बेअदबियों के इल्जाम में राम रहीम पर कसा कानूनी शिकंजा, डेरे की बेचैनी बढ़ने लगी
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बेअदबियों के इल्जाम में राम रहीम पर कसा कानूनी शिकंजा, डेरे की बेचैनी बढ़ने लगी
राम रहीम की मुश्किलें बढ़ी

डेरे वालों को लगता है कि ये सब बदलाखोरी की सियासत है. क्योंकि उन्होंने लगातार दो चुनाव (Election) में अकाली दल का समर्थन किया था और मौजूदा सरकार (Government) किसी ना किसी ढंग से डेरे और अकालियों के तार जोड़ने की कोशिश में लगी है.

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चंडीगढ़. बेअदबियों के इल्जाम में डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम (Gurmeet Ram Rahim) पर कानूनी शिकंजा जितना मजबूत हो रहा है डेरे में उतनी ही बेचैनी बढ़ने लगी है. पहले लिखित बयान और अब खुद सामने आकर डेरा सच्चा सौदा (Dera Sacha Sauda) के नुमाइंदों ने पंजाब पुलिस की पूरी तफ्तीश को ही साजिश करार दे दिया है. इसके लिए दुहाई सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट के दी जा रही है जिस पर फैसला खुद सीबीआई ने ही रुकवाया है.

डेरे वालों को लगता है कि ये सब बदलाखोरी की सियासत है. क्योंकि उन्होंने लगातार दो चुनाव में अकाली दल का समर्थन किया था और मौजूदा सरकार किसी ना किसी ढंग से डेरे और अकालियों के तार जोड़ने की कोशिश में लगी है.

अब ऐसा भी नहीं है कि अकाली अकेले ही डेरे के दर पर समर्थन के लिए जाते हुए देखे गए हैं. कांग्रेस वाले भी कई बार डेरे के चक्कर लगाते देखे जा चुके हैं. मगर जब डेरे पर बेअदबियों के दाग लग रहे हों तब तो विरोधी खेमे वाले ही उसके ज्यादा नजदीक दिखेंगे.



अकालियों के वक्त लगे थे आरोप
अकालियों के ही वक्त ये SIT बनी थी जिसने डेरे पर उंगलियां खड़ी की और अकालियों के ही दौर में ये जांच सीबीआई को भी गई, जिसने डेरे को क्लीन चिट दी. यानि दो जांच एजेंसियां और दो अलग-अलग नतीजे जिनका इस्तेमाल हर कोई अपनी सियासी सहूलियत के हिसाब से कर रहा है.

अकाली दल ने कही ये बात

वहीं अकाली दल का इस मामले पर कहना है कि 5 साल से ज्यादा का वक्त गुजर चुका है. दोषियों को सजा दिलवाना तो दूर अब तक सूबे की पुलिस और केंद्र की एजेंसी इस बात पर उलझे हुए हैं कि केस किसके हाथों में. नतीजा ये कि दोनों ही एक दूसरे की जांच को काटने में लगे हैं जिससे तफ्तीश बार-बार घूम कर वहीं आ जाती है जहां 5 साल पहले खड़ी थी.
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