भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस में रहेंगे या नहीं, 36 सदस्यों की कमेटी करेगी फैसला

News18 Haryana
Updated: September 3, 2019, 11:42 AM IST
भूपेंद्र सिंह हुड्डा कांग्रेस में रहेंगे या नहीं, 36 सदस्यों की कमेटी करेगी फैसला
हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस नेतृत्‍व के बीच रस्‍साकसी चल रही है. (फाइल फोटो)

विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में चल रहा मंथन का दौर हरियाणा कांग्रेस में बड़े बदलाव के संकेत हैं. जल्द ही हरियाणा कांग्रेस की नई तस्वीर सामने आ सकती है.

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विधानसभा चुनाव (Assembly Election) हरियाणा की दहलीज पर दस्तक देने को है, लेकिन कांग्रेस (Congress) चुनाव की तैयारी करने के बजाय घर में लगी आग बुझाने में जुटी है. दिल्ली दरबार में हाजरियों का दौर चल रहा है. कभी भूपेंद्र सिंह हुड्डा तो कभी किरण चौधरी और कभी गुलाम नबी आजाद 10 जनपथ के चक्कर काट रहे हैं.

मंगलवार को हुड्डा ने अपने उन समर्थक विधायक, पूर्व विधायकों और प्रदेश स्तरीय बड़े नेताओं की बैठक बुलाई है. रोहतक में परिवर्तन महारैली के बाद पूर्व सीएम ने 36 सदस्‍यों वाली कमेटी बनाई है. इस कमेटी की बैठक में हुड्डा यह तय करेंगे कि वे कांग्रेस में रहेंगे या नहीं. इसके अलावा इसी बैठक से हुड्डा की अगली राजनीतिक रणनीति भी तय हो जाएगी.

कांग्रेस में बदलाव के संकेत

सूत्र बताते हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस में चल रहा मंथन का दौर हरियाणा कांग्रेस में बड़े बदलाव के संकेत हैं. जल्द ही हरियाणा कांग्रेस की नई तस्वीर सामने आ सकती है. सूत्रों के मुताबिक अध्यक्ष पद से तंवर की छुट्टी तय है और प्रदेश अध्यक्ष की कमान कुमारी सैलजा को दी जा सकती है. सभी खेमों को एक साथ लाने को लेकर कई फॉर्मूलों पर चर्चा हो रही है, जिनमें कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की भी चर्चा जोरों पर है.

हुड्डा बन सकते हैं कांग्रेस केंद्रीय चुनाव समिति का सदस्य

कार्यकारी अध्यक्ष के लिए दीपेंद्र हुड्डा, कैप्टन अजय यादव और कुलदीप शर्मा का नामों पर विचार हो रहा है. वहीं, पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा को केंद्रीय चुनाव समिति का सदस्य बनाया जा सकता है. कुल मिलाकर कांग्रेस आलाकमान की तरफ से सबको साथ लेकर चलने का फॉर्मूला बनाया जा रहा है, क्योंकि गुटों में बंटी कांग्रेस को हरियाणा में हर मोर्चे पर मायूसी ही मिली और 2009 लोकसभा चुनाव में 10 में से 9 सीटें जीतने वाली कांग्रेस दस साल बाद खाली हाथ ही खड़ी है.

सब जानते हैं कि पार्टी की इस बदहाली के लिए अंदरूनी कलह जिम्मेदार है, जिसे ठीक करने के लिए आलाकमान ने कोई कदम नहीं उठाया. लेकिन, विधानसभा चुनाव से पहले आलाकमान की यह कशिश कितनी कारगर साबित होगी ये आने वाला वक्त बताएगा.
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First published: September 3, 2019, 11:17 AM IST
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