कभी परदादा बने थे उपप्रधानमंत्री, अब परपोता बनेगा हरियाणा का उपमुख्यमंत्री

1989 में जब संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी तब चौधरी देवीलाल देश के उप प्रधानमंत्री बने थे.

1989 में जब संयुक्त मोर्चा की सरकार बनी तब चौधरी देवीलाल देश के उप प्रधानमंत्री बने थे.

दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) बीजेपी के साथ सरकार बनाएंगे और उनकी पार्टी का उपमुख्यमंत्री भी होगा. अगर बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो दुष्यंत ही उपमुख्यमंत्री बनेंगे. ये संयोग है कि कभी उनके परदादा चौधरी देवीलाल (Chaudhary Devilal) देश के उपप्रधानमंत्री बने थे. हरियाणा की राजनीति में दुष्यंत को देवीलाल की विरासत संभालने वाला कहा जा रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 26, 2019, 4:20 AM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा विधानसभा चुनावों के बाद आए परिणामों ने अगर सबसे ज्यादा किसी को खुश किया है तो वह हैं चौटाला खानदान के चिराग दुष्यंत चौटाला. 90 सदस्यों वाली विधानसभा में बीजेपी के 40 और कांग्रेस के 31 विधायक जीतकर आए हैं. 18 महीने पहले बनी दुष्यंत चौटाला की पार्टी जननायक जनता पार्टी ने 10 सीटें जीत ली. बहुमत के लिए 46 विधायकों की जरूरत वाली इस विधानसभा में सत्ता की चाबी अपने पास रखने के लिए इतने विधायक बहुत थे. उनकी पार्टी की इस छोटी जीत ने ही उन्हें हरियाणा की सियासत में सबसे बड़ा किरदार बना दिया.

अब वह बीजेपी के साथ सरकार बनाएंगे और उनकी पार्टी का उपमुख्यमंत्री भी होगा. अगर कुछ बहुत बदलाव नहीं हुआ तो दुष्यंत ही उपमुख्यमंत्री बनेंगे. ये संयोग है कि कभी उनके परदादा चौधरी देवीलाल देश के उपप्रधानमंत्री बने थे. हरियाणा की राजनीति में दुष्यंत को देवीलाल की विरासत संभालने वाला कहा जा रहा है. जाहिर है कि हरियाणा की राजनीति में उनका कद बढ़ना तय है. हालांकि ये भी सही है कि चौधरी देवीलाल के बराबर का कद उनके बाद उनके परिवार का कोई भी सदस्य नहीं छू पाया.

देवीलाल ने जिसे अपना पीएम बनाया उसने ही उन्हें मंत्रिमंडल से हटायादिसंबर, 1989 में आम चुनाव के बाद नतीजे आए. इसके बाद संयुक्त मोर्चा संसदीय दल की बैठक हुई. बैठक में वीपी सिंह के प्रस्ताव और उस पर चंद्रशेखर के समर्थन से चौधरी देवीलाल को संसदीय दल का नेता मान लिया गया. उनका पीएम बनना तय था, लेकिन चौधरी देवीलाल ने उसी बैठक में खुद को इस दौड़ से अलग कर लिया और वीपी सिंह के पीएम बनने का रास्ता साफ कर दिया. जिन वीपी सिंह को उन्होंने पीएम बनाया, उन्होंने ही उन्हें अपने मंत्रिमंडल से हटा दिया था. हालांकि बाद में चंद्रशेखर के प्रधानमंत्री बनने के बाद चौधरी देवीलाल फिर उपप्रधानमंत्री बने.



BJP को यमुना पार भेजने वाले दुष्यंत चौटाला अब क्यों आए खट्टर के साथ
सरकार बनाने के लिए उन पर कांग्रेस ने भी डोरे डाले, लेकिन दुष्यंत बीजेपी के साथ गए. अब ये कहा जा रहा है कि चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी को यमुना पार भेजने की बात कहने वाले दुष्यंत बीजेपी के रथ में क्यों सवार हो गए.

बीजेपी का केंद्र में होना

केंद्र में सरकार बीजेपी की है. ऐसे में दुष्यंत ने कांग्रेस की बजाय बीजेपी को चुना. राज्य में सत्ता के संतुलन बनाने का साथ-साथ वह केंद्र की ताकत का इस्तेमाल भी करना चाहते हैं. वैसे भी कहा जाता है कि राजनीति में कोई किसी का दोस्त और दुश्मन नहीं होता.

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