Kisan Aandolan: संयुक्त किसान मोर्चा के लिए सिरदर्द बने ये 3 नेता, गुटों में बंट गए आंदोलनकारी किसान

किसान पिछले कई महीनों से दिल्ली के अलग-अलग बॉर्डरों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. (सांकेतिक फोटो)

Kisan Aandolan: तीनों कृषि सुधार कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन को एक तरफ हरियाणा के ही किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (मान) के प्रदेश अध्यक्ष गुणीप्रकाश ने चुनौती दे दी है. वहीं आंदोलन के नेता खुद भी कई गुटों में बंट गए हैं.

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    चंडीगढ़. दिल्ली की सीमा पर बीते कई महीने से केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों (Agricultural laws) के खिलाफ किसान प्रदर्शन कर रहे हैं. ये आंदोलन पहले जितनी मजबूती से चल रहा था अब इस आंदोलन में शामिल कई नेता गुटों में बंट गए हैं. एक तरफ जहां आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संयुक्त किसान मोर्चे के नेताओं ने राजनीतिक दलों के नेताओं से दूरी बनाए रखने की बात कही थी. किसान नेता संयुक्त किसान मोर्चे की इस बात की उपेक्षा कर रहे हैं. इनेलो सुप्रीम ओमप्रकाश चौटाला (Om Prakash Chautala) अब किसानों के धरनास्थलों पर पहुंच रहे हैं. वहीं किसान नेता राकेश टिकैत उनका खुद स्वागत कर रहे हैं.

    एक तरह किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी कह रहे हैं कि किसानों के सहयोग से चौधरी भजनलाल की सरकार आई, उस सरकार में भी किसान पीड़ित हुए. भजनलाल का विरोध कर चौधरी बंसीलाल की सरकार बनाई. बंसीलाल की सरकार में भी किसानों का उत्पीड़न हुआ. बंसीलाल के बाद चौधरी ओमप्रकाश चौटाला की सरकार बनवाई तो उस सरकार में भी किसानों पर गोलियां चलीं. वहीं दूसरी तरफ ओपी चौटाला का किसानों के धरना स्थलों पर जबरदस्त स्वागत किया जा रहा है.

    बताते चले कि चढ़ूनी को संयुक्त मोर्चे ने एक सप्ताह के लिए इस आधार पर निलंबित कर दिया कि उन्होंने पंजाब के किसान संगठनों को सुझाव दिया था कि वे एकजुट होकर पंजाब विधानसभा के चुनाव लड़ें और वहां अपनी सरकार बनाएं. वे अपनी सरकार को देश भर में आदर्श के रूप में प्रस्तुत करें. ऐसा क्यों करना चाहिए, इसके लिए हरियाणा का उदाहरण देते हुए चढ़ूनी ने कारण भी गिनाए थे.

    हरियाणा के किसान संगठन गुरनाम चढी को निलंबित किए जाने से क्षुब्ध हो गए हैं. उनका कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चे के लोग हरियाणा के किसान नेताओं के सुझाव सिरे से खारिज कर देते हैं. यह नहीं चलेगा. उनका आरोप है कि किसान मोर्चा की बैठक में हरियाणा की तरफ से दिए जाने वाले सभी सुझावों को निरस्त कर दिया जाता है. बता दें कि गुरनाम चढ़ूनी हरियाणा के किसान संगठनों की तरफ से संयुक्त मोर्चे में एकमात्र प्रतिनिधि थे.

    कुंडली बार्डर पर जाने से परहेज कर रहे हरियाणा से जुड़े आंदोलनकारी

    हरियाणा से जुड़े आंदोलनकारी अब कुंडली बार्डर पर जाने से भी परहेज करने लगे हैं और मध्य हरियाणा में धरने पर जोर दे रहे हैं. टीकरी बार्डर पर जरूर हरियाणा के संगठनों से जुड़े लोग जरूर भागीदारी कर रहे हैं. दूसरी तरफ चढ़ूनी और टिकैत मुखर होकर भले ही संयुक्त किसान मोर्चे पर काबिज पंजाब के नेताओं का विरोध नहीं कर रहे हैं, लेकिन पंजाब के संगठनों के नेताओं को महत्वहीन करने में लग गए हैं.

    दो नेताओं को दंडित करने के लिए अलग-अलग मापदंड

    वहीं संयुक्त किसान मोर्चा एक ही तरह की गलती करने वाले दो नेताओं को दंडित करने के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाता है. भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के अध्यक्ष नरेश टिकैत ने उत्तर प्रदेश में भारतीय किसान यूनियन की तरफ से उम्मीदवार उतारे जाने की घोषणा की तो उस बयान को वापस लेने के लिए की बात कहकर माफ कर दिया गया.

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