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कभी वकील थे राम रहीम का 'पूरा सच' सामने लाने वाले रामचंद्र छत्रपति

रामचंद्र छत्रपति की फाइल फोटो
रामचंद्र छत्रपति की फाइल फोटो

कभी पेशे से वकील रहे छत्रपति ने साल 2000 में 'पूरा सच' अखबार शुरू किया था. इसी अखबार के जरिए राम रहीम के काले कारनामों की खबर दुनिया को हुई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 17, 2019, 11:01 AM IST
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साल 2017 में हरियाणा स्थित पंचकुला की स्पेशल सीबीआई अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह राम रहीम को बलात्कार के मामले में दोषी करार दिया था. जिसके बाद उसके अनुयायियों ने देश के कुछ हिस्सों, खासतौर से हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और यूपी में काफी हंगामा किया था. क्या आप यह जानते हैं कि राम रहीम का यह काला सच सामने लाने का काम किसने किया था?

राम रहीम के इस काले कारनामे को दुनिया के सामने पहली बार लाने वाले पत्रकार रामचंद्र छत्रपति थे, जिनकी हत्या के मामले में आरोपी राम रहीम पर गुरुवार को फैसला आना है. इतना ही नहीं इस कथित रेप की खबर अपने अखबार, 'पूरा सच' में छापने के कुछ महीने बाद ही छत्रपति की गोली मार कर हत्या कर दी गई.

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कभी पेशे से वकील रहे छत्रपति ने साल 2000 में 'पूरा सच' अखबार शुरू किया. इसके बाद साल 2002 में छत्रपति को एक अनजान चिट्ठी मिली जिसके जरिए डेरे में साध्वियों के यौन शोषण का खुलासा हुआ. छत्रपति ने बिना डरे यह चिट्ठी अपने अखबार में छाप दी जिसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई.
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छत्रपति को साल 2002 की 19 अक्टूबर को उनके घर के सामने गोली मार दी गई. 21 अक्टूबर को उनका देहांत हो गया. छत्रपति के बेटे  अंशुल के मुताबिक हत्या की रात जब उनका परिवार खाना खाने की तैयारी कर रहा था, तभी किसी ने बाहर से उनके पिताजी को पुकारा.

छत्रपति देखने के लिए बाहर निकले और पीछे-पीछे अंशुल भी. उसने देखा कि बाहर स्कूटर पर दो लोग खड़े हैं और दोनों के हाथ में रिवॉल्वर है. इससे पहले की कोई कुछ समझ पाए उनमें से एक ने फायरिंग शुरू कर दी. छत्रपति को पांच गोलिया लगीं और वह गिर गए. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां दो दिन बाद उनका देहांत हो गया.

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छत्रपति के बेटे अंशुल ने बताया कि जब उनके पिता को होश आया तो उन्होंने अपने बयान में गुरमीत राम रहीम का नाम लिया, लेकिन पुलिस ने बयान बदल दिया. अंशुल ने कहा था कि पुलिस, डेरा के दबाव में काम कर रही थी, इसलिए उसने जांच को तीन लोगों (किशनलाल और दो हत्यारों) से आगे नहीं बढ़ने दिया. पुलिस की कार्रवाई से असंतुष्ट होकर उन्होंने सीबीआई जांच के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. साल 2003 में जांच सीबीआई को सौंपी गई.

आपको बता दें कि साध्वी यौन शोषण मामले में दोषी डेरा सच्चा सौदा के चीफ राम रहीम को कोर्ट ने 10 साल की सजा सुनाई थी . साल 2017 में कोर्ट ने जैसे ही सजा सुनाई गुरमीत राम रहीम कोर्ट परिसर के बाहर फूट-फूट कर रोने लगा था. वह सजा सुनाने के काफी देर तक वो कोर्ट परिसर के बाहर बैठकर रोता रहा था.

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