Home /News /haryana /

खट्टर सरकार पर सुरजेवाला का वार, बोले ‘अटैची दो-नौकरी लो’ कांड के तार ऊपर तक जुड़े

खट्टर सरकार पर सुरजेवाला का वार, बोले ‘अटैची दो-नौकरी लो’ कांड के तार ऊपर तक जुड़े

सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर साहब मीडिया में दोषियों को न बख्शने की छाती ठोंकते हैं

सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर साहब मीडिया में दोषियों को न बख्शने की छाती ठोंकते हैं

Surjewala’s Attack On Recruitment Scam: रणदीप सुरेजवाला ने कहा कि खट्टर साहब मीडिया में दोषियों को न बख्शने की छाती ठोंकते हैं और ऐसा लगता है कि दूसरी ओर ‘विशेष आदेशों’ के चलते विजिलैंस विभाग अनिल नागर, अश्विनी शर्मा और नवीन को मौज करवा रहे हैं और जांच का ‘ढकोसला’ कर रहे हैं.7 साल में 32 पेपर लीक हुआ, भर्ती घोटाले उघड़े, लेकिन अब तक कोई जांच न तो नतीजे तक पहुंची, न ही किसी अपराधी को सजा हुई.

अधिक पढ़ें ...

    चंडीगढ़. कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) ने भर्ती घोटाले के मामले में खट्टर सरकार (Khattar Government) को घेरते हुए कई हमले किए हैं. सुरजेवाला ने कहा कि खट्टर सरकार की एक ‘कला’ मशहूर है, कितने ही घोटाले हों या नौकरियां बिकें, मुख्यमंत्री जी के ‘तीन जुमले‘ कायम हैं- पारदर्शिता, मैरिट और ‘बिना पर्ची, बिना खर्ची.’ 7 साल में 32 पेपर लीक हुए, भर्ती घोटाले उघड़े, लेकिन, 7 साल में कोई जांच परिणाम तक नहीं पहुंची, न ही किसी अपराधी को सज़ा हुई.

    खट्टर सरकार हर नौकरी भर्ती घोटाले को इतनी सफाई से दबाती है कि इनके कमीशन के ‘चेयरमैन’, ‘मेम्बर्स’ और सरकार में बैठे ‘सफेदपोश’ साफ बच निकलते हैं. अदालतें फटकार लगाती रहती हैं लेकिन, खट्टर सरकार की पुलिस जानबूझकर कोर्ट में सबूत ही पेश नहीं करती और आरोपी छूट जाते हैं. सुरजेवाला ने कहा कि महाव्यापम घोटाले या ‘अटैची दो- नौकरी लो’ कांड में भी खट्टर सरकार व उसके पुलिस विजिलेंस विभाग ने पूरा मामला रफा-दफा करने की तैयारी कर ली है. एक बार फिर HPSC के चेयरमैन व मेंबर्स, HSSC के चेयरमैन व मैंबर्स, सरकार में बैठे बड़े-बड़े सफेदपोश तथा रिश्वत देकर नौकरी लगने वाले सभी लोग जाँच के दायरे से ही बाहर रख साफ बचा दिए गए हैं. एक बार फिर अगर ठगे जाएंगे, तो हरियाणा के युवा. यह बात तथ्यों से साबित होती है. मुख्यमंत्री, मनोहर लाल खट्टर हरियाणा के युवाओं को इस ‘ऑपरेशन अटैची कांड कवरअप’ का जवाब दें.

    सवालः हटाई गई कंपनी को ठेका क्यों व कैसे दिया?

    रणदीप सुरजेवाला ने पूछा कि एप्लीकेशन पोर्टल-स्कैनिंग-पेपर चेकिंग करने वाली ‘हटाई गई कंपनी’ को HPSC की भर्ती का ठेका क्यों व कैसे दिया? FIR-रिमांड एप्लीकेशंस में नामज़द आरोपियों की जाँच-गिरफ्तारी-कार्रवाई क्यों नहीं? अटैची रिश्वत कांड की FIR दिनांक 17.11.2021 (संलग्न A1) में फर्जी OMR शीट भरने तथा रिश्वत का पैसा लेने का सीधा इल्ज़ाम जसबीर सिंह भलारा व उसकी कंपनी मैसर्स सेफडॉट ई-सॉल्यूशन प्राईवेट लिमिटेड व आरोपी नवीन पर लगा है.

