होम /न्यूज /हरियाणा /हरियाणा: अभी भी कायम है वंशवाद का दबदबा

हरियाणा: अभी भी कायम है वंशवाद का दबदबा

आजादी के बाद से ही हर चुनाव में वंशवाद राजनीति की धमक महसूस की जाती रही है। केंद्र में जहां नेहरू-गांधी परिवार ने राज किया तो वहीं राज्‍यों में अलग-अलग राजनीतिक परिवारों का दबदबा रहा। मसलन, उत्‍तर प्रदेश में यादव, कर्नाटक में गौड़ा और हरियाणा में चौटाला परिवार का दबदबा हर बार चुनाव में महसूस किया गया।

आजादी के बाद से ही हर चुनाव में वंशवाद राजनीति की धमक महसूस की जाती रही है। केंद्र में जहां नेहरू-गांधी परिवार ने राज किया तो वहीं राज्‍यों में अलग-अलग राजनीतिक परिवारों का दबदबा रहा। मसलन, उत्‍तर प्रदेश में यादव, कर्नाटक में गौड़ा और हरियाणा में चौटाला परिवार का दबदबा हर बार चुनाव में महसूस किया गया।

आजादी के बाद से ही हर चुनाव में वंशवाद राजनीति की धमक महसूस की जाती रही है। केंद्र में जहां नेहरू-गांधी परिवार ने राज क ...अधिक पढ़ें

  • News18
  • Last Updated :

    आजादी के बाद से ही हर चुनाव में वंशवाद राजनीति की धमक महसूस की जाती रही है। केंद्र में जहां नेहरू-गांधी परिवार ने राज किया तो वहीं राज्‍यों में अलग-अलग राजनीतिक परिवारों का दबदबा रहा। मसलन, उत्‍तर प्रदेश में यादव, कर्नाटक में गौड़ा और हरियाणा में चौटाला परिवार का दबदबा हर बार चुनाव में महसूस किया गया।

    2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की शानदार जीत से यही संदेश गया कि केंद्र में खास परिवार का दबदबा खत्‍म हो गया । यह बात को बल मिला कि वंशवाद की राजनीति उतार पर है। हरियाणा के चुनाव नतीजे भी बताते हैं कि कैसे भाजपा राज्‍य की राजनीति में रसूख रखने वाले लाल, चौटाला व बिश्‍नोई परिवार के प्रभाव को समेटने में सफल रही। हालांकि, अभी भी इसे पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है। हमें यह ध्‍यान रखना होगा कि हरियाणा के इस चुनाव में और इस लोकसभा चुनाव में परिवारों का असर है।

    एक नजर हरियाणा की सियासत में परिवारवाद और उनसे जुड़े तथ्‍यों पर:

    देवीलाल (1914-2001): हरियाणा की राजनीति का जिक्र देवीलाल के बिना अधूरा है। देवीलाल प्रदेश के मुख्‍यमंत्री बने और 1989 से 1991 के बीच उपप्रधानमंत्री भी रहे। इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अध्‍यक्ष और देवीलाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला ने भी हरियाणा के सीएम की कुर्सी संभाली। इस बार सियासी अखाड़े में चौटाला परिवार के तीन सदस्‍य उतरे थे। इनमें ओमप्रकाश चौटाला के बेटे अभय चौटाला (ऐलानाबाद) और अजय चौटाला की बीवी नैना चौटाला (डबवाली) ने चुनाव में जीत का स्‍वाद चखा। हालांकि, पोते दुष्‍यंत चौटाला (उचाना कलां) को हार का सामना करना पड़ा। फिलहाल, शिक्षक भर्ती घोटाले में दोषी साबित होने के बाद ओमप्रकाश चौटाला और उनके बेटे अजय चौटाला जेल में हैं।

    भजनलाल (1930-2011): पूर्व सीएम भजनलाल के दोनों बेटे कुलदीप बिश्‍नोई और चंद्रमोहन हरियाणा की राजनीति के प्रमुख चेहरे हैं। इस बार विधानसभा चुनाव में हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां) के अध्‍यक्ष कुलदीप बिश्‍नोई और उनकी पत्‍नी रेणुका बिश्‍नोई चुनाव जीतने में कामयाब रहे। हालांकि, भजनलाल के बड़े बेटे और पूर्व-उपमुख्‍यमंत्री चंद्रमोहन बिश्‍नोई नलवा से चुनाव हार गए।

    बंसीलाल (1927-2006): इस बार पूर्व मुख्‍यमंत्री बंसीलाल के परिवार से चार सदस्‍य सियासी अखाड़े में जोर-आजमाइश कर रहे थे। इनमें से बंसीलाल के दिवंगत बेटे सुरेंद्र सिंह की पत्‍नी किरण चौधरी तोशाम सीट से चुनाव जीतने में कामयाब रहीं। हालांकि, दूसरे बेटे व बीसीसीआई के पूर्व अध्‍यक्ष रणबीर सिंह महेंद्रा (बधरा), बेटी सुमित्रा (लोहारू) और दामाद सोमबीर सिंह (लोहारू) हार गए।

    भूपेंद्र सिंह हुड्डा: इस बार कांग्रेस के दिग्‍गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा की प्रतिष्‍ठा दांव पर थी। गढ़ी सांपला सीट से हुड्डा चुनाव जीतने में सफल रहे, हालांकि कांग्रेस को शिकस्‍त झेलनी पड़ी। भूपेंद्र सिंह हुड्डा अविभाजित पंजाब के पूर्व मंत्री चौधरी रणबीर सिंह के बेटे हैं। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक से सांसद हैं।

    सावित्री जिंदल: भारत की सबसे अमीर महिला और जिंदल स्‍टील एंड पावर के प्रमुख नवीन जिंदल की मां सावित्री जिंदल हिसार से चुनाव मैदान में थीं, लेकिन उन्‍हें शिकस्‍त का सामना करना पड़ा।

    रणदीप सुरजेवाला: हरियाणा के पूर्व मंत्री शमशेर सिंह सुरजेवाला के बेटे रणदीप सुरजेवाला कैथल से चुनाव मैदान में उतरे थे। भाजपा लहर के बावजूद इस बार वे अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे।

    उम्‍मीदवार----राजनीतिक दल----विधानसभा सीट----हार/जीत----अंतर
    दुष्‍यंत चौटाला----इनेलो----उचान कलां----हार----7480
    अभय चौटाला----इनेलो----एलेनाबाद----जीत----11539
    नैना सिंह----इनेलो----डबवाली----जीत----8545
    सावित्री जिंदल----कांग्रेस----हिसार----हार----13646
    किरण चौधरी----कांग्रेस----तोशाम----जीत----19741
    रणबीर सिंह महेंद्रा----कांग्रेस----बधरा----हार----5006
    सोमबीर सिंह----कांग्रेस----लोहारू----हार----8667
    सुमित्रा देवी----बसपा----लोहारू----हार----39986
    कुलदीप बिश्‍नोई----हजकां----आदमपुर----जीत----17249
    रेणुका बिश्‍नोई----हजकां----हांसी----जीत----14652
    चंद्रमोहन----हजकां----नलवा----हार----7115
    भूपेंद्र सिंह हुड्डा----कांग्रेस----गढ़ी सांपला किलोई----जीत----47185
    रणदीप सुरजेवाला----कांग्रेस----कैथल----जीत----23675

    (यह विश्‍लेषण Indiaspend.com से साभार लिया गया है।)

    Tags: BJP, Om Prakash Chautala

    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें