हरियाणा में तेजी से गिरता जा रहा भूजल स्तर, धान की खेती मुख्य वजह

हरियाणा में गिरते भू जल स्तर का सबसे बड़ा कारण बड़ी मात्रा में धान की खेती होना भी है.

News18 Haryana
Updated: June 13, 2019, 12:53 PM IST
हरियाणा में तेजी से गिरता जा रहा भूजल स्तर, धान की खेती मुख्य वजह
धान की खेती करता किसान
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Updated: June 13, 2019, 12:53 PM IST
हरियाणा प्रदेश में भूजल स्तर तेज़ी से गिरता जा रहा है. हरियाणा में धान की खेती बेहद बड़े पैमाने पर होती है और भूजल स्तर तेजी से गिरने की एक मुख्य वजह है. सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि हर एक किलो चावल के उत्पादन के लिए करीब पांच हज़ार लीटर पानी की ज़रूरत होती है.

धान की खेती भूजल स्तर गिरने का बड़ा कारण



हरियाणा में गिरते भू जल स्तर का सबसे बड़ा कारण बड़ी मात्रा में धान की खेती होना भी है. हरियाणा गठन के समय प्रदेश में धान का रकबा 1 लाख 92 हजार हेक्टेयर था जो पिछले साल 14 लाख 22 हजार हेक्टेयर को पार कर गया है. एक एकड़ धान में करीब 26 बार पानी लगाने की जरूरत पड़ती है यानि एक किलोग्राम चावल पैदा करने के लिए करीब 5389 लीटर पानी की जरुरत होती है. इसीलिए सरकार ने अब धान के बजाय दूसरी फसलों की पैदावार की अपील की है.

किसानों को सरकार देने जा रही सब्सिडी

इसके लिए सरकार ने एक पायलट प्रोजेक्ट भी शुरु किया है जिसके तहत धान के बजाय अरहर और मक्का उगाने वाले किसानों को सरकार सब्सिडी देने जा रही है. इसके साथ तालाबों और जलाशयों के माध्यम से भूजल स्तर को रिचार्ज करने के लिए पोंड अथोरिटी के द्वारा तलाबों की सफाई करवाई जा रही है.

प्रदेश को 200 लाख एकड़ फीट पानी की जरूरत

हरियाणा को करीब 200 लाख एकड़ फीट पानी की जरूरत होती है. यमुना और भाखड़ा से करीब 23 लाख एकड़ फीट पानी प्रदेश को मिल पाता है जबकि 120 लाख एकड़ फीट पानी की आपूर्ति 8 लाख 47 हजार 750 ट्यूबवेलों पर टिकी है. वहीं 2 लाख 97 हजार डीजल पम्प और 5 लाख 50 हजार डीजल पम्प सेट भी लगे हैं. इस तरह प्रदेश में फिलहाल 57 लाख एकड़ फीट पानी की कमी है.
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प्रति व्यक्ति 70 लीटर पानी भी नहीं मिल पा रहा

प्रदेश में हर दिन करीब 2111.47 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) पानी चाहिए, शहरी क्षेत्रों में 1081.68 एमएलडी और ग्रामीण क्षेत्रों में 1030.90 एमएलडी पानी की मांग है. पेयजल किल्लत के चलते प्रदेश के 6804 गांवों में से 4189 गांवों में प्रति व्यक्ति निर्धारित 70 लीटर पानी भी नहीं मिल पा रहा है.

भूजल पर हरियाणा की निर्भरता के मद्देनज़र आने वाला भविष्य ज्यादा उज्जवल नहीं दिख रहा. वो दिन दूर नहीं जब पानी के लिए प्रदेश में त्राही-माम की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी. इस विपदा से सिर्फ सरकार ही प्रदेशवासियों को बचा सकती है, बशर्ते उसकी कथनी और करनी एक दूसरे से मेल खाए.

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