गुरुग्राम: BPL परिवार और अन्य जरूरतमंदो को कोरोना के इलाज के लिए निःशुल्क दिया जाएगा प्लाज्मा
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गुरुग्राम: BPL परिवार और अन्य जरूरतमंदो को कोरोना के इलाज के लिए निःशुल्क दिया जाएगा प्लाज्मा
कोरोना मरीजों के इलाज के लिए बड़ा कदम (सांकेतिक तस्वीर)

प्रदेश (State) में सबसे ज्यादा रिकवरी रेट के साथ गुरुग्राम में स्वस्थ हो रहे है कोरोना के मरीज (Corona Patients).

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 19, 2020, 9:07 AM IST
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गुरुग्राम. उपायुक्त अमित खत्री ने उन जिलावासियों जिनके शरीर में कोरोना (Corona) की एंटीबॉडिज (Anti Bodies) विकसित हो चुकी है, उनसे आग्रह किया है कि वे कोरोना संक्रमित मरीजों की जान बचाने को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आएं. जिला गुरूग्राम में रोटरी ब्लड बैंक के सहयोग से अब प्लाज्मा बैंक शुरू किया गया है. अब तक इसमें प्लाज्मा डोनेट करने के लिए 42 व्यक्ति आगे आए थे, जिनमें से 19 व्यक्तियों से प्लाज्मा डोनेट करवाया गया. इनसे 38 यूनिट प्लाज्मा तैयार हुआ जिसमें से 34 यूनिट प्लाज्मा जरूरतमंदों को दिया जा चुका है.

उपायुक्त ने कहा कि रोटरी ब्लड बैंक में प्लाज्मा डोनेट करने वालों की संख्या बेहद कम है. उन्होंने मीडिया के माध्यम से जिला वासियों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना से स्वस्थ हो चुके हर व्यक्ति को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए आगे आना चाहिए. वहीं उपायुक्त अमित खत्री ने कहा कि बीपीएल परिवार और अन्य जरूरतमंद गरीब परिवारों को कोरोना के इलाज के लिए निशुल्क प्लाज्मा दिया जाएगा.

प्लाजमा के लिए 8500 रुपए का रेट निर्धारित



प्लाजमा के लिए 8500 रुपए का रेट निर्धारित किया गया है, लेकिन किसी बीपीएल परिवार या अन्य जरूरतमंद परिवार जिन्हें प्लाज्मा की जरूरत है और वह 8500 रुपए की राशि प्लाज्मा खरीदने के लिए जुटा नहीं सकते, उनको इलाज के लिए प्लाज्मा बैंक से प्लाज्मा निःशुल्क दिया जाएगा. वहीं उन्होंने कहा कि प्लाज्मा डोनेशन से किसी को घबराने की जरूरत नहीं है. यह बेहद आसान तरीका है और एक साधारण रक्तदान की तरह ही प्लाज्मा दिया जाता है.
गुरुग्राम में रिकवरी रेट 92 प्रतिशत

कोरोना मरीजों के रिकवरी रेट के बारे में बताते हुए खत्री ने कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों के स्वस्थ होने का रिकवरी रेट बढ़कर अब 92 प्रतिशत तक पहुंच गया है जोकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सर्वाधिक है. वहीं कंटेनमेंट जोन के नियमों में किए गए बदलावों के बारे में जानकारी देते हुए खत्री ने बताया कि पहले कंटेनमेंट जोन को डी-नोटिफाई होने के लिए 28 दिन की अवधि को पूरा करना होता था लेकिन अब 14 दिन की अवधि पूरी होने पर उस क्षेत्र को डी-नोटिफाई किया जा रहा है. इसी वजह से जिला में कंटेनमेंट जोन की संख्या कम हुई है.
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