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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019: इस चुनाव में किसकी नैया पार लगाएगी जाट बिरादरी?

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: October 14, 2019, 10:21 AM IST
हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019: इस चुनाव में किसकी नैया पार लगाएगी जाट बिरादरी?
ये कोई पहला मौका नहीं है कि जब जाट उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा टिकट दी गई हैं. (Demo Pic)

हरियाणा (Haryana) में इस बार भी जाट-नॉनजाट (Jaat-Non Jaat) एक चुनावी मुद्दा है. जाटों का गोत्र भी एक चुनावी मुद्दा है, जिसके आधार पर बीजेपी (BJP) कुछ इलाकों में अपनी जीत तय मान रही है. वहीं कांग्रेस (Congress) के रणनीतिकार जातीय आधार पर यह आंकलन करने में लगे हैं कि अगर बांगर और देशवाली रीजन के जाट एक ही पार्टी के पक्ष में चले गए तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

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  • Last Updated: October 14, 2019, 10:21 AM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 (Haryana Assembly Elections 2019) का प्रचार अभियान अब धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगा है. राजनीतिक दल खासकर कांग्रेस (Congress) और बीजेपी (BJP) ने अब अपने-अपने स्टार प्रचारकों की फौज को मैदान में उतार दिया है. बीजेपी ने जहां इस चुनाव में कई स्टार प्रचारकों की फौज उतारी है तो वहीं कांग्रेस अभी तक पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) और कुमारी शैलजा (Kumari Shailja) के चुनाव प्रचार पर ही निर्भर थी. लेकिन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) 14 अक्टूबर को हरियाणा में पहली चुनावी रैली करने जा रहे हैं. वहीं, बीजेपी भी अब अपने सबसे बड़े स्टार प्रचारक पीएम मोदी (PM Modi) को मैदान में उतारने जा रही है. पीएम मोदी की पहली चुनावी रैली 14 अक्टूबर को बल्लभगढ़ में होने जा रही है.

पीएम मोदी और राहुल गांधी की पहली रैली सोमवार को
बता दें कि दोनों राष्ट्रीय दलों ने घोषणापत्र जारी कर दिए हैं. दोनों दलों ने तमाम वादे किए हैं. खेती-किसानी से लेकर रोजगार देने तक कई वादे किए गए हैं. लेकिन, बीजेपी के स्टार प्रचारकों के शुरुआती रैली से पता चलता है कि हरियाणा में भी धारा 370 और राफेल मुद्दा बनने जा रहा है. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृह मंत्री अमित शाह की पहली चुनावी रैली ने राफेल की शस्त्र पूजा और धारा 370 को चुनावी मुद्दा बना दिया है. हालांकि, कांग्रेस के स्थानीय नेता अभी तक हरियाणा के स्थानीय मुद्दों को ही उठा रहे थे, लेकिन कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं की जैसे ही रैलिया शुरू होंगी राफेल, धारा 370 और मॉब लिंचिंग को मुद्दा बनाया जा सकता है.

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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 का प्रचार अभियान अब धीरे-धीरे जोर पकड़ने लगा है.


हरियाणा के 'रण' में जाट लैंड पर किसका पलड़ा भारी?
बता दें कि हरियाणा की राजनीति भी जातियों में बंटी हुई है. यहां पर जाट और नॉन जाट हमेशा से ही मुद्दा रहा है. हरियाणा चुनावों में 36 बिरादरी, जाट बनाम नॉन जाट जैसे शब्दों का इस्तेमाल आमतौर पर होता रहा है. हालांकि, हरियाणा में बेरोजगारों की फौज भी इस समय में भारी संख्या में है. इसके बावजूद हरियाणा में वोटर जाति के आधार पर बंटे हुए नजर आ रहे हैं. हरियाणा में इस बार भी जाट-नॉन जाट एक चुनावी मुद्दा है. जाटों का गोत्र भी इस बार फिर से एक चुनावी मुद्दा है, जिसके आधार पर बीजेपी कुछ इलाकों में अपनी जीत तय मान रही है. वहीं कांग्रेस के रणनीतिकार जातीय आधार पर यह आंकलन लगा रहे हैं कि अगर बांगर और देशवाली रीजन के जाट एक ही पार्टी के पक्ष में चले गए तो बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पिछड़ी जातियों के साथ हुए थे टकराव!
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हरियाणा की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय न्यूज 18 हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, 'हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन की हिंसा के प्रभाव से लोग अभी भी मुक्त नहीं हुए हैं. हरियाणा में जाट बनाम नॉन जाट का विभाजन अभी भी साफ दिख रहा है. पिछड़ी जातियों में सैनी समेत कई अन्य पिछड़ी जातियां जाट विरोधी मानसिकता के साथ वोट करने की योजना बना रहे हैं. चूंकि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान यादव और सैनी दो जातियों का सीधा टकराव जाटों से हुआ था. वहीं, शहरी इलाकों में पंजाबी पूरी तरह से बीजेपी के साथ नजर आ रहे हैं, क्योंकि पहली बार बीजेपी ने प्रदेश में किसी पंजाबी को मुख्यमंत्री की गद्दी दी थी. जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पंजाबी कारोबारियों के कारोबारों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया था.'

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राहुल गांधी की पहली चुनावी रैली 14 अक्टूबर को होने जा रही है


जाट बिरादरी भी दो भागों में बंटे हुए हैं
पांडेय आगे कहते हैं, 'दरअसल, हरियाणा में जाट दो दलों के बीच बंटे हुए रहे हैं. भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हरियाणा में सीएम बनने के बाद जाटों का बड़ा तबका कांग्रेस के साथ जुड़ गया था. हरियाणा के देशवाली इलाके में हुड्डा जाटों के एकछत्र नेता बन गए. जबकि, हरियाणा के बांगर क्षेत्र के जाट देवीलाल परिवार के साथ जुडे़ रहे. देवीलाल परिवार के नेता ओमप्रकाश चौटाला लंबे समय तक बांगर के जाटों के एकमात्र नेता रहे. हालांकि, इस इलाके के एक बडे़ नेता वीरेंद्र सिंह जो कभी कांग्रेस में थे, अब बीजेपी के साथ हैं, उनकी पत्नी बीजेपी से विधायक है और बेटा हिसार से बीजेपी सांसद हैं. इसके बावजूद अभी तक चौटाला परिवार का इस इलाके में प्रभाव कम नहीं हुआ है. लेकिन, बीते दो सालों में ओमप्रकाश चौटाला के दो बेटे अजय और अभय के बीच उपजे विवाद ने चौटाला परिवार को बांट दिया और उनकी पार्टी में भी टूट हो गई. इससे इस इलाके के जाटों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है.'

हरियाणा की राजनीति में जाटों का वोट शेयर करीब 25 प्रतिशत है, जिस कारण हरियाणा के 23-27 विधानसभा क्षेत्रों में तो जाट मतदाता ही हार-जीत तय करते हैं. 2014 में इन सीटों पऱ बीजेपी हार गई थी, हालांकि 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को खासा उत्साह मिला. राज्य के 79 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी को लीड मिली थी. लेकिन, 2014 के विधानसभा चुनाव में 23 जाट बहुल इलाकों में बीजेपी खाता भी नहीं खोल पाई थी.

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First published: October 13, 2019, 7:08 PM IST
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