रहा है, लेकिन ऋ ण माफी के रूप में किसानों को राहत नहीं दे रहा. उन्होंने कहा कि जनता उन लोगों को वोट न दे जो आज किसानों के साथ नहीं खड़े हो सकते.
चढूनी ने कहा कि किसान बारी-बारी से दिल्ली की सीमाओं पर डटे रहें. भारतीय किसान यूनियन (एकता उग्राहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उग्राहां ने केंद्र सरकार की निंदा की और कृषि कानूनों को ‘काले कानून’ करार दिया. उन्होंने कहा कि ये कानून कॉरपोरेट घरानों की मदद करेंगे और सरकार को अडय़िल रवैया छोडक़र इन कानूनों को निरस्त करना चाहिए.
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