ओमप्रकाश चौटाला फिर लड़ सकते हैं चुनाव, मिल सकता है इस नियम का लाभ

ओम प्रकाश चौटाला की सजा पूरी होने से गर्माई सियासत, इस नियम से फिर लड़ सकते हैं चुनाव.

हरियाणा में मुख्यमंत्री रहते चौटाला के कार्यकाल में टीचर भर्ती घोटाला हुआ था. इसमें चौटाला को 10 साल की सजा मिली थी. यह सजा सीबीआई के स्पेशल कोर्ट से सुनाई गई थी. इस मामले में चौटाला की सजा को 9 साल 6 माह पूरे हो चुके हैं. रिहाई के बाद अब चौटाला के चुनाव लड़ने की चर्चाएं फिर शुरू हुई हैं.

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    चंडीगढ़. जूनियर बेसिक ट्रेनिंग (JBT) टीचर भर्ती घोटाले (Teachers Recruitment Scam) में जेल की सजा काट रहे हरियाणा (Haryana) के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला (Om Prakash Chautala) की सजा पूरी हो गई है. सजा पूरी होने के बाद 83 साल के हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के सामने अब चुनाव लड़ सकने का रास्ता भी साफ हो गया. इस मामले में उन्हें चुनाव आयोग से राहत मिल सकती है. सजा पूरी होने के बाद चुनाव आयोग चुनाव न लड़ पाने के प्रतिबंध को पूरी तरह खत्‍म कर सकता है.

    जानकारी के मुताबिक हरियाणा में मुख्यमंत्री रहते चौटाला के कार्यकाल में टीचर भर्ती घोटाला हुआ था. इसमें चौटाला को 10 साल की सजा मिली थी. यह सजा सीबीआई के स्पेशल कोर्ट से सुनाई गई थी. इस मामले में चौटाला की सजा को 9 साल 6 माह पूरे हो चुके हैं. चौटाला के वकील अमित साहनी की ओर से इस पर कहा गया था कि सरकार की ओर से दस साल की सजा काट रहे कैदियों को 6 माह की छूट मिलती है. इसी के तहत जेल प्रशासन ने भी मान लिया कि चौटाला की सजा पूरी हो चुकी है. गौरतलब है कि ओमप्रकाश चौटाला हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के दादा हैं. दुष्यंत ने इनेलो से अलग होकर जजपा बनाई थी. हालांकि ओमप्रकाश अभी इनेलो के ही साथ जुड़े हैं.

    चुनाव लड़ने के विकल्प पर कानूनी पेंच

    बताया जा रहा है कि लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 8(1) के अनुसार, रिहाई से 6 साल की अवधि तक यानी जून 2027 तक ओम प्रकाश चौटाला के सामने चुनाव लड़ना मुश्किल होगा. चौटाला के पास कानून की धारा-11 के तहत अपनी 6 वर्ष की अयोग्यता अवधि को कम करने या खत्म करने के लिए भारतीय चुनाव आयोग के पास अर्जी दायर करने का विकल्प है. इसके लिए चुनाव आयोग कानूनन सक्षम है. सितंबर 2019 में आयोग ने भ्रष्टाचार में दोषी ठहराए गए सिक्किम के वर्तमान सीएम प्रेम सिंह तमांग के चुनाव लड़ने के लिए लगी 6 वर्ष की अयोग्यता अवधि को घटाकर एक वर्ष एक माह कर दिया था. आने वाले विधाानसभा चुनाव के वक्त चौटाला की रिहाई इनेलो के लिए संजीवनी का काम करेगी.

    कहा यह भी जा रहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून में प्रावधान है कि सजा पूरी करने के बाद छह वर्ष तक संबंधित व्यक्ति चुनाव लड़ने के अयोग्य रहेगा. यह प्रावधान भ्रष्टाचार निरोधक कानून, आतंकवाद निरोधक कानून और सती निरोधक कानून के तहत सजायाफ्ता व्यक्तियों पर भी लागू होता है. पहले इस कानून में सजा सुनाए जाने के 6 साल बाद तक यह पाबंदी लागू होती थी, लेकिन 2002 में कानून में बदलाव हुआ और सजा पूरी होने के 6 साल बाद तक भी अयोग्य ही माने जाने संबंधी प्रावधान लाया गया. इसके बाद 2013 में फिर से इस मसले पर लगी पुनर्विचार याचिका को भी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था.

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