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ये है अशोक तंवर और भूपेंद्र हुड्डा के बीच राजनीतिक जंग की पूरी कहानी!

ओम प्रकाश | News18Hindi
Updated: October 9, 2019, 1:56 PM IST
ये है अशोक तंवर और भूपेंद्र हुड्डा के बीच राजनीतिक जंग की पूरी कहानी!
अशोक तंवर और भूपेंद्र सिंह हुड्डा की पगड़ी पॉलिटिक्स (File Photo)

Haryana Assembly Election 2019: अशोक तंवर के इस्तीफे के बाद अब कांग्रेस की रैलियों में नहीं होगी पगड़ी पॉलिटिक्स, लाल-गुलाबी रंग से दोनों नेता बताते रहे कि वे अलग-अलग हैं.

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  • Last Updated: October 9, 2019, 1:56 PM IST
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नई दिल्ली. विधानसभा चुनाव 2019 (Assembly Election 2019) के दौरान हरियाणा कांग्रेस में जो बड़ी कलह सामने आई है उसकी स्क्रिप्ट वर्ष 2014 से पहले ही लिखी जा चुकी थी. 2014 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा (Bhupinder Singh Hooda) की सत्ता जाने के बाद यह लड़ाई और बढ़ गई थी. दो नेताओं के बीच चल रही रस्साकशी का परिणाम 2019 का चुनाव आते-आते अशोक तंवर (Ashok Tanwar) के इस्तीफे के रूप में सड़क पर गया है. दरअसल, हरियाणा कांग्रेस (Congress) में हुड्डा और तंवर गुट दो बड़े गुट हैं और दोनों जनता को साफ नजर आ रहे थे. शनिवार को तो सिर्फ इस्तीफे की रस्म अदायगी भर हुई है. कांग्रेस के कार्यक्रमों में दोनों नेता और उनके कार्यकर्ता अलग दिखाने के चक्कर में भिन्न रंग की पगड़ियों में नजर आते थे. तंवर के समर्थक लाल और हुड्डा के समर्थक गुलाबी पगड़ी में होते थे. तंवर के इस्तीफे के बाद अब पार्टी की रैलियों में यह 'पगड़ी पॉलिटिक्स' नहीं होगी. सबकुछ गुलाबी ही गुलाबी दिखेगा.

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हरियाणा कांग्रेस में चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है


कांग्रेस में पावर पॉलिटिक्स

दरअसल, यह पार्टी में पावर की लड़ाई की कहानी है. अशोक तंवर करीब छह साल से हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे, जबकि भूपेंद्र हुड्डा लगातार 10 साल तक सीएम रह चुके हैं. जब सीएम की कुर्सी गई तो हुड्डा प्रदेश की कमान अपने हाथ में चाहते थे. लेकिन राहुल गांधी ने तंवर पर विश्वास किया. तंवर जेएनयू से पढ़े-लिखे हैं. वो दलित समाज से आते हैं जबकि हुड्डा हरियाणा के सबसे प्रभावशाली जाट समाज से. तंवर की शादी पूर्व राष्ट्रपति पंडित शंकर दयाल शर्मा की नातिन अवंतिका से हुई है. वो कांग्रेस नेता रहे ललित माकन की बेटी हैं. अवंतिका के पिता ललित माकन और केंदीय मंत्री रहे अजय माकन के पिता सीपी माकन भाई थे. जबकि भूपेंद्र हुड्डा के पिता रणबीर सिंह हुड्डा संविधान निर्मात्री सभा के सदस्य रहे हैं.

तंवर और हुड्डा में कभी बनी नहीं. दोनों कांग्रेस की एक म्यान में दो तलवार की तरह थे. अंतत: एक को जाना पड़ा. कांग्रेस के बड़े सिपाही होते हुए भी दोनों नेता एक दूसरे से अलग-अलग रहते थे. एक मंच पर आने से बचते थे. जब कांग्रेस नेतृत्व हरियाणा में कहीं भी बीजेपी के खिलाफ रैली करता था तो दोनों के बीच चल रही जंग खुलकर दिखती थी. एक के समर्थक गुलाबी तो दूसरे के लाल रंग की पगड़ी में होते थे.

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पार्टी से नाराज होकर इस्तीफा देने वाले अशोक तंवर ने हरियाणा कांग्रेस को हुड्डा कांग्रेस बताया है (फाइल फोटो)


दोनों की लड़ाई में पार्टी ने झेला नुकसान
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लोकसभा चुनाव से पहले वर्ष 2018 में दोनों नेता शक्ति प्रदर्शन करते दिखाई दे रहे थे. भूपेंद्र सिंह हुड्डा जनक्रांति रथयात्रा निकाल रहे थे तो अशोक तंवर साइकिल यात्रा. दोनों की इस लड़ाई में कार्यकर्ता और नेता भी दो धड़ों में बंटे हुए थे. जिन नेताओं को भूपेंद्र हुड्डा पार्टी में शामिल करवाते थे उन्हें प्रदेश अध्यक्ष की हैसियत से कभी अशोक तंवर मान्यता नहीं देते थे. दोनों की इसी लड़ाई में पांच साल से हरियाणा में न तो कांग्रेस का कोई जिलाध्यक्ष है और न ही ब्लॉक अध्यक्ष. तीन बड़े चुनाव पार्टी ने बिना संगठन के लड़ा है और उसका परिणाम यह है कि पार्टी यहां की सियासत में हाशिए पर आ गई है.

कांग्रेस को बड़े वोटबैंक से झेलनी पड़ सकती है नाराजगी

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं कि तंवर के पार्टी छोड़ने से अनुसूचित जाति के लोग कांग्रेस से नाराज हो सकते हैं. इस समुदाय की आबादी यहां करीब 21 फीसदी है. हालांकि इसी डर से कांग्रेस ने तंवर को अध्यक्ष पद से हटाने के बाद उनके बदले दलित समाज से ही आने वाली कुमारी सैलजा को पार्टी की कमान सौंपी थी. फिर भी चुनावी मौसम में एक बड़े नेता का पार्टी छोड़ना परेशानी तो खड़ा ही करेगा.

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भूपेंद्र सिंह हुड्डा लगातार 10 साल तक हरियाणा के मुख्यमंत्री रह चुके हैं (फाइल फोटो)


राहुल गांधी की पसंद थे अशोक तंवर

धमीजा कहते हैं कि तंवर लगातार अध्यक्ष बने हुए थे तो इसके पीछे उन पर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) का हाथ था. जबकि भूपेंद्र हुड्डा फिर से कांग्रेस की ओर से सीएम पद के दावेदार बनाए गए हैं तो इसके पीछे उन पर सोनिया गांधी का आशीर्वाद बताया जाता है. अशोक तंवर ने टिकट वितरण में अपने साथ हुई नाइंसाफी के खिलाफ सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) के घर के बाहर प्रदर्शन किया. उन्होंने इसके लिए राहुल गांधी का घर नहीं चुना.

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First published: October 5, 2019, 3:38 PM IST
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