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मनोहर लाल खट्टर ने माना, कभी नंबर वन नहीं था हरियाणा

विज्ञापनों में नंबर वन के दावे करने वाला हरियाणा कभी नंबर वन था ही नहीं। ये कहना है सीएम मनोहर लाल खट्टर का। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने पटरी से उतर चुकी प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर श्वेत-पत्र जारी किया है।

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विज्ञापनों में नंबर वन के दावे करने वाला हरियाणा कभी नंबर वन था ही नहीं। ये कहना है सीएम मनोहर लाल खट्टर का। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने पटरी से उतर चुकी प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर श्वेत-पत्र जारी किया है।

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विज्ञापनों में नंबर वन के दावे करने वाला हरियाणा कभी नंबर वन था ही नहीं। ये कहना है सीएम मनोहर लाल खट्टर का। सीएम मनोहर लाल खट्टर ने पटरी से उतर चुकी प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर श्वेत-पत्र जारी किया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा की ये श्वेत पत्र किसी सरकार या पार्टी का आलोचना पत्र नहीं बल्कि समीक्षा पत्र है। अर्थव्यवस्था पुन: पटरी पर लाने, राजस्व जुटाने की सुस्त पड़ी रफ्तार को बढ़ाने तथा राज्य के सभी भागों के असन्तुलित विकास में सन्तुलन कायम करने की जरूरत है जिस पर आने वाले बजट में प्रावधान किए जाएंगे।

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन में श्वेत-पत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि हम प्रदेश की बेहतरी के लिए वित्त विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और राजनीतिक दलों के सुझावों का स्वागत करते हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमें खण्डित अर्थव्यवस्था और लगभग खाली खजाना मिला है। उन्होंने कहा कि इसमें वर्ष 2004-05 तथा 2013-14 के बीच के 10 वर्षों के दौरान वित्त के विभिन्न पहलू तथा सम्बद्ध वृद्धि के आंकड़े दर्शाए गए हैं।

पिछले दस वर्षों के दौरान प्राथमिक कृषि क्षेत्र में सुस्त वृद्धि का उल्लेख करते हुए मनोहर लाल ने कहा कि जिस क्षेत्र में 51 प्रतिशत लोग निर्भर करते हैं। उस का जीडीपी में हिस्सा केवल 15 फीसदी है। उन्होंने कहा कृषि के विविधिकरण को प्रोत्साहित करने, कृषि कार्यों से जुड़े कामगारों की उत्पादकता में सुधार करने और वृद्धि दर तेज करने के लिए तत्काल कदम उठाए जाने की जरूरत है।

सीएम ने बताया कि हरियाणा में कांग्रेस के दस वर्ष के शासन के दौरान विकास में भेदभाव किया गया जिससे क्षेत्रीय असमानता पैदा हुई। यह दलील अमीर-गरीब जिलों के अनुपात की शक्ल में सामने आती है जोकि वर्ष 2004-05 में 3.7 से बढ़कर वर्ष 2011-12 में 9.7 हो गया। वित्त मन्त्री कैप्टन अभिमन्यु ने यहां जानकारी देते हुए बताया कि यदि चहुंमुखी विकास किया जाता तो प्रतिव्यक्ति आय के मामले में जिलावार इतना बड़ा अन्तर नहीं होता।

उन्होंने कहा कि जिला गुडग़ांव की प्रतिव्यक्ति आय जोकि वर्ष 2004-05 में 81,478 रुपए थी, वर्ष 2011-12 में बढक़र 4,46,305 रुपए हो गई। जिला यमुनानगर की प्रतिव्यक्ति आय जोकि वर्ष 2004-05 में 32,038 रुपए थी, वर्ष 2011-12 में बढक़र 82,232 रुपए हो गई। इसी प्रकार, जिला महेन्द्रगढ़ की प्रतिव्यक्ति आय जोकि वर्ष 2004-05 में 21,888 रुपए थी, वर्ष 2011-12 में बढक़र 54,835 रुपए हो गई। परन्तु जिला मेवात की प्रतिव्यक्ति आय वर्ष 2011-12 में केवल 45,934 रुपए थी जोकि प्रदेश में सबसे कम थी।

वहीं, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि सरकार द्वारा जारी किए गए श्वेत पत्र के अनुसार 10 वर्षों में राज्य द्वारा उधार लेना और कर्ज निरन्तर बढ़ा है। वर्ष 2004-05 में 4,474 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया जबकि 2013-14 में 17,773 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया। कर्ज की कुल देयता वर्ष 2004-05 के 23,320 करोड़ रुपए से बढक़र वर्ष 2013-14 में 71,305 करोड़ रुपए हो गई।

इसके फलस्वरूप ब्याज की अदायगी की मात्रा में और इसकी कुल राजस्व खर्च की प्रतिशतता दोनों में ही बढ़ोतरी हुई। ब्याज की अदायगी राशि में 260 प्रतिशत से भी अधिक की बढ़ोतरी हुई जोकि 2004-05 में 2235 करोड़ रुपए थी, वह 2013-14 में बढ़कर 5850 करोड़ रुपए हो गई। वित्त मंत्री ने कहा ‘हमें विरासत में चरमराई हुई और कर्जभार से दबी अर्थव्यवस्था और खाली खजाना मिला है।

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