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Haryana Assembly Election Result 2019: खट्टर मंत्रिमंडल के कई चेहरे हुए धराशायी, जानें वजह

News18Hindi
Updated: October 24, 2019, 6:12 PM IST
Haryana Assembly Election Result 2019: खट्टर मंत्रिमंडल के कई चेहरे हुए धराशायी, जानें वजह
हरियाणा में कई मंत्रियों की हार हो गई है. (सीएम मनोहर लाल खट्टर File Photo)

मनोहर लाल खट्टर मंत्रिमंडल (Manohar Lal Khattar) के कई चेहरे चुनाव हार गए हैं. कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ (Om Prakash Dhankar), कविता जैन (Kavita Jain), कैप्टन अभिमन्यु (Captain Abhimanyu) और कृष्णलाल पंवार (Krishan Lal Panwar) चुनाव हार गए हैं तो वहीं मनीष ग्रोवर (Manish grover) पहले पीछे चल रह थे, हालांकि बाद में वो आगे हो गए.

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  • Last Updated: October 24, 2019, 6:12 PM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के नतीजे (Haryana Assembly Election Result 2019) बीजेपी (BJP) के लिए काफी चौंकाने वाले आए हैं. मनोहर लाल खट्टर सरकार के कई मंत्रियों की हार हुई है. अभी तक मंत्रिमंडल के आधा दर्जन मंत्री या तो चुनाव हार गए हैं या फिर पीछे चल रहे हैं. जिस तरह के नतीजे आते दिख रहे हैं उससे हरियाणा में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना साफ नजर आ रही है. अभी तक सीटों के रुझानों से लग रहा है कि जननायक जनता पार्टी (JJP) किंग मेकर की भूमिका निभाने जा रही है. मनोहर लाल खट्टर मंत्रिमंडल (Manohar Lal Khattar Cabinet) के कई चेहरे चुनाव हार गए हैं. कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ (Om Prakash Dhankar), कविता जैन (Kavita Jain),  कैप्टन अभिमन्यु (Captain Abhimanyu) और कृष्णलाल पंवार (Krishan Lal Panwar) चुनाव हार गए हैं तो वहीं मनीष ग्रोवर (Manish Grover) पहले पीछे चल रह थे, लेकिन बाद में फिर वो आगे हो गए.

त्रिशंकु विधानसभा की संभावना

मतगणना में बीजेपी, कांग्रेस और जेजेपी के बीच कांटे का मुकाबला चल रहा है. बीजेपी 39, कांग्रेस 30 और जेजेपी ने 11 सीटों पर बढ़त बना रखी है या जीत चुकी है. लेकिन, मनोहर लाल खट्टर कैबिनेट के कद्दावर चेहरे धाराशाई हो गए हैं. इनमें ओमप्रकाश धनखड़, कविता जैन, कैप्‍टन अभिमन्‍यु और परिवहन मंत्री कृष्‍णलाल पंवार हार गए हैं. हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में ऐसा उलटफेर हुआ कि मनोहर लाल खट्टर सरकार के कई दिग्गज मंत्री अपनी सीट हार गए.

 हरियाणा में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना दिखाई देने लगी है.
हरियाणा में त्रिशंकु विधानसभा की संभावना दिखाई देने लगी है.


ओम प्रकाश धनखड़
हरियाणा सरकार के कद्दावर मंत्रियों में से एक, ओम प्रकाश धनखड़ चुनाव हार गए हैं. कृषि मंत्री ओपी धनखड़ बादली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे थे. उनके पक्ष में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और बीजेपी सांसद सनी देओल ने प्रचार किया था, लेकिन वो जीत नहीं सके. ओपी धनखड़ 2014 में यहां से विधायक चुने गए थे और वर्तमान में वो मनोहर सरकार में मंत्री थे. धनखड़ को कुलदीप वत्स ने लगभग 11 हजार वोटों के अंतर से हराया है.

कैप्टन अभिमन्यु
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हरियाणा के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु नारनौंद विधानसभा सीट से चुनाव हार गए हैं. सीएम के बाद कैप्टन के पास ही सबसे ताकतवर मंत्रालय था. कैप्टन अभिमन्यु को दुष्यंत चौटाला की पार्टी जेजेपी के रामकुमार गौतम ने हराया है. गौतम पूर्व विधायक रह चुके हैं.

रामबिलास शर्मा
खट्टर सरकार में एक और कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री रामविलास शर्मा चुनाव हार गए हैं. शर्मा की महेंद्रगढ़ विधानसभा क्षेत्र से हार हुई है. शर्मा की हार भी चौंकाने वाली है. रामविलास शर्मा को कांग्रेस के राव दान सिंह ने हराया है. दोनों एक-दूसरे के सामने सातवीं वार आमने-सामने थे. पिछले छह मुकाबले में दोनों ने तीन-तीन बार एक दूसरे को हराया था. इस सीट पर शर्मा पांच बार और दान सिंह तीन बार चुनाव जीत चुके हैं.

कृष्ण लाल पंवार
मनोहर मंत्रिमंडल के एक और दिग्गज मंत्री कृष्ण लाल पंवार भी इसराना विधानसभा सीट से चुनाव हार गए. पंवार हरियाणा के परिवहन मंत्री थे. उन्हें कांग्रेस के बलबीर वाल्मीकि ने हराया है. जबकि 2014 में पंवार ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े बलबीर सिंह को हरा दिया था.

कवित जैन
हरियाणा की सोनीपत सीट से बीजेपी उम्मीदवार कविता जैन की भी हार हुई है. कविता जैन मनोहर सरकार में शामिल इकलौती महिला मंत्री थीं. उन्हें कांग्रेस के सुरेंद्र पंवार ने हराया है. इस सीट से कविता जैन पिछले दो बार से चुनाव जीतती आ रही थीं.

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ऐसे में सवाल उठता है कि आखिरकार किन वजहों से इतने बड़े स्तर पर मंत्रियों की हार हुई है. जानकारों का मानना है कि कई मंत्रियों ने मंत्री बनने के बाद जनता से दूरी बना ली थी. कुछ मंंत्रियों के गलत बयानबाजी ने भी हार में अहम रोल अदा किया. दूसरी तरफ विपक्षी पार्टियों ने चुनाव के दौरान स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाया.



हरियाणा की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय ने न्यूज़ 18 हिंदी से बातचीत में कहा, 'नतीजों के पता चलता है कि हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन की हिंसा के प्रभाव से लोग अभी भी मुक्त नहीं हुए हैं. हरियाणा में जाट बनाम नॉन जाट का विभाजन इस चुनाव में भी साफ दिखाई दिया. पिछड़ी जातियों में सैनी समेत कई अन्य पिछड़ी जातियों ने जाट विरोधी मानसिकता के साथ वोट किया. चूंकि जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान यादव और सैनी दो जातियों का सीधा टकराव जाटों से हुआ था. शहरी इलाकों में जहां-जहां पंजाबी थे वो पूरी तरह से बीजेपी के साथ नजर आए, क्योंकि पहली बार बीजेपी ने प्रदेश में किसी पंजाबी को मुख्यमंत्री की गद्दी दी थी.'

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First published: October 24, 2019, 4:46 PM IST
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