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CM मनोहर लाल ने एक्शन अगेंस्ट करप्शन की मुहिम तेज की, दागियों पर फेंका जांच का जाल

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को तेज कर दिया है. (File)

हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान को तेज कर दिया है. (File)

CM मनोहर लाल मुख्य सचिव के माध्यम से ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों का रिकार्ड एकत्रित करने के निर्देश दिए हैं, जो विभिन्न विभागों, बोर्डों व निगमों के प्रधान कार्यालयों और फील्ड कार्यालयों में संवेदनशील प्रकृति के पदों पर लंबे समय से विराजमान हैं. ऐसे ‘जुगाड़ी कर्मचारी’ CM के ‘राडार’ पर हैं.

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चंडीगढ़. हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल (CM Manohar Lal) ने अपने मिशन ‘एक्शन अगेन्स्ट करप्शन’ (Action Against corruption) की मुहिम को तेज कर दिया है. हालांकि उन्होंने वर्ष 2014 में सत्ता की बागडोर संभालते ही कार्यों में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से भ्रष्टचार के प्रति ‘जीरो टालरेंस’ (Zero Tolrance) की नीति पर काम करते हुए कई विभागों में डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दिया और गरीब वर्ग के लिए लागू की गई कल्याणकारी योजनाओं के लिए आवेदन से लेकर धनराशि मिलने तक सब प्रक्त्रिया को ऑनलाइन कर दिया है. आरंभ से ही मुख्यमंत्री ने चार्जसीटिड-कर्मचारियों व अधिकारियों को ‘पब्लिक-डिलिंग’ के स्थानों से हटाकर हैड-क्वार्टर पर भेजने के आदेश दिए हुए हैं ताकि अपने रोजमर्रा के कार्यों में भ्रष्ट व टरकाऊ किस्म के अधिकारी व कर्मचारियों से प्रदेश की जनता को परेशानी का सामना न करना पड़े.

मुख्यमंत्री ने विकास कार्यों में गुणवत्ता लाने व टैंडर के आवंटन में पारदर्शिता लाने की दिशा में अटल-कदम उठाते हुए सभी विभागों को निर्देश दिए कि 5 करोड़ रूपए से अधिक लागत के विकास कार्यों को वैबसाइट पर डालकर उनके टैंडर ऑनलाइन आमंत्रित किए जाएं, इससे कथित ‘सैटिंगबाज’ ठेकेदारों में खलबली अवश्य मची है. परंतु विकास कार्यों में गुणवत्ता का स्पष्ट तौर पर असर देखा जाने लगा है. राज्य सरकार अब इंजीनियरिंग से जुड़े कार्यों के लिए भी एक पोर्टल लांच कर रही है जो कि पारदर्शिता की दिशा में एक और अग्रणी-कदम माना जा रहा है.

जांच अधिकारियों का भी तैयार हो रहा है कच्चा चिट्ठा

हाल ही में मुख्यमंत्री ने दो ऐसे निर्णय लिए हैं जो कि भ्रष्ट व आलसी किस्म के अधिकारियों व कर्मचारियों पर लगाम कसने का काम करेंगे। इनमें एक तो यह है कि वर्षों तक एक ही पद पर जड़ें जमाए बैठे अधिकारियों की ‘कार्य-कुंडली’ खंगाली जाएगी, जो कि उनकी बची हुई नौकरी का भविष्य तय करेगी. यही नहीं उन जांच अधिकारियों का भी ‘कच्चा-चिठ्ठा’ तैयार किया जा रहा है जो कि दोषी अधिकारियों के साथ सैटिंग करके जांच-रिपोर्टों पर सर्प-कुंडली मार कर बैठे हैं. कुछ विभागों में ‘पब्लिक-डिलिंग’ पर कई-कई वर्षों तक जमे कुछ अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ जब भ्रष्टचार या कार्य में देरी की शिकायत मुख्यमंत्री तक पहुंची तो वे तुरंत एक्शन में आ गए.

ये साल सुशासन परिणाम वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है

मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों से यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वे अपने-अपने विभागों में ऐसे ‘संवेदनशील पदों’ की सूची तत्काल तैयार करें, जिन पदों पर बैठे कर्मचारी/अधिकारी ‘पब्लिक-डिलिंग’, वित्तीय निहितार्थ वाले निर्णय लेने, लाइसेंस प्रदान करने, प्रमाण-पत्र बनाने, स्टोर-आइटम्स की खरीद आदि से संबंधित ‘संवेदनशील पदों’ पर तीन वर्ष से अधिक समय से लगातार जमे हुए हैं. ऐसे कर्मचारियों व अधिकारियों की सूची 5 अक्तूबर 2021 तक मुख्य सचिव को भेजने के निर्देश दिए गए हैं. हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2021 को ‘सुशासन परिणाम वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है.

मुख्यमंत्री के दूसरे अहम निर्णय के तहत, विभिन्न मामलों में कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच को जान-बूझकर लटकाने वालों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है, जवाब-तलबी करनी शुरू कर दी है. अगर जांचकर्ता कोई सेवानिवृत्त अधिकारी है तो उससे जांच लेकर अन्य अधिकारी को सौंप दी जाएगी. मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव के माध्यम से सभी प्रशासनिक सचिवों को हरियाणा सिविल सेवा (दंड एवं अपील) नियम, 2016 के नियम 7 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही के निपटान के लिए निर्देश जारी कर दिए हैं.

अनुशासनात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट में देरी बर्दाश्त नहीं 

मुख्यमंत्री के जब यह संज्ञान में आया कि नियम 7 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के कई मामलों की जांच रिपोर्ट जांच-अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत करने में अत्यधिक देरी की जाती है तो उन्होंने इस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए अनुशासनात्मक मामलों का समय पर निपटान सुनिश्चित करने के लिए आदेश जारी कर दिये. अब राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि ग्रुप-ए और बी के राजपत्रित अधिकारियों से संबंधित अनुशासनात्मक मामलों में सभी प्रशासनिक सचिव यह सुनिश्चित करेंगे कि राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ लंबित नियमित जांच को 30 नवंबर, 2021 से पहले फाइनल कर दिया जाए. अगर कोई जांच अधिकारी उक्त अवधि तक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने में असमर्थ है तो संबंधित प्रशासनिक सचिव मुख्य सचिव को 7 दिसंबर 2021 तक रिपोर्ट करेंगे जिसमें देरी के कारणों का उल्लेख किया जाएगा.

दोषी अधिकारियों को बख्शने के मूड में नहीं हैं सीएम खट्टर

मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों के हित में स्पष्ट निर्देश दे रखे हैं कि सरकारी कर्मचारियों को देय तिथि के 3 महीने के अंदर नियमों के अनुसार ए.सी.पी पे-स्केल देना सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने कर्मचारियों की चिर-लंबित मांग ‘नई एक्सग्रेसिया स्कीम’ को स्वीकृत किया. अगर किसी सरकारी कर्मचारी की 52 साल की उम्र से पहले मृत्यु हो जाती है तो उसके आश्रित को अनुकंपा के आधार पर नौकरी दी जाने लगी है. माना जा रहा है कि दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों को मुख्यमंत्री बख्शने के मूड में नहीं हैं.

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