हरियाणा अविश्वास प्रस्तावः संख्याबल में खट्टर सरकार भारी, मगर अंदरखाने बदल सकते हैं समीकरण, चौटाला पर दबाव

जेजेपी का एक धड़ा सरकार का हिस्सा होते हुए भी कई बार कृषि कानूनों पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुका है

जेजेपी का एक धड़ा सरकार का हिस्सा होते हुए भी कई बार कृषि कानूनों पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुका है

Congress No Confidence Motion: दुष्यंत चौटाला जिस वोट बैंक के सहारे सत्ता तक पहुंचे हैं, किसान आंदोलन में वही तबका सड़क पर है. इसलिए JJP के विधायक खट्टर सरकार से गठबंधन तोड़ने का बढ़ा रहे हैं दबाव.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 10, 2021, 9:54 AM IST
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चंडीगढ़. कांग्रेस आज हरियाणा सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाने जा रही है. संख्याबल के लिहाज़ से मनोहर सरकार चैन की सांस ज़रूर ले सकती है. मगर किसान आंदोलन (Kisan Aandolan) के बाद से अंदरखाने समीकरण बदले हैं, इससे कोई इनकार नहीं कर सकता है. जेजेपी का एक धड़ा सरकार का हिस्सा होते हुए भी कई बार कृषि कानूनों पर नाराज़गी ज़ाहिर कर चुका है. वजह साफ है कि जेजेपी ने जिस वोट बैंक के सहारे सत्ता में हिस्सेदारी हासिल की थी. किसान आंदोलन में वही तबका अब विरोध के झंडे लिए सड़कों पर है. हालांकि डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला बार-बार सुलह की बात दोहराते हैं, बावजूद इसके किसानों का विरोध लगातार जारी है.

बीजेपी की सहयोगी जननायक जनता पार्टी के कुछ विधायकों ने गठबंधन सरकार के खिलाफ बागी तेवर दिखाए हैं. जेजेपी के विधायक अपने नेता और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर गठबंधन को तोड़ने का दबाव डाल रहे हैं. जेजेपी विधायक देवेंद्र बबली का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान सरकार के पक्ष में वोट करना मेरी मजबूरी है, लेकिन इस समय ऐसे हालात बन गए हैं कि हमें मनोहर लाल खट्टर सरकार से गठबंधन तोड़ देना चाहिए. बबली ने कहा कि हालात ऐसे हैं कि हम कहीं जा नहीं सकते, क्‍योंकि लोग हमें डंडों से मारेंगे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर मेरे वोट से सरकार गिरती है तो मैं उसके खिलाफ वोट दे दूंगा.

जेजेपी के कुछ विधायक खुलकर सरकार पर सवाल उठा रहे

अविश्वास प्रस्ताव की भूमिका ही किसान आंदोलन के इर्द-गिर्द बनती है. इसलिए ये भी लाज़मी है कि सदन के अंदर हर तकरीर इसी को लेकर होगी. लेकिन क्या बीजेपी-जेजेपी का हर विधायक एक ही सुर में बोलेगा. ये देखना सबसे दिलचस्प होगा. क्योंकि पिछले कुछ दिनों का हाल ये है कि जेजेपी के कुछ विधायक खुलकर सरकार पर सवाल उठा चुके हैं.
किसान आंदोलन के बाद बने हालात में कुछ भी मुमकिन

पार्टी लाइन के खिलाफ वोटिंग का सीधा मतलब है कि सदस्यता से हाथ धोना. मगर किसान आंदोलन के बाद बने हालात में कुछ भी मुमकिन है और विपक्ष भी ऐसे ही नाराज़ विधायकों के सहारे दावा ठोक रहा है कि सरकार के पास नंबर नहीं हैं. सियासी अटकलों के बावजूद कागज़ों में मौजूद नंबर सरकार के हक में हैं. इसलिए बुधवार को अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से ज्यादा दिलचस्प वो दलीलें होंगी जो इसके हक या विरोध में रखी जाएंगी.

जानें विधानसभा का गणित



हरियाणा विधानसभा में अभी 88 सदस्य हैं. अभय चौटाला के इस्तीफे से ऐलनाबाद सीट खाली हुई है. कालका के विधायक प्रदीप चौधरी को एक मामले में तीन साल की सजा होने पर अयोग्य घोषित किया गया है. इससे कालका सीट भी खाली है. ऐसे में गठबंधन सरकार को बहुमत के लिए 45 का आंकड़ा ही चाहिए. इस समय भाजपा के 40, जजपा के 10, कांग्रेस के 30, निर्दलीय सात व एक हलोपा विधायक हैं. दो सीट खाली हैं.
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