ब्लैक फंगस के प्रकोप को देखते हुए खट्टर सरकार ने लिया ये बड़ा फैसला, जानें डिटेल

हरियाणा में ब्लैक फंगस के 115 केस हैं.

हरियाणा में ब्लैक फंगस के 115 केस हैं.

खट्टर सरकार ने ब्लैक फंगस के रोगियों के लिए सरकारी अस्पतालों में फ्री और निजी अस्पतालों में तय मूल्य पर एम्फोटेरिसिन बी-इंजेक्शन देने का फैसला लिया है. निजी अस्पतालों को जिलों के सिविल सर्जन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर इंजेक्शन देंगे.

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चमन पलानिया.

चंडीगढ़. हरियाणा में ब्लैक फंगस के प्रकोप को देखते हुए 'हरियाणा महामारी रोग (म्यूकोर्मिकोसिस) विनियम, 2021' लागू कर दिया गया है. मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ट्विटर पर जानकारी

दी. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि ब्लैक फंगस के प्रकोप को मद्देनजर रखते हुए ‘हरियाणा महामारी रोग (म्यूकोर्मिकोसिस) विनियम, 2021’ लागू किया है. इसका पालन नहीं करने पर दोषी व्यक्ति/संस्था के विरुद्ध महामारी रोग अधिनियम,1897 की धारा 3 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

इन नियमों के तहत जारी किए गए आदेशों की अवहेलना को किसी भी व्यक्ति/संस्था या संगठन द्वारा भारतीय दंड संहिता(1860 का 45)की धारा 188 के तहत दंडनीय अपराध माना जाएगा. प्रदेश में ब्लैक फंगस के 115 केस हैं.
इसके अलावा, खट्टर सरकार ने ब्लैक फंगस के रोगियों के लिए सरकारी अस्पतालों में फ्री और निजी अस्पतालों में तय मूल्य पर एम्फोटेरिसिन बी-इंजेक्शन देने का फैसला लिया है. निजी अस्पतालों को जिलों के सिविल सर्जन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर इंजेक्शन देंगे. इंजेक्शन के लिए amphobharyana@gmail.com पर आवेदन करना होगा.

ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए 20 बेड का वार्ड तैयार

हरियाणा के गृह और स्वास्थय मंत्री अनिल विज ने कहा कि ब्लैक फंगस के मरीजों के लिए सभी मेडिकल कॉलेज से में 20-20 बेड के वार्ड तैयार कर दिए गए हैं. सभी सिविल अस्पताल को कहा गया है कि ब्लैक फंगस के केस को मेडिकल कॉलेज में रेफर करें. कोविड के ट्रीटमेंट के लिए पहले दिन से प्राइवेट अस्पतालों के रेट तय हैं. अगर कोई ज्यादा पैसे लेगा तो इस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाय. प्राइवेट अस्पतालों का ऑडिट कर भी रहे हैं, आगे भी करेंगे.



उन्होंने आगे कहा, "वैक्सीन लगातार आ रही है, जितनी आ रही हैं, हम लगा रहे हैं लेकिन हमें ज्यादा की आवश्यकता है इसलिए कल ग्लोबल टेंडर हम कर रहे हैं."

हिसार की घटना पर उन्होंने कहा कि किसानों का धरना अलग बात है लेकिन कोरोना के काम में किसी को बाधा नहीं डालने दी जाएगी, ये उचित नहीं है. हमने 2 डीजी कोरोना की पहली दवा का डीआरडीओ ने जिसका आविष्कार किया है, उसको केंद्र सरकार की मदद से खरीदा जाएगा. लॉकडॉउन लगाने से लोगों को दुकानदारों को तकलीफ हो रही हैं, दिक्कतें आ रही हैं, लेकिन इस बीमारी से लड़ने में जो सहयोग मिला है, उसका फायदा भी हो रहा है. जब लॉकडाउन लगा तब मरीजों की संख्या लगभग 16 हजार थी जो घटकर अब 7 हजार हो गई है. कुछ दिनों की कठिनाइयां हैं. फिर हंसने-खेलने के दिन आएंगे.

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