    विजिलेंस की जांच में तथा अदालत के सामने पेश की गई रिमांड एप्लीकेशन में अश्विनी शर्मा; अनिल नागर, डिप्टी सेक्रेटरी, HPSC व विजय भलारा, कर्मचारी, मै. सेफडॉट ई-सॉल्यूशंस प्राईवेट लिमिटेड का नाम स्पष्ट तौर से आरोपी के तौर पर सामने आया है. जानकारी के मुताबिक पूर्व HPSC के चेयरमैन के समय साल 2020 में जसबीर सिंह की कंपनी को ‘हटा दिया’ गया था. मौजूदा HPSC चेयरमैन, आलोक वर्मा के कार्यभार संभालने के बाद HPSC की भर्तियों का काम एक बार फिर जसबीर सिंह की कंपनी को दे दिया गया.

    सवाल यह है कि एक ‘हटाई गई’ कंपनी को क्यों, किस कारण, किस हालात व किसके कहने से HPSC की इतनी महत्वपूर्ण भर्तियों का काम दिया गया? इस बारे HPSC के चेयरमैन व सदस्यों से विजिलैंस द्वारा पूछताछ क्यों नहीं की गई?

    आरोपी को सत्ता में बैठे सफेदपोशों का आशीर्वाद

    सवाल यह भी है कि जब FIR व विजिलेंस की रिमांड एप्लीकेशंस में साफ तौर से जसबीर सिंह भलारा, मालिक, मैसर्स सेफडॉट ई-सॉल्यूशंस प्राईवेट लिमिटेड व उसके कर्मचारी विजय भलारा का नाम आरोपी के तौर पर आया है, तो विजिलेंस विभाग ने उनकी जाँच, गिरफ्तारी व कार्यवाही क्यों नहीं की? क्या मुख्य आरोपी होने के बावजूद कृपादृष्टि इसलिए क्योंकि सत्ता में बैठे सफेदपोशों का आशीर्वाद इनके साथ है?

    -आरोपियों की जांच गिरफ्तारी, कार्रवाई क्यों नहीं?

    रणदीप सुरजेवाला ने पूछा कि एप्लीकेशन पोर्टल-स्कैनिंग-पेपर चेकिंग करने वाली ‘हटाई गई कंपनी’ को HPSC की भर्ती का ठेका क्यों व कैसे दिया? FIR-रिमांड एप्लीकेशंस में नामज़द आरोपियों की जांच-गिरफ्तारी-कार्रवाई क्यों नहीं? अटैची रिश्वत कांड की FIR दिनांक 17.11.2021 (संलग्न A1) में फर्जी OMR शीट भरने तथा रिश्वत का पैसा लेने का सीधा इल्ज़ाम जसबीर सिंह भलारा व उसकी कंपनी मैसर्स सेफडॉट ई-सॉल्यूशन प्राईवेट लिमिटेड व आरोपी नवीन पर लगा है.

    विजिलेंस की जांच में तथा अदालत के सामने पेश की गई रिमांड एप्लीकेशन में अश्विनी शर्मा; अनिल नागर, डिप्टी सेक्रेटरी, HPSC व विजय भलारा, कर्मचारी, मै. सेफडॉट ई-सॉल्यूशंस प्राईवेट लिमिटेड का नाम स्पष्ट तौर से आरोपी के तौर पर सामने आया है. जानकारी के मुताबिक पूर्व HPSC के चेयरमैन के समय साल 2020 में जसबीर सिंह की कंपनी को ‘हटा दिया’ गया था. मौजूदा HPSC चेयरमैन, आलोक वर्मा के कार्यभार संभालने के बाद HPSC की भर्तियों का काम एक बार फिर जसबीर सिंह की कंपनी को दे दिया गया.

    किसके कहने पर ‘दागी’ कंपनी को काम दिया?

    सवाल यह है कि एक ‘हटाई गई’ कंपनी को क्यों, किस कारण, किस हालात व किसके कहने से HPSC की इतनी महत्वपूर्ण भर्तियों का काम दिया गया? इस बारे HPSC के चेयरमैन व सदस्यों से विजिलैंस द्वारा पूछताछ क्यों नहीं की गई? सवाल यह भी है कि जब FIR व विजिलेंस की रिमांड एप्लीकेशंस में साफ तौर से जसबीर सिंह भलारा, मालिक, मैसर्स सेफडॉट ई-सॉल्यूशंस प्राईवेट लिमिटेड व उसके कर्मचारी विजय भलारा का नाम आरोपी के तौर पर आया है, तो विजिलेंस विभाग ने उनकी जांच, गिरफ्तारी व कार्यवाही क्यों नहीं की? क्या मुख्य आरोपी होने के बावजूद कृपादृष्टि इसलिए क्योंकि सत्ता में बैठे सफेदपोशों का आशीर्वाद इनके साथ है?

    Tags: CM Manohar Lal Khattar, Haryana politics, Randeep Singh Surjewala

    विज्ञापन

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें
    विज्ञापन

    टॉप स्टोरीज

    अधिक पढ़ें

    अगली ख़बर