Inside Story: राम रहीम से जुड़ा गुमनाम खत छापा तो पत्रकार छत्रपति को मार दिया गया

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम (File Story)

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम (File Story)

28 अगस्त 2017 को सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को 20 साल की सज़ा सुनाई. फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में राम रहीम बंद है. इस दौरान राम रहीम पर साधुओं को नपुंसक बनाने का भी आरोप लगा, जिसपर सीबीआई कोर्ट में सुनवाई चल रही है.

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साध्वी रेप केस में जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर शुक्रवार यानी आज पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड मामले में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट में फैसला आएगा. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम मुख्य आरोपी है. इसके चलते पंचकूला में हाई अलर्ट है. यहां धारा 144 लगाई गई है. पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए हैं.



बता दें, पत्रकार रामचंद्र छत्रपति राम रहीम का सच पूरी दुनिया के सामने सबसे पहले लेकर आए थे. उन्होंने सिरसा में दो साध्वियों के साथ हुए रेप की खबर को अपने अखबार 'पूरा सच' में छापा था. इस खबर के प्रकाशित होने के बाद राम रहीम के लोग पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को आए दिन धमकियां देते थे. इसके बावजूद पत्रकार रामचंद्र छत्रपति निर्भीक होकर राम रहीम के खिलाफ लिखते रहे.



रामचंद्र छत्रपति सिरसा में ‘पूरा सच’ नाम का अख़बार निकालते थे. डेरे के खिलाफ ख़बर छापने की हिम्मत रामचंद्र छत्रपति ने दिखाई थी. 13 मई 2002 को देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखी गई एक चिट्ठी में साध्वी ने राम रहीम पर डेरे में साध्वियों से यौन शोषण का आरोप लगाया गया था. इस चिट्ठी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस के पास भी भेजा गया. चिट्ठी की कुछ प्रतियां लोगों में भी बांटी गई. इस चिट्ठी को राम चंद्र छत्रपति ने अपने अख़बार ‘पूरा सच’ में छापा.






डेरे ने इस आवाज़ को अपने खिलाफ माना. जिसके बाद पत्रकार छत्रपति को धमकियां दी गई. रामचंद्र छत्रपति ने इसकी शिकायत एसपी सिरसा से की. डेरे के कुछ लोगों ने छत्रपति पर जातिसूचक शब्द कहने का आरोप लगाते हुए छत्रपति के खिलाफ SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करा दिया. हालांकि कोर्ट में वह मामला झूठा साबित होता है और खारिज हो जाता है. लेकिन इसके बाद भी रामचंद्र छत्रपति को लगातार धमकियां मिलती रहीं.
इस बीच डेरा के एक मैनेजर रंजीत सिंह की हत्या हो जाती है. रंजीत सिंह की बहन भी डेरे में साध्वी थी और उसने यौन शोषण का आरोप लगाया था. रंजीत और उनकी बहन की ख़बर भी रामचंद्र छत्रपति ने अपने अखबार में छापी थी. जिस पर संज्ञान लेते हुए 24 सितंबर 2002 को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच का आदेश दिया.



सीबीआई जांच के आदेश के एक महीने बाद यानी 24 अक्टूबर 2002 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की गोली मारकर हत्या कर दी गई. छत्रपति को घर के बाहर दो शूटर्स ने 5 गोलियां मारी थी. छत्रपति को पीजीआई रोहतक में भर्ती करवाया गया था जहां उन्होंने 21 नवंबर को दम तोड़ दिया.




पुलिस ने जांच में छत्रपति को गोली मारने वाले एक आरोपी को पकड़ा लिया. जिसने पूछताछ में बताया कि वह डेरे में एक साधू है. जिस रिवॉल्वर से गोली मारी गई वह डेरे के एक मैनेजर की लाइसेंसी रिवॉल्वर थी. पुलिस ने आरोपियों के पास से एक वॉकी टॉकी भी बरामद किया था जो डेरे के नाम से रजिस्टर्ड था.



गिरफ्तारी आरोपी की निशानदेही पर डेरे का दूसरा आरोपी साधु भी गिरफ्तार हुआ. परिजनों ने तत्कालीन सीएम ओपी चौटाला को चिट्ठी लिखकर जांच पर सवाल उठाए. लेकिन सरकार का जवाब ना मिलने पर परिवार ने जनवरी, 2003 में हाईकोर्ट का रुख किया. परिजनों ने हाईकोर्ट में किसी जिम्मेदार एजेंसी से जांच करवाने की मांग की.



नवंबर 2003 को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रंजीत मर्डर केस और छत्रपति मर्डर केस में सीबीआई को जांच सौंप दी. जांच में सीबीआई ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम को दोनों हत्याओं का मुख्य आरोपी माना और 31 जुलाई 2007 को सीबीआई ने साध्वी यौन शोषण, रंजीत मर्डर केस, छत्रपति मर्डर केस में चालान दाखिल किया.



25 अगस्त 2017 को सीबीआई कोर्ट ने साध्वी यौन शोषण केस में राम रहीम को दोषी करार दिया. 28 अगस्त 2017 को सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को 20 साल की सज़ा सुनाई. फिलहाल रोहतक की सुनारिया जेल में राम रहीम बंद है. इस दौरान राम रहीम पर साधुओं को नपुंसक बनाने का भी आरोप लगा, जिसपर सीबीआई कोर्ट में सुनवाई चल रही है.



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