PM मोदी को पत्र लिखकर ओम प्रकाश चौटाला ने की कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 33 दिन से किसान आंदोलन कर रहे हैं (फाइल फोटो- AP)

केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 33 दिन से किसान आंदोलन कर रहे हैं (फाइल फोटो- AP)

ओम प्रकाश चौटाला ने कहा कि केंद्र सरकार के ‘अड़ियल’ रवैये के चलते इस मुद्दे का अब तक कोई ठोस हल नहीं हुआ है. उन्होंने पत्र में लिखा, ‘यह दुखद स्थिति है क्योंकि कृषक वर्ग के लोग आम तौर पर किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेते. यदि आज यह हो रहा है तो इसे संवेदनशीलता के साथ देखने की जरूरत है’

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  • Last Updated: December 28, 2020, 11:01 PM IST
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चंडीगढ़. कृषि कानूनों (Farm Laws) का विरोध कर रहे किसानों (Farmers Protest) को अलग-अलग राजनीतिक दलों और संगठनों से समर्थन मिल रहा है. इसी कड़ी में अब हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला (Om Prakash Chauatala) ने केंद्र सरकार से इन कानूनों को वापस लेने की मांग की है. सोमवार को चौटाला ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने या किसान संगठनों और विशेषज्ञों के साथ इस विषय पर सहमति कायम होने तक उनका क्रियान्वयन निलंबित रखने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को पत्र लिखा है.

85 वर्षीय चौटाला ने कहा कि सरकार के ‘अड़ियल’ रवैये के चलते इस मुद्दे का अब तक कोई ठोस हल नहीं हुआ है. उन्होंने पत्र में लिखा, ‘यह दुखद स्थिति है क्योंकि कृषक वर्ग के लोग आम तौर पर किसी प्रदर्शन में हिस्सा नहीं लेते. यदि आज यह हो रहा है तो इसे संवेदनशीलता के साथ देखने की जरूरत है.’

चौटाला ने पत्र में कहा कि इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए. उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन कानूनों को वापस नहीं लिया जाता है तो, कम से कम तब तक उन्हें निलंबित रखा जाए जब तक संतोषजनक प्रक्रिया के माध्यम से किसान संगठनों और विशेषज्ञों के साथ सहमति नहीं कायम हो जाती है.

उन्होंने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि कृषि कानूनों को लागू करने में हड़बड़ी नहीं की जाए या इसे ‘अहं का विषय’ नहीं बनाया जाए.

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जेल में सजा काट रहे INLD के अध्यक्ष ओम प्रकाश चौटाला ने प्रधानमंत्री से अनुरोध किया कि कृषि कानूनों को लागू करने में हड़बड़ी नहीं की जाए या इसे ‘अहं का विषय’ नहीं बनाया जाए (फाइल फोटो)

32 दिन से दिल्ली बॉर्डर पर डटे हुए हैं आंदोलनकारी किसान

बता दें कि इसी वर्ष सितंबर में लागू तीन कृषि कानूनों को केंद्र द्वारा कृषि क्षेत्र में बड़े सुधारों के रूप में पेश किया गया है, और उसके मुताबिक यह कानून बिचौलियों को दूर करेगा और किसानों को देश में कहीं भी अपनी उपज बेचने की अनुमति देगा. इन कानूनों के खिलाफ पंजाब-हरियाणा समेत अन्य राज्यों के किसान पिछले तैंतीस दिन से दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे हैं. किसानों ने यह आशंका जताई है कि नए कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की सुरक्षा खत्म हो जाएगी.



केंद्र सरकार ने किसानों की चिंता और इस समस्या को हल करने की दिशा में पहल करते किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से छह दौर की बातचीत कर चुकी है. लेकिन गतिरोध बरकरार है. किसान अपनी मांगों और बात पर अडिग हैं. सरकार ने एक बार फिर किसानों को 30 दिसंबर को सातवें दौर के वार्ता के लिए आमंत्रित किया है. (भाषा से इनपुट)

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