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हरियाणा मंत्रिमंडल विस्तार : इन वजहों से फंसा है पेंच, खाली रखे जा सकते हैं कुछ मंत्री पद

Ramnath Rajesh | News18 Haryana
Updated: November 13, 2019, 2:02 PM IST
हरियाणा मंत्रिमंडल विस्तार : इन वजहों से फंसा है पेंच, खाली रखे जा सकते हैं कुछ मंत्री पद
बीजेपी और जेजेपी गठबंधन वाली सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार 14 नवम्बर को होगा. (फाइल फोटो)

हरियाणा मंत्रिमंडल का 14 नवंबर का विस्तार (Haryana cabinet expansion) होने जा रहा है. इस विस्तार के बाद भी कुछ पद खाली रखे जा सकते हैं. इसके कुछ खास कारण हैं.

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चंडीगढ़. हरियाणा में मंत्रिमंडल विस्तार (Haryana Cabinet Expansion) को लेकर फंसा पेंच अब तक नहीं सुलझ पाया है. यही वजह है कि 14 नवंबर को मंत्रिमंडल का विस्तार तो होगा, लेकिन कुछ मंत्री पद खाली रखे जा सकते हैं. मंत्रिमंडल विस्तार में सबसे बड़ा पेंच मंत्रियों की सीमित संख्या की मजबूरी और सबको साथ लेकर चलने की बीजेपी (BJP) की इच्छा को लेकर फंसा है. संवैधानिक दायरे के तहत कुल विधायकों की संख्या के 15 प्रतिशत ही मंत्री बनाए जा सकते हैं. हरियाणा की 90 सदस्यीय विधानसभा में अधिकतम 14 मंत्री हो सकते हैं. मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री (Chief Minister and Deputy Chief Minister) पहले ही शपथ ले चुके हैं. इस तरह अब कुल 12 मंत्री पद बचे हैं. इससे अधिक मंत्री बनाना वर्ष 2004 में हुए संविधान के 91वें संशोधन का उल्लंघन होगा.

अहम विभागों के आवंटन पर भी उलझन
सूत्रों का कहना है कि बीजेपी और जेजेपी गठबंधन की सरकार में जेजेपी ने और दो मंत्री पद की मांग की तो बीजेपी खुशी से देने को राजी भी हो गई. असली पेंच निर्दलीय विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह देने के मुद्दे पर फंसा है. इसके अलावा जेजेपी ने जो विभाग मांगे हैं, उस पर सबसे अधिक अंदरखाने किचकिच हुई. सूत्रों की मानें तो मंत्रिमंडल के विस्तार से पहले ही जेजेपी ने बीजेपी से कई अहम विभाग मांगे हैं. जेजेपी ने बीजेपी से करीब 14 बड़े विभागों की मांग की है, जिनमें गृह, वित्त, कृषि, ग्रामीण विकास, पंचायत एवं विकास, शहरी स्थानीय निकाय और आबकारी एवं कराधान विभाग शामिल हैं. लेकिन, बीजेपी गृह और कृषि जैसे अहम विभाग अपने पास रखना चाहती है. हालांकि, करीब दर्जनभर अहम विभागों का बंटवारा जेजेपी के संभावित मंत्रियों के बीच किए जाने पर सहमति बनी है.

निर्दलीय विधायकों को खुश रखने की मजबूरी

इसके अलावा जो पेंच फंस रहा है उसमें निर्दलीय विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह देने को लेकर है. जेजेपी से गठबंधन से पहले राज्य के सात निर्दलीय विधायकों ने अपना समर्थन देकर बीजेपी की सरकार बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया था. तब उन लोगों ने बिना किसी शर्त के समर्थन दिया था.

ज्यादा के लिए दबाव बनाने की कोशिश 

उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने जब मंगलवार को अकेले मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ मंत्रियों और विभागों की सूची फाइनल की तो शाम में इन निर्दलीय विधायकों ने दिल्ली के हरियाणा भवन में बैठक की. जाहिर है कि इसका मकसद परोक्ष रूप से हरियाणा सरकार पर मंत्रिमंडल में ज्यादा निर्दलीय विधायकों को स्थान देने के लिए दबाव बनाना था. ये विधायक अभी दिल्ली में ही जमे हुए हैं. फिलहाल यदि निर्दलीय समर्थन न भी करें तो सरकार को कोई परेशानी नहीं होगी, लेकिन किसी कारण से यदि जेजेपी ने समर्थन वापस लिया तो 90 सदस्यीय विधानसभा में 40 विधायकों वाली बीजेपी की सरकार को बचाने में ये निर्दलीय ही काम आएंगे.
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बीजेपी और जेजेपी के गठबंधन की सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार 14 नवम्बर को होगा. (फाइल फोटो)


यह देखते हुए बीजेपी इन्हें अपने साथ रखना चाहती है. यहां यह उल्लेखनीय है कि इन 7 निर्दलीय विधायकों में से 5 बीजेपी के बागी हैं और टिकट नहीं मिलने के बाद निर्दलीय के रूप में लड़े. माना जा रहा है कि इनमें से दो को मंत्री बनाया जा सकता है. इसके बारे में मंगलवार को जेजेपी नेता और उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा था कि दोनों दल मिलकर निर्णय लेंगे.

(चंडीगढ़ से मनोज कुमार और दिल्ली से पंकज पताही के इनपुट पर आधारित)

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First published: November 13, 2019, 1:38 PM IST
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