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गौरक्षकों पर हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, गोसेवा आयोग बैकफुट पर..!

गोसेवा आयोग को डर है कि कहीं गोरक्षकोंं को आई कार्ड जारी करने के बाद कोई नई मुसीबत न पैदा हो जाए

गोसेवा आयोग को डर है कि कहीं गोरक्षकोंं को आई कार्ड जारी करने के बाद कोई नई मुसीबत न पैदा हो जाए

गोरक्षकों से कहा गया है कि वे सिर्फ पुलिस को सूचना दें, कोई एक्शन न लें: भानीराम मंगला

    हरियाणा सरकार गोरक्षकों को सरकारी मान्यता देकर आई कार्ड देने का प्लान वापस लेने जा रही है. गोरक्षकों की बढ़ती गुंडागर्दी और उनके पुलिस के जाल में फंसने की घटनाओं को देखते हुए यहां का गोसेवा आयोग बैकफुट पर है.

    आयोग ने गोरक्षकों का पहचान-पत्र बनाने की घोषणा की थी. इसकी प्रक्रिया भी चल रही थी. लेकिन अब आयोग को इस तरह के आईकार्ड के दुरुपयोग की आशंका है, जिसके चलते अब फैसले पर यू-टर्न लिया जा रहा है.

    गोरक्षकों पर अब सख्ती का इरादा
    हरियाणा गोसेवा आयोग हरियाणा के चेयरमैन भानीराम मंगला ने न्यूज18हिंदी से बातचीत में इस बात की जानकारी दी. मंगला ने कहा "गोरक्षकों से कहा गया है कि वो सिर्फ पुलिस को सूचना दें, कोई एक्शन न लें. पुलिस को कहा गया है वे गोरक्षकों से सख्ती से निपटें. देखिए, कुछ दिनों से गोहत्या के मामले काफी कम हो गए हैं."

    News18 Hindi"पिछले दिनों रोहतक में पूरे प्रदेश से करीब सात सौ गोरक्षकों का सम्मेलन बुलाया गया था. उसमें मैंने कहा था कि कानून हाथ में लेने की जरूरत नहीं है. हम कानून तब हाथ में लेते थे, जब पुलिस काम नहीं करती थी. अब सिर्फ सूचना देने का काम करना है."
    भानीराम मंगला, चेयरमैन हरियाणा गोसेवा आयोग


    सम्मेलन में हरियाणा सरकार का एक मंत्री भी शामिल हुआ था.

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    गोसेवा आयोग के चेयरमैन का कहना है कि आई कार्ड देने के बाद कहीं उसका दुरुपयोग न हो जाए, ऐसा हुआ तो दिक्कत होगी इसलिए फिलहाल यह फैसला टाला जा रहा है. आईकार्ड जारी होने के बाद किसी कथित गोहत्यारे की हत्या होती तो रिकॉर्ड की वजह से गोरक्षकों को पकड़ना आसान हो जाता. इससे सरकार विवाद में घिर जाती.

    खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गोरक्षकों की गुंडागर्दी पर दो बार सार्वजनिक तौर पर चिंता जाहिर कर चुके हैं. उन्होंने कहा था कि 80-90 फीसदी गौरक्षक फर्जी हैं.


    आईकार्ड देने पर विवाद बढ़ता 

    ऐसे में कानून हाथ में लेने वालों को आई कार्ड देकर लीगल करने से विवाद बढ़ता.हरियाणा कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता एवं पूर्व परिवहन मंत्री आफताब अहमद ने आई गोरक्षकों का कार्ड बनाने की योजना का विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि ऐसी मान्‍यता नहीं दी जानी चाहिए. इससे गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी और बढ़ेगी.

    हालांकि पहले यह दावा किया जा रहा था कि मान्‍यता देने से गोरक्षा के नाम पर बढ़ रही गुंडागर्दी और मारपीट रोकने में मदद मिलेगी. इन गोरक्षकों के अलावा कोई और व्‍यक्‍ति जांच-पड़ताल नहीं कर पाएगा.

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    इसलिए हर जिले से गोरक्षक बनने के लिए आवेदन मांगे गए थे. उनकी पुलिस वेरीफिकेशन हो रही थी. ताकि यह पता चल सके कि कहीं आवेदन करने वाला आपराधिक गतिविधि में संलिप्‍त तो नहीं है. नौ जिलों से 275 लोगों ने गोरक्षक बनने के लिए आवेदन कर दिया था. इसमें से करीब 80 गोरक्षक को आई कार्ड देने की तैयारी थी.

    केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर भी गोरक्षकों का वेरीफिकेशन कराकर उन्हें आई कार्ड जारी करने के पक्ष में थे. हालांकि उन्होंने कहा कि मान्यता प्राप्त गोरक्षकों को भी गोरक्षा के नाम पर कानून हाथ में लेने का हक नहीं है. वह इस मामले में कोई दादागिरी नहीं कर सकता.

    यहां कार्ड बनवाने के लिए एक भी आवेदन नहीं

    उत्तराखंड गो सेवा आयोग के अध्यक्ष नरेंद्र रावत के अनुसार अब तक एक भी आईकार्ड जारी नहीं किया जा सका है क्योंकि किसी भी ज़िले से उन्हें गौरक्षकों के नाम के प्रस्ताव नहीं मिले हैं. रावत के अनुसार रिमाइंडर दिए जा चुके हैं लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ.

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    आयोग ने पिछले महीने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस बात की शिकायत भी की है कि ज़िलाधिकारी इस काम को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं और शासन के स्तर से इस पर दखल की जरूरत है. फिलहाल यह साफ़ नहीं है कि  गोरक्षकों के आईकार्ड बन भी पाएंगे या नहीं और बनेंगे तो कब तक.

    -साथ में उत्‍तराखंड से राजेश डोबरियाल 

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