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जाटों ने फिर भरी हुंकार, उपद्रवियों से कैसे निपटेगी सरकार?

जाटों ने फिर भरी हुंकार, उपद्रवियों से कैसे निपटेगी सरकार?

Photo- news18hindi/ETV

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हरियाणा में एक और आंदोलन की तैयारी चल रही है. आंदोलन की तारीख भी जारी कर दी गई है. जाट समुदाय को लामबंद किया जा रहा है. आंदोलन को कामयाब बनाने के लिए बैठकों का दौर जारी है. तैयारी सरकार भी कर रही है.

हरियाणा में एक और आंदोलन की तैयारी चल रही है. आंदोलन की तारीख भी जारी कर दी गई है. जाट समुदाय को लामबंद किया जा रहा है. आंदोलन को कामयाब बनाने के लिए बैठकों का दौर जारी है. तैयारी सरकार भी कर रही है.

पुलिस को ट्रेनिंग दी जा रही है जिससे किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके. पिछले अनुभव को देखते हुए हरियाणा सरकार ने केंद्र से फोर्स की मांग भी की है. हरियाणा की मनोहर सरकार जाट आंदोलन से निपटने की तैयारियों में जुट गई है. सरकार ने केंद्र सरकार से अर्धसैनिक बलों की 55 कंपनियां मांगी है. इसके अलावा 7 हजार होम गार्डों को भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है.

इन सबके बीच सवाल ये है कि क्या इस बार आंदोलन एक हाथ में होगा या फिर वक्त बीतने के साथ अलग-अलग आंदोलन के रहनुमा अलग-अलग हो जाएंगे.  सवाल ये भी है कि क्या इस बार जाटों का आंदोलन शांतिपूर्वक होगा और सबसे बड़ा सवाल ये है कि जब मामला कोर्ट में है तो जाटों का आंदोलन करना कितना जायज है.

जाट आंदोलन का ऐलान होते ही प्रदेश की सियासत एक बार फिर गरमा गई है. जाटों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक दलों में आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया है.

जाटों के दो गुट 27 और 29 जनवरी से आंदोलन की शुरुआत करेगा. जाटों की हुंकार को देखते हुए मनोहर सरकार भी सतर्क हो गई है.

गृह सचिव रामनिवास ने कहा कि प्रदेश में इस बार हालात नहीं बिगड़ने दिया जाएगा. मुनक नहर समेत सार्वजनिक और निजी संपत्ति का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

जाट आंदोलन का ऐलान होते ही. जाट नेता अब लोगों को लामबंद करने में जुट गये हैं और इसके लिए जाट नेताओं की बैठकों का दौर जारी है. सोनीपत में जाट नेताओं ने बैठक कर और रोहतक में आंदोलन करने का ऐलान किया.

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने जाटों से अपील की है कि वो शांतिपूर्वक आंदोलन करें. वहीं कैप्टन अभिमन्यु का आरोप है कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा प्रदेश का माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं.

मनोहर के मंत्रियों ने आरक्षण का ताना-बाना बुन रहे यशपाल मलिक पर भी हमला बोला. इन सबसे अलग मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने साफ कर दिया है कि इस बार किसी को कानून हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा.

बता दें पिछले साल हुए जाटों के हिंसक आंदोलन में हरियाणा सरकार को बड़ा नुकसान हुआ था. इस आंदोलन में प्रदेश को लगभर 34 हजार करोड़ का नुकसान हुआ था और इसमें कई लोगों की जाने भी गई थी.

कब और कैसे शुरु हुआ आंदोलन ?

13 फरवरी 2016 को हरियणा में जाट आंदोलन की शुरुआत हुई. पांच दिनों तक जाट समुदाय ने शांतिपूर्ण तरीके से धरना और प्रदर्शन किया. 18 फरवरी से आंदोलन ने हिंसक रूप धारण कर लिया. इस आंदोलन ने इतना भयानक रूप ले लिया था कि लोगों का घर से बाहर निकला तक मुश्किल हो गया था कई दिनों तक लोगों को दुकाने बंद रखनी पड़ी

हिंसा में कौन से जिले हुए प्रभावित ?

जाट आंदोलन में हुई में हरियाणा के सोनीपत, रोहतक, झज्जर और भिवानी जिले सबसे ज्य़ादा प्रभावित हुए. रोहतक में तो प्रदर्शनकारियों ने कैप्टन अभिमन्यु के घर को भी नहीं छोड़ा. प्रदर्शनकारियों ने कैप्टन अभिमन्यु के घर को आग के हवाले कर दिया था.

प्रदेश को हुआ कितना नुकसान ?

जाट आंदोलन के दौरान प्रदेश को लगभग 34,000 करोड़ का नुकसान हुआ और इसमें करीब 18 लोगों को जान गवानी पड़ी थी औऱ कई लोग घायल हुए थे. प्रदर्शनकारियों द्वारा हजारों दुकानें जला दी गई थी औऱ कई गांव को भी आग के हवाले कर दिया था.

कब शांत हुआ आंदोलन?

हरियाणा में आरक्षण के लिए जाटों के आंदोलन में हुई हिंसा 9वें दिन जाकर शांत हुआ. प्रदेश सरकार के आश्वासन और केंद्र सरकार के हस्तक्षेप से आंदोलन को शांत करवाया गया. हालांकि आंदोलनकारियों को खदेड़ने के लिए सरकार ने आर्मी को बुलाया था.

राज्यपाल ने जाट आरक्षण विधेयक पर किए दस्तखत:

हरियाणा में जाट समेत 5 अन्य जातियों को आरक्षण अब मिल गया है, पिछले महीने पारित किए विधेयक पर राज्यपाल ने  15 अप्रैल को दस्तखत कर दिए हैं. जाटों के साथ ही पांच अन्य जातियों जट सिख, रोड़, बिश्नोई, त्यागी और मुल्ला जाट/मुस्लिम जाट को भी पिछड़ा वर्ग में आरक्षण की सुविधा दी गई है.

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