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जानें BJP से ज्यादा दुष्यंत चौटाला की कैसे मुश्किलें बढ़ाएगा कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव

अविश्वास प्रस्ताव जेजेपी के लिए ये एक परीक्षा की घड़ी होगी क्योंकि सदन में दुष्यंत को बोलते हुए देखना दिलचस्प होगा.

अविश्वास प्रस्ताव जेजेपी के लिए ये एक परीक्षा की घड़ी होगी क्योंकि सदन में दुष्यंत को बोलते हुए देखना दिलचस्प होगा.

हरियाणा में पांच मार्च से बजट सत्र शुरू होने वाला है. कांग्रेस ने खट्टर सरकार के खिलाफ विधानसभा सत्र के पहले दिन ही अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है. कांग्रेस के इस कदम से सीएम मनोहर लाल खट्टर से कहीं ज्यादा उनके सहयोगी डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की चिंता बढ़ सकती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 6:42 PM IST
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गुरुग्राम. हरियाणा प्रदेश की भाजपा सरकार के लिए पहले जाट आंदोलन सिर दर्द बना तो अब कृषि कानूनों को लेकर चल रहा आंदोलन गले की फांस बना हुआ है. कृषि कानून के खिलाफ हरियाणा में एक तरफ किसान आंदोलित हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस ने भी सरकार को घेरने के लिए मोर्चा खोल दिया है. पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व वाली बीजेपी-जेजेपी गठबंधन सरकार के खिलाफ विधानसभा सत्र के पहले दिन ही अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है. कांग्रेस के इस कदम से सीएम मनोहर लाल खट्टर से कहीं ज्यादा उनके सहयोगी डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की चिंता बढ़ सकती है, क्योंकि किसान संगठन जेजेपी पर बीजेपी से अलग होने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं.

कांग्रेस ने की बीजेपी-जेजेपी सरकार को घेरने की तैयारी

किसान और विपक्षी पार्टियां लगातार दुष्यंत पर दबाब बना रहे हैं कि वो समर्थन वापस ले लें. ताकि प्रदेश में भाजपा सरकार गिर जाए और इसी दबाब में केंद्र तीनों कृषि कानूनों को रद्द कर दे. हरियाणा में पांच मार्च से बजट सत्र शुरू होने वाला है, इसलिए कांग्रेस ने बीजेपी-जेजेपी सरकार को घेरने की तैयारी कर रखी है. विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई बैठक में कांग्रेस ने तय किया है कि राज्यपाल सत्यदेव नारायण आर्य के बजट अभिभाषण के बाद खट्टर सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाएगी. इससे पहले दो बार हुड्डा अपने विधायकों के साथ राज्यपाल से मिलने के लिए भी जा चुके हैं लेकिन राज्यपाल ने दोनों ही बार मिलने का समय नहीं दिया.



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दुष्यंत किसानों को कैसे खुश रखेंगे?

जानकारों की मानें तो कांग्रेस द्वारा लाए जा रहे प्रस्ताव को अगर विधानसभा अध्यक्ष स्वीकार करते हैं तो दस दिन के भीतर अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा करानी जरूरी होगा. खट्टर सरकार को भले ही संख्या के आधार पर कोई खतरा ना हो लेकिन जेजेपी के लिए ये एक परीक्षा की घड़ी होगी क्योंकि सदन में दुष्यंत को बोलते हुए देखना दिलचस्प होगा. सरकार के साथ रहते हुए दुष्यंत किसानों को कैसे खुश रखेंगे, ये बड़ी बात होगी. अगर दुष्यंत ने सरकार का साथ दिया तो किसानों की भारी नाराजगी झेलनी पड़ेगी
और अगर किसानों के साथ खड़े हुए तो अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा करेंगे. यही वजह है कि हुड्डा का दांव खट्टर से ज्यादा दुष्यंत के लिए चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है.

अभय चौटाला ने दुष्यंत के सामने बड़ी लकीर खींच दी

दुष्यंत चौटाला लगातार खुद को चौधरी देवीलाल के असली सियासी वारिस बताते हुए किसान नेता के तौर पर हरियाणा में अपनी सियासी जगह बनाना चाहते थे, वंही इंडियन नेशनल लोकदल के पूर्व विधायक व दुष्यंत के चाचा अभय चौटाला ने किसानों के समर्थन में अपने विधायक पद से इस्तीफा देकर दुष्यंत को यहां एक बड़ी चुनौती दे दी है. एक तरफ अभय चौटाला खुद को देवीलाल के पद चिह्नों पर चलने वाला नेता बताते हैं तो दूसरी तरफ उनके भतीजे दुष्यंत चौटाला. अभय के इस दांव ने दुष्यंत  के सामने एक बड़ी लकीर खींच दी है.

पिछले तीन महीने से लगातार जेजेपी के रुख को लेकर किसानों में गुस्सा है.  2019 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा को पूर्व बहुमत नहीं मिला तो माना जा रहा था कि हरियाणा में हुए जाट आंदोलन के चलते भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ है जिसका फायदा कांग्रेस के साथ-साथ जेजेपी को हुआ. जेजेपी प्रदेश
में नई नवेली पार्टी थी, फिर भी उसके 10 विधायक बने. 10 विधायकों वाली जेजेपी पार्टी ने भाजपा को समर्थन दे दिया और सत्ता में आ गए. इसलिए कांग्रेस और इनेलो पहले से ही दुष्यंत पर लोगों की भावनाओं के खिलाफ जाकर भाजपा को समर्थन देने के मुद्दे पर घेरते रहे हैं. अब किसानों के मुद्दे पर एक बार फिर दुष्यंत चौटाला कांगेस और इनेलो के निशाने पर हैं.

खाप पंचायत के साथ कई निर्दलीय विधायक

हरियाणा के जींद जिले में जेजेपी का गठन हुआ था और वहीं पिछले दिनों हुई खाप पंचायत ने जेजेपी विधायकों को बीजेपी से गठबंधन तोड़ने का दबाव बनाया था. खट्टर सरकार को समर्थन दे रहे निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान ने किसानों के समर्थन में ना सिर्फ अपना समर्थन वापस लिया बल्कि चेयरमैन के पद को भी छोड़ दिया. वंही महम से निर्दलीय विधायक भी भरष्टाचार का मुद्दा उठाकर पहले ही सरकार से अलग गए थे जबकि हरियाणा में खट्टर सरकार को सहयोग दे रहे जेजेपी का मूल वोटर जाट और किसान माने जाते हैं. कृषि कानून को लेकर हरियाणा में गांव-गांव पंचायत हो रही हैं जिससे दुष्यंत चौटाला के खिलाफ माहौल बनता जा रहा है. हालांकि, दुष्यंत चौटाला आश्वासन दे चुके हैं कि उनके रहते किसानों के हितों पर आंच नहीं आने दी जाएगी, लेकिन किसान संगठन और खाप पंचायतें उन पर बीजेपी से अलग होने के लिए लगातार दबाव बना रही हैं.
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