हरियाणा में हुड्डा की वापसी कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में फंसी

कांग्रेस के इतिहास में शायद ही पहले इस तरह कमेटी बना कर महज 1 घंटे में ही रद्द करने की घटना हुई होगी. चुनावी साल में इतनी बड़ी चूक या फिर प्रदेश कमिटी की अंदरूनी कलह का सामने आना कांग्रेस के लिए किसी फजीहत से कम नहीं.

Ranjeeta Jha | News18 Haryana
Updated: March 16, 2019, 9:12 AM IST
हरियाणा में हुड्डा की वापसी कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में फंसी
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ( फाइल फोटो )
Ranjeeta Jha | News18 Haryana
Updated: March 16, 2019, 9:12 AM IST
हरियाणा कांग्रेस प्रभारी गुलाम नवी आज़ाद ने शुक्रवार शाम 4:24 बजे हरियाणा कांग्रेस की समन्वय समिति की लिस्ट जारी की. इसमें चेयरमैन हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा को बनाया गया और प्रदेश के तमाम बड़े नेताओं को भी इसमें शामिल किया गया. लेकिन इस रिलीज़ के ठीक एक घंटे बाद 5:36 मिनट पर इसे रद्द भी कर दिया गया. कांग्रेस के इतिहास में शायद ही पहले इस तरह कमेटी बना कर महज 1 घंटे में ही रद्द करने की घटना हुई होगी. चुनावी साल में इतनी बड़ी चूक या फिर प्रदेश कमिटी की अंदरूनी कलह का सामने आना कांग्रेस के लिए किसी फजीहत से कम नहीं. कांग्रेस ने विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो इस पूरे घटनाक्रम में कई खेमों से तलवार चली है.

अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी में अबतक के फैसलों पर गौर करें तो AICC में हर फेरबदल, नई कमेटी के गठनचुनाव में उम्मीदवारों के नाम सहित सभी अहम फैसलों पर AICC संगठन महासचिव के हस्ताक्षर होते हैं.  इस नाते शुक्रवार की रिलीज में भी केसी वेणुगोपाल के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, न कि हरियाणा महासचिव गुलाम नवी आज़ाद के. कहीं न कहीं शुक्रवार की रिलीज एक बड़ी गलती को भी दिखाता है. आज तक जितने भी राज्यों की कमेटी बनी उन सभी कमिटियों की घोषणा एक साथ होती थी, लेकिन हरियाणा की एक कमेटी की घोषणा हुई जिसके बाद इसे वापस भी ले लिया गया. सूत्रों की मानें तो अगर ये सिर्फ एक हस्ताक्षर का मामला है तो जल्द ही वही लिस्ट केसी वेणुगोपाल के हस्ताक्षर के साथ रिलीज की जाएगी.

हरियाणा कांग्रेस की समन्वय समिति की लिस्ट




हरियाणा कांग्रेस में गुटबाजी-

हरियाणा में कांग्रेस के नेताओं की आपसी गुटबाजी किसी से छुपी नहीं हैं. कांग्रेस ने जींद उपचुनाव में ये जरूर दिखाने की कोशिश जरूर की थी कि सभी कांग्रेसी साथ-साथ हैं. लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान भूपिंन्द्र सिंह हुड्डा और हरियाणा शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा के एक वीडियो ने पोल खोल कर रख दिया.

बताया जा रहा है कि चुनावी साल में एक कमिटी के गठन से बाकी नेताओं में असंतोष थाजिसके बाद कई नेताओं के पार्टी छोड़ने तक कि बात कही जा रही है. वहीं एक खेमा ये भी कह रहा है कि खुद भूपेंद्र सिंह हुड्डा इस कमिटी के चेयरमैन नहीं रहना चाहते, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष बनाना चाहते हैं. कहा जा रहा है कि कुलदीप विश्नोई ने भी अपनी नाराजगी दर्ज कराई है.  

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वहीं हुड्डा के विरोधी खेमा का ये मानना है कि साल 2014 में अशोक तंवर के अध्यक्ष बनने के बाद से ही हुड्डा ने कभी पार्टी के फैसले को नहीं माना. उन्होंने केवल गुटबाजी को और हवा दिया है. जिसके कारण  प्रदेश में आज तक प्रदेश कमिटी तक नहीं बनी. हालांकि हरियाणा में कांग्रेस की इस स्थिति का जिम्मेदार प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर को भी माना जाता है.

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