Exit Poll 2019: ये है वो नेता जिसकी रणनीति से हरियाणा में भाजपा जीतने जा रही 8-10 सीटें!

हरियाणा में 2014 में 7 सीटे जीतने वाली भाजपा एग्जिट पोल्स के अनुसार इस बार 8 से 10 सीटे जीतने जा रही है.

News18Hindi
Updated: May 21, 2019, 12:19 PM IST
Exit Poll 2019: ये है वो नेता जिसकी रणनीति से हरियाणा में भाजपा जीतने जा रही 8-10 सीटें!
मनोहर लाल खट्टर
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Updated: May 21, 2019, 12:19 PM IST
2014 लोकसभा चुनाव में 7 सीटे जीतने वाली भाजपा इस बार और अच्छा प्रदर्शन करने जा रही है. ये हम नहीं लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर आए एग्जिट पोल्स कह रहे हैं. हरियाणा में 2014 में 7 सीटे जीतने वाली भाजपा एग्जिट पोल्स के अनुसार इस बार 8 से 10 सीटे जीतने जा रही है. भाजपा ने हालांकि ये पूरा चुनाव प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर ही लड़ा लेकिन जिस तरह का चुनाव प्रचार कैंपेन प्रदेश भाजपा के नेताओं ने किया उससे पार्टी ने काफी अच्छा परफॉर्म किया.

भाजपा ने जिन प्रत्याशियों को टिकट दिया उनमें से कुछ खुद ही चुनाव लड़ने से इनकार करते नजर आए. बावजूद इसके पार्टी ने उन्हें टिकट दिया और एग्जिट पोल्स के अनुसार ये उम्मीदवार इस बार जीतने भी जा रहे है. अब ये सवाल उठता है कि प्रदेश में पार्टी को इतनी मजबूती देने में सबसे ज्यादा अहम रोल किसका रहा. चुनाव प्रचार कैंपेन की बात करें तो मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने प्रदेश की हर लोकसभा सीट में जाकर उम्मीदवारों के लिए वोट मांगे. वहीं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला की भी इन चुनावों में अहम भूमिका रही.



पीएम और शाह के खास सीएम मनोहर लाल

मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के काफी करीबी मानें जाते हैं. यहीं कारण है कि 2014 के विधानभा चुनाव जीतने के बाद उन्हें हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया गया था. मुख्यमंत्री को इस बार लोकसभा के रणनीतिकार की भूमिका दी गई. प्रदेश में पार्टी ने उन उम्मीदवारों को भी टिकट दी जो चुनाव लड़ने से इनकार कर रहे थे. वहीं कुछ नए उम्मीदवारों को भी मैदान में उतारा गया. पार्टी के सूत्रों की मानें तो भाजपा की ये रणनीति लोकसभा चुनावों में कारगर साबित हुई. एग्जिट पोल में भी इसका फायदा मिलता दिख रहा है.

गैर जाट समुदाय से रखते हैं ताल्लुक

26 अक्टूबर 2014 को मनोहर लाल खट्टर ने हरियाणा के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण ली थी. मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के पहले ऐसे मुख्यमंत्री है जो गैर जाट समुदाय से आते हैं, 18 वर्ष बाद वे इस पद पर विराजमान होने वाले पहले गैर जाट नेता हैं. वे भारतीय जनता पार्टी के सदस्य हैं तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रह चुके है. आरएसएस के प्रचारक मनोहर लाल खट्टर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरियाणा में बीजेपी की पहली सरकार का नेतृत्व सौंपे जाने से पहले वह चार दशक तक संगठन की जड़ों को मजबूत बनाने के काम में लगे रहे.

जींद उपचुनाव में भी रणनीति हुई थी पास
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मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनने के बाद कई बार कड़ी परीक्षाओं का सामना करना पड़ा. चाहे वो जाट आंदोलन के दौरान हुए दंगे हो या राम रहीम की गिरफ्तार के दौरान पंचकूला में हुए दंगे. लेकिन सीएम बनने काद राजनीति में उनकी पहली परीक्षा जींद उपचुनाव में हुई, जहां उनकी रणनीति एकदम फिट बैठी और इनेलो के गढ में उन्होंने भाजपा को जीत दिलाई.

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