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हरियाणा की सियासी चौसर : सिर्फ दुष्यंत नहीं, इन 6 'मोहरों' से भी हो सकती है शह-मात

News18 Haryana
Updated: October 24, 2019, 4:39 PM IST
हरियाणा की सियासी चौसर : सिर्फ दुष्यंत नहीं, इन 6 'मोहरों' से भी हो सकती है शह-मात
हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) में वोटों की गिनती (Counting) अंतिम दौर में बढ़ रही है और इसके साथ ही दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) किंगमेकर (King Maker) बन कर उभरे हैं.

हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) में वोटों की गिनती (Counting) अंतिम दौर में बढ़ रही है और इसके साथ ही दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) किंगमेकर (King Maker) बन कर उभरे हैं.

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चंडीगढ़. हरियाणा विधानसभा चुनाव (Haryana Assembly Election 2019) में वोटों की गिनती (Counting) अंतिम दौर में बढ़ रही है और इसके साथ ही दुष्यंत चौटाला (Dushyant Chautala) किंगमेकर (King Maker) बन कर उभरे हैं. उन पर दोनों ही प्रमुख पार्टियों की निगाह है. लेकिन इस समय सिर्फ दुष्यंत चौटाला ही नहीं हैं, जो हरियाणा के राजनीतिक दंगल में जीत-हार तय करेंगे. उनके अलावा 6 और निर्दलीय विधायक हैं, जिनकी सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है.

इन 6 निर्दलीय प्रत्याशियों के नाम हैं- मेहाम से बलराज कुंडू, पृथाला से नयन पाल रावत, पुंडरी से रणधीर सिंह, सिरसा से गोकुल सेटिया, बादशाहपुर से राकेश दौलताबाद, रनिया से निर्दलीय प्रत्याशी रणजीत सिंह. ये सभी प्रत्याशी अपनी-अपनी विधानसभा सीटों पर निर्णायक बढ़त हासिल कर चुके हैं.

बीजेपी के बागी बलराज कुंडू ने जब चुनाव लड़ने की घोषणा की थी, तभी कांग्रेस और बीजेपी दोनों को झटका लगा था. कुंडू रोहतक जिला परिषद के अध्यक्ष थे और उन्होंने बीजेपी से टिकट मिलने की आस में इस्तीफा दिया था. बीजेपी ने उनकी जगह शमशेर सिंह खारखारा को टिकट दिया. शमशेर इससे पहले कांग्रेस के आनंद सिंह डांगी के सामने दो बार यहां से चुनाव लड़ चुके हैं.



बादशाहपुर से चुनाव लड़ रहे राकेश दौलताबाद 2009 और 2014 के चुनावों में नजदीकी अंतर से चुनाव हारे थे. वो एक बार निर्दलीय के तौर पर और एक बार इंडियन नेशनल लोकदल के प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं.

पृथाला से उम्मीदवार नयन पाल रावत भी बीजेपी के बागी हैं. वो अपनी विधानसभा में जाना-पहचाना नाम हैं. उन्होंने पार्टी की तरफ से टिकट की मनाही के बाद मोर्चा खोल दिया था. इसी तरह पुंडरी से रणधीर सिंह और गोकुल से गोकुल सेटिया भी बीजेपी के बागी ही हैं. रनिया से निर्दलीय प्रत्याशी रणजीत सिंह चौटाला परिवार से ताल्लुक रखते हैं. जब कांग्रेस ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया तो उन्होंने स्वतंत्र प्रत्याशी के तौर पर चुनावी दंगल में हाथ आजमाया.

इन फॉर्मूलों पर काम करें दुष्यंत
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इस बीच जेजेपी सूत्रों का दावा है कि जेजेपी दोनों विकल्प कांग्रेस और बीजेपी के साथ जाने पर विचार कर रही है. आइए जानते हैं, जेजपी कितने फ़ॉर्मूले पर काम कर रही है.

पहला, दुष्यंत चौटाला के नेतृत्व में बीजेपी या कांग्रेस के समर्थन से हरियाणा में सरकार बने.

दूसरा, अगर मुख्यमंत्री का पद न मिले तो सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री पद (उप मुख्यमंत्री भी शामिल) मिले और सरकार में बड़ी भागीदारी हो.

तीसरा, कांग्रेस या बीजेपी में से किसके साथ सरकार बनाई जाए यह जेजेपी की मांगों को कौन पूरा करता है, इस पर निर्भर करेगा .

चौथा, बीजेपी और आईएनएलडी की सरकार हरियाणा में पहले बन चुकी है, इसलिए बीजेपी के साथ जाने में जेजेपी को कोई ऐतराज नहीं, लेकिन कांग्रेस की तरफ से अच्छा ऑफर मिलता है तो कांग्रेस के साथ भी जाने की संभावना.

पांचवां, जेजेपी अपने बुनियादी जनाधार (खासकर जाट मतदाताओं) की भावनाओं को ध्यान में रखकर करेगी फैसला,

छठा, जेजेपी के बीजेपी या कांग्रेस को समर्थन का फैसला दोनों पार्टियों के मुख्यमंत्री के चेहरे पर भी निर्भर करेगा. यानी जेजेपी की सहमति से बाद ही कांग्रेस या बीजेपी सीएम चेहरा घोषित कर सकती है.

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First published: October 24, 2019, 4:17 PM IST
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