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COVID-19: स्वर्ण मंदिर के पूर्व हजूरी रागी निर्मल सिंह का कोरोना से निधन, ग्रामीणों ने नहीं करने दिया अंतिम संस्कार
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News18 Haryana
Updated: April 3, 2020, 1:07 PM IST
COVID-19: स्वर्ण मंदिर के पूर्व हजूरी रागी निर्मल सिंह का कोरोना से निधन, ग्रामीणों ने नहीं करने दिया अंतिम संस्कार
स्वर्ण मंदिर के पूर्व हजूरी रागी का कोरोना से निधन

अमृतसर के जिला प्रशासन ने ज्ञानी निर्मल सिंह (Nirmal Singh) का अंतिम संस्कार करने के लिए वेरका स्थित श्मशान घाट पर तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन भनक लगते ही ग्रामीणों (Villagers) ने वहां इकट्ठा होकर विरोध करना शुरू कर दिया.

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चंडीगढ़. भारत में कोरोना वायरस (Corona Virus) की महामारी लगातार अपने पैर पसार रही है. इस वायरस से देश में अबतक कई लोगों की मौत (Death) हो चुकी है. अमृतसर स्थित सिखों के सबसे बड़े गुरुद्वारे स्वर्ण मंदिर के पूर्व हजूरी रागी और पदमश्री से सम्मानित निर्मल सिंह (Padam Shri Nirmal Singh) का भी कोरोना वायरस की वजह से निधन हो गया. बुधवार को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई थी. उन्होंने गुरुवार सुबह अंतिम सांस ली. वहीं पद्मश्री से सम्मानित श्री हरिमंदिर साहिब के पूर्व हुजूरी रागी भाई निर्मल सिंह के अंतिम संस्कार को लेकर ग्रामीण और प्रशासन आमने-सामने हो गए.

गुरुवार शाम को अमृतसर के जिला प्रशासन ने ज्ञानी निर्मल सिंह का अंतिम संस्कार करने के लिए वेरका स्थित श्मशान घाट पर तैयारी शुरू कर दी थी, लेकिन भनक लगते ही ग्रामीणों ने वहां इकट्ठा होकर विरोध करना शुरू कर दिया. वेरका में सभी जातियों के अलग-अलग लगभग छह श्मशान घाट हैं, जिन पर लोगों ने पहरा बैठा दिया. लोगों का कहना है कि दाह संस्कार से उड़ने वाली राख गांवों में गिरेगी, जिससे उन्हें भी कोरोना वायरस की चपेट में आने की आशंका है. कहीं भी ले जाओ, पर यहां दाह संस्कार नहीं होने दिया जाएगा. हालांकि, बाद में फतेहगढ़ के शुक्रचक गांव में पंचायती जमीन पर उनका अंतिम संस्कार किया गया.

कौन थे निर्मल सिंह



निर्मल सिंह मूल रूप से जालंधर जिले के गांव लोहियां से ताल्लुक रखते हैं. उनका परिवार भी यहीं रहता है. हालांकि अमृतसर में तरनतारन रोड पर भी उनके परिवार की रिहाइश है. इसका कारण है उनका सिख पंथ के प्रमुख प्रचारकों में होना. निर्मल सिंह खालसा 1979 में अमृतसर स्थित श्री हरिमंदिर साहिब के हुजूरी रागी बने थे. 2009 में वह पद्मश्री सम्मान भी हासिल कर चुके हैं. उन्हें पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब के सभी 31 रागों का ज्ञान बताया जाता है.






कई दिनों से थी तबीयत खराब

निर्मल सिंह खालसा पहले से ही दमे से ग्रसित थे. कई दिन से तबीयत खराब होने के चलते 20 मार्च को चंडीगढ़ से लौटते ही वह गुरु नानक देव अस्पताल में जांच कराने गए थे. वहां डॉक्टरों ने उन्हें घर भेज दिया. 28 मार्च को फिर तबीयत बिगड़ी तो वह वल्ला में एसजीपीसी के गुरु रामदास इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस और रिसर्च में 2 दिन भर्ती रहे. वहां से 30 मार्च को जीएनडीएच पहुंचे जहां सबसे पहले जनरल वार्ड में उनका ट्रीटमेंट हुआ. मंगलवार रात उन्हें आइसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया और बुधवार सुबह उनकी रिपोर्ट पॉजीटिव आ गई. गुरुवार सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया.

स्वास्थ्य मंत्री ने कहा ऐसी अफवाहों पर न दें ध्यान

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू ने कहा कि लोगों को इस तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए कि अंतिम संस्कार के समय उड़ने वाली राख से कोरोना फैलता है.  अंतिम संस्कार से जुड़ीं सिर्फ़ उन्हीं धार्मिक क्रियाओं की अनुमति है जिनमें शव को छुआ ना जाता हो. शव को नहलाने, चूमने, गले लगाने या उसके क़रीब जाने की अनुमति नहीं होती. शव दहन से उठने वाली राख से कोई ख़तरा नहीं है. अंतिम क्रियाओं के लिए मानव-भस्म को एकत्र करने में कोई ख़तरा नहीं है. COVID-19 हवा से नहीं फैलता, बल्कि बारीक कणों के ज़रिए फैलता है.

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First published: April 3, 2020, 12:37 PM IST
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