हरियाणा: साथ चुनाव लड़ सकती हैं कांग्रेस-BSP, हुड्डा और कुमारी शैलजा ने की मायावती से मुलाकात

News18 Haryana
Updated: September 9, 2019, 4:39 PM IST
हरियाणा: साथ चुनाव लड़ सकती हैं कांग्रेस-BSP, हुड्डा और कुमारी शैलजा ने की मायावती से मुलाकात
BSP सुप्रीमो मायावती से कांग्रेस के नेताओं ने मुलाकात की है. (फाइल फोटो)

हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) से पहले एक बड़ी खबर आ रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आगामी हरियाणा चुनाव में कांग्रेस (Congress) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) साथ मिलकर बीजेपी (BJP) को चुनौती देने की तैयारी में है.

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चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) से पहले एक बड़ी खबर आ रही है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, आगामी हरियाणा चुनाव में कांग्रेस (Congress) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) साथ मिलकर बीजेपी (BJP) को चुनौती देने की तैयारी में हैं. इसके लिए दोनों दलों के बीच बातचीत भी शुरू हो गई है. सूत्रों ने बताया कि हरियाणा प्रदेश कांग्रेस की नव नियुक्त अध्यक्ष कुमारी शैलजा (Kumari Shailja) ने बीएसपी सुप्रीमो मायावती (Mayawati) से मुलाकात की है. इसके साथ ही प्रचार समिति (Campaign Committee) के प्रमुख भूपिंदर सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) भी मायावती से मिले हैं.



हरियाणा में बीएसपी का दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (JJP) से गठबंधन था. हालांकि कुछ ही दिन पहले मायावती ने अपना गठबंधन जेजेपी से खत्म कर लिया. 6 सितंबर को ट्विटर पर इसका ऐलान करते हुए मायावती ने लिखा था कि बीएसपी एक राष्ट्रीय पार्टी है और सीट बंटवारे में जेजेपी का रवैया ठीक नहीं था इसलिए स्थानीय नेताओं के सुझाव पर गठबंधन खत्म किया जाता है. यह गठबंधन एक महीने भी नहीं चला था.

कुछ ही महीनों में आईएनएलडी से कांग्रेस तक

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मायावती ने आईएनएलडी से गठबंधन किया था लेकिन चुनाव से ठीक पहले उन्होंने ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी से गठबंधन तोड़ लिया. बाद में बीजेपी से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले राजकुमार सैनी से बीएसपी ने हाथ मिला लिया. लेकिन चुनावों में कोई सफलता नहीं मिलने पर यह गठबंधन भी लंबा नहीं चल सका. अब चर्चा चल रही है कि मायावती कांग्रेस के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव में भाग्य आजमा सकती हैं.

दलित वोटर्स को अपने तरफ करने की कोशिश
बीजेपी के लिए दलित वोट एक चिंता का विषय है. कांग्रेस ने अशोक तंवर की जगह कुमारी शैलजा को प्रदेश की कमान सौंपी है. राम रहीम के खिलाफ खट्टर सरकार के फैसले भी परेशानी का सबब बन सकते हैं, क्योंकि राम रहीम के ज्यादातर फॉलोअर दलित ही हैं. ऐसे में कांग्रेस की कोशिश है कि मायावती को अपने साथ लाकर दलित वोट बैंक को साधा जाए.
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कांग्रेस की रणनीति दलित वोट साधने की
बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए बीजेपी की कोशिश नॉन जाट वोट बैंक को अपने तरफ करने पर है. फिलहाल जाटों का वोट हुड्डा, आईएनएलडी और दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी के बीच बंटा हुआ है. कांग्रेस की रणनीति दलित वोट को साधने की है. हुड्डा की पकड़ जाट वोट पर है और मायावती के आने से दलित वोट बैंक पर भी असर पड़ेगा.

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First published: September 9, 2019, 10:23 AM IST
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