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Haryana Election Result 2019: पिछले चुनाव में 15 पर सिमटी कांग्रेस को 'साइलेंट वोटर्स' का मिला साथ

अब तक के रुझानों के मुताबिक हरियाणा की 90 सीटों में से इस बार कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्‍कर देते हुए 33 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

अब तक के रुझानों के मुताबिक हरियाणा की 90 सीटों में से इस बार कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्‍कर देते हुए 33 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है.

Haryana Election Result 2019: हरियाणा विधानसभा 2014 में कांग्रेस (Congress) ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की थी. वहीं, इस बार के चुनावों की मतगणना में अब तक आए रुझानों के मुताबिक कांग्रेस के प्रदर्शन में 200 फीसदी से ज्‍यादा का इजाफा नजर आ रहा है. कांग्रेस इस समय 32 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. वहीं पिछले चुनावों में बीजेपी (BJP) को 47 सीट पर जीत हासिल हुई थी. इस बार बीजेपी अब तक 35 सीटों पर आगे चल रही है.

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    नई दिल्‍ली. हरियाणा में विधानसभा चुनावों (Haryana Assembly Election 2019) के लिए बीते सोमवार को हुई वोटिंग के बाद आज सुबह मतगणना (Counting) शुरू हो गई. राज्य में मुख्य मुकाबला सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस (Congress) के बीच है. तकरीबन सभी एग्जिट पोल में बीजेपी की आसान चुनावी जीत की भविष्यवाणी की गई थी. लेकिन, अब तक आए रुझानों से स्‍पष्‍ट है कि प्रचार के दौरान पस्‍त नजर आ रही कांग्रेस पिछले चुनाव से बेहतर प्रदर्शन कर रही है. कांग्रेस पिछले विधानसभा चुनाव में 15 सीटों पर सिमट गई थी. वहीं, अब तक के रुझानों के मुताबिक हरियाणा की 90 सीटों में से इस बार कांग्रेस बीजेपी को कड़ी टक्‍कर देते हुए 32 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, यानी पिछली बार के मुकाबले उसके प्रदर्शन में 200 फीसदी से ज्‍यादा इजाफा नजर आ रहा है. वहीं, बीजेपी 35 सीटों पर आगे चल रही है. स्‍पष्‍ट है कि पूरे चुनाव के दौरान खामोश रहे वोटर्स ने कांग्रेस के पक्ष में मतदान किया.

    हरियाणा की सियासत में बड़ा मुद्दा रहा है जाट बनाम गैर-जाट
    बीजेपी अब तक अपनी आसान जीत को लेकर आश्‍वस्‍त थी. फिर ऐसा क्‍या हुआ कि कांग्रेस अप्रत्‍याशित रूप से ऊपर आई. जानकारों का मानना है कि इसमें तमाम फैक्‍टर्स के साथ 'साइलेंट वोटर्स' की अहम भूमिका रही है. ये साइलेंट वोटर्स हर वर्ग से हैं. इसमें किसान (Farmers), औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक (Industrial Labour), नाराज जाट और रोजगार (Employment) की तलाश में भटक रहे युवा शामिल हैं. हरियाणा की सियासत में जाट बनाम गैर-जाट (Jat Vs Non-Jat) बड़ा मुद्दा रहा है. हरियाणा की राजनीति में जाटों का खासा दबदबा रहता है. वहीं, पिछली बार बीजेपी ने बहुमत मिलने पर जाट नेता के बजाय गैर-जाट नेता मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया. यहीं से जाटों के खिलाफ गैर-जाटों की गोलबंदी को धार मिली.

    स्‍थानीय के बजाय बीजेपी करती रही राष्‍ट्रीय मुद्दों पर बात
    हरियाणा में चुनाव प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों (Local Issues) पर राष्ट्रीय मुद्दे (National Issues) हावी नजर आए. यहां तक कि किसानों को सिंचाई के लिए पानी देने की बात में भी पाकिस्‍तान (Pakistan) को जोड़ दिया गया. बीजेपी ने वादा किया कि पाकिस्तान जा रहे पानी को रोककर हरियाणा की नहरों में लाया जाएगा. बीजेपी के नेताओं से जब इस पर सवाल पूछा गया तो उन्‍होंने कहा था कि अगर सीमा पर सबसे ज्यादा हरियाणा के जवान शहीद हो रहे हैं तो यहां के चुनावों में पाकिस्तान की भी चर्चा होगी और कश्मीर की भी. वहीं, किसान पराली जलाने पर मुकदमे और जुर्माने को लकर भी नाराज थे. उनका कहना था कि सरकार पराली नहीं जलाने के लिए विकल्‍प देने के बजाय जुर्माना लगा रही है. उनका कहना था कि कर्ज में डूबा किसान पराली के निस्‍तारण के लिए सरकार की ओर से मुहैया कराई जा रही महंगी व्‍यवस्‍थाओं से मुश्किल में पड़ जाएगा.

    पिछली बार बीजेपी ने बहुमत मिलने पर जाट नेता के बजाय गैर-जाट नेता मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया.


    जाट आंदोलन में खट्टर सरकार की हुई थी किरकिरी
    बीजेपी खट्टर सरकार (Khattar Government) की भर्ती-बदली प्रक्रिया में पारदर्शिता को मुद्दा बनाकर गैर-जाटों को याद दिला रही थी यह वही राज्‍य है, जहां पहले सरकारी नौकरियों में सिर्फ जाटों की सुनी जाती थी. कांग्रेस के बीएस हुड्डा (BS Hooda) ने इसी को मुद्दा बनाया. उन्‍होंने कहा कि अगर खट्टर की वापसी हुई तो जाटों के लिए कुछ नहीं बचेगा. वहीं, जाट आरक्षण (Jat Reservation) की मांग को लेकर चला आंदोलन भी अब बीजेपी के लिए मुश्किल पैदा करा रहा है. आंदोलनकारियों ने हिंसक प्रदर्शन किए. यहां तक कि जाट आंदोलन के चलते गुरुग्राम में राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी का कार्यक्रम रद्द करना पड़ा था. इस दौरान हरियाणा के लोगों ने सीएम की ओर से शांति बनाए रखने की अपील को भी नकार दिया था. हालत ऐसी थी कि खट्टर सरकार को कई शहरों में कर्फ्यू लगाना पड़ा. सेना ने फ्लैग मार्च भी निकाला था. इसके बावजूद हालात सामान्य नहीं हो पा रहे थे.

    बेरोजगारी का मुद्दा चुनाव प्रचार के दौरान रहा हावी
    चुनाव प्रचार के दौर में बेरोजगारी (Unemployment) का मुद्दा भी हावी रहा. सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) की मई-अगस्त में जारी रिपोर्ट में बताया गया था कि राज्य में बेरोजगारों का आंकड़ा 20 लाख पार कर गया है. आंकड़े के मुताबिक, पंजाब, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और झारखंड की तुलना में हरियाणा में बेरोजगारों की संख्या अधिक है. इसके बाद विपक्षी दलों ने खट्टर सरकार को आड़े हाथ लेना शुरू कर दिया. जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला ने कहा कि खट्टर सरकार में हरियाणा में बेरोजगारी बहुत तेजी से बढ़ी है. प्रदेश में बेरोजगारी 29 प्रतिशत तक बढ़ गई है. खट्टर सरकार विपक्ष के बेरोजगारी को लेकर किए गए हमलों का माकूल जवाब नहीं दे पाई. साइलेंट वोटर्स को बेरोजगारी के आंकड़ों ने सरकार के दावों से ज्‍यादा प्रभावित किया.

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