किसानों की इच्छा के बिना नहीं होगा फसलों का बीमा, हरियाणा सरकार का फैसला
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किसानों की इच्छा के बिना नहीं होगा फसलों का बीमा, हरियाणा सरकार का फैसला
हरियाणा सरकार ने किसानों के लिए किया बड़ा ऐलान. (सांकेतिक फोटो)

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार KCC धारक किसान भी अंतिम तिथि से 7 दिन पहले बैंक में घोषणापत्र देकर फसल बीमा न करवाने की सूचना दे सकते हैं. बीमा में दर्ज फसल बदलवाने की भी मिलेगी सुविधा.

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चंडीगढ़. हरियाणा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत फसलों का बीमा करवाना अब पूरी तरह से किसानों की इच्छा पर निर्भर करेगा. मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर (CM ML Khattar) की सरकार ने बाकायदा एक अधिसूचना जारी करके किसानों की सुविधा के लिए इस योजना को पूर्णत: स्वैच्छिक करने का निर्णय लिया है. कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार अब किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) धारक किसान भी अंतिम तिथि से 7 दिन पहले अपने बैंक में स्वयं घोषणापत्र देकर फसल बीमा न करवाने की सूचना दे सकते हैं.

इसके अलावा जो किसान फसल बीमा में अपनी फसल बदलवाना चाहते हैं, वे अंतिम तिथि से 2 दिन पहले बैंक को लिखित में सूचित कर सकते हैं. विभाग के मुताबिक फसलों को प्राकृतिक आपदा व जोखिम से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2016-17 से चल रही है. राज्य सरकार ने योजना की अधिसूचना खरीफ 2020 से रबी 2022-23 तक कर दी है. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जिन किसानों ने बैंक के माध्यम से फसली ऋण लिया है और वे इस स्कीम में शामिल नहीं होना चाहते, तो उन्हें एक घोषणापत्र बैंक में देना होगा.

जिन किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड नहीं है, वे साझा सेवा केंद्र या बैंक के माध्यम से आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपनी फसलों का बीमा करवा सकते हैं. बीमा करवाने के लिए जमीन की फर्द, आधार कार्ड, बैंक की कॉपी, जमीन का किरायानामा, फोटो व फसल बिजाई का प्रमाण पत्र देना होगा.



क्या है यह स्कीम
इस स्कीम के तहत तीन प्रकार के जोखिमों को कवर किया जाता है. पहले जोखिम के तहत खड़ी फसल में बीमारी, सूखा, बाढ़, जलभराव एवं तूफान के कारण होने वाले नुकसान को पैदावार के आधार पर कवर किया जाता है. इसके तहत बीमित फसल के लिए हर गांव में फसल कटाई प्रयोग किए जाते हैं. दूसरे जोखिम के तहत फसल कटने के 14 दिन तक यदि ओलावृष्टि, जलभराव, चक्रवाती बरसात या गैर-मौसमी बरसात से नुकसान होता है, तो व्यक्तिगत स्तर पर सर्वे उपरांत नुकसान की भरपाई की जाती है. तीसरे जोखिम में स्थानीय आपदाओं के तहत किसान की फसल कटाई से 15 दिन पहले ओलावृष्टिï, जलभराव, बादल फटने व आसमानी बिजली के कारण हुए नुकसान के लिए 72 घंटे में सूचना देकर फसल का सर्वे नोटिफाइड कमेटी द्वारा किया जाता है. इसमें खंड कृषि अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी, कंपनी के नुमाइंदे शामिल होते हैं और सर्वे स्वयं किसान की मौजूदगी में किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से हानि प्रतिशत व नुकसान का कारण लिखा जाता है.
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