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Haryana Budget Session: खट्टर सरकार ने माना- किसान आंदोलन में मरे 68 लोग, लेकिन नहीं देंगे आर्थिक सहायता

किसान आंदोलन में मारे गए किसानों का मुद्दा सदर में गूंजा (सीएम मनोहर लाल फाइल फोटो)

किसान आंदोलन में मारे गए किसानों का मुद्दा सदर में गूंजा (सीएम मनोहर लाल फाइल फोटो)

Kisan Aandolan: 26 नवंबर से दिल्ली बॉर्डर पर चल रहे धरने-प्रदर्शनों में 18 फरवरी तक 68 लोगों की मौत हुई है. प्रदेश सरकार ने विधानसभा में मौत की वजहें भी बताई हैं.

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चंडीगढ़. दिल्ली बॉर्डर पर चले रहे किसानों के धरना-प्रदर्शन में अब तक 68 लोगों की मौत हुई है. यह जानकारी हरियाणा सरकार (Haryana Government) ने बजट सत्र के दौरान दी. हरियाणा सरकार ने बताया कि मरने वाले 68 लोगों में से 51 लोगों की मौत (Death) स्वास्थ्य कारणों से हुई है. वहीं 15 लोग सड़क हादसों में मरे हैं, जबकि 2 लोगों ने आत्महत्या की है. मरने वालों में 21 हरियाणा के जबकि 47 पंजाब के हैं. हरियाणा सरकार ने कहा मृतकों को वित्तीय सहायता या नौकरी देने का कोई विचार नहीं है.

बता दें कि कांग्रेस विधायक आफताब अहमद और इंदू राज नरवाल ने बजट सत्र में यह मुद्दा उठाते हुए इस संबंध में सवाल लगाया था. हालांकि, सवाल पर चर्चा से ठीक पहले प्रश्नकाल खत्म हो गया, जिससे कांग्रेस विधायकों को गृह मंत्री के लिखित जवाब से ही काम चलाना पड़ा. राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान इस मुद्दे पर खूब हंगामा हुआ. कांग्रेस विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने आरोप लगाया कि अन्नदाता सड़कों पर है, लेकिन उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही.

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कांग्रेस पर लगाए किसानों को उकसाने के आरोप
सरकार की ओर से कहा गया कि किसानों को मौत के लिए उकसाने के लिए कांग्रेस के नेता जिम्मेदार हैं. कांग्रेस विधायकों पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि किसी की भी मौत दुखदायी होती है, लेकिन बॉर्डर पर किसानों की मौत के लिए कांग्रेसी और वह तथाकथित नेता सीधे-सीधे जिम्मेदार हैं जिन्होंने बुजुर्ग किसानों को भी धरने पर बैठने के लिए उकसाया. देश की जनता भोले-भाले किसानों को उकसाने वाले नेताओं को कतई माफ नहीं करेगी.
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