कथित संत रामपाल का बेटा अपनी बेटी की शादी में हो सकेगा शामिल, हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत
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कथित संत रामपाल का बेटा अपनी बेटी की शादी में हो सकेगा शामिल, हाईकोर्ट से मिली अंतरिम जमानत
रामपाल जेल में है बंद (File Photo)

रामपाल (Rampal) सहित उसके बेटे (Son) को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. उसके खिलाफ दो मामले अभी लंबित हैं.

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चंडीगढ़. कथित संत रामपाल के बेटे विजेंदर को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेटी की शादी में शामिल होने के लिए तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी है. जस्टिस दया चौधरी एवं जस्टिस मीनाक्षी आई मेहता की खंडपीठ ने विजेंदर को तीन सप्ताह की जमानत देते हुए सरकार को निर्देश दिए कि वह विजेंदर की बेटी की शादी से ठीक दो सप्ताह पहले उसे जमानत पर छोड़ दे और शादी के सप्ताह बाद विजेंदर खुद को पुलिस के समक्ष पेश कर दे.

विजेंदर की बेटी की शादी 15 जुलाई को है. ऐसे में शादी से दो सप्ताह पहले और एक सप्ताह बाद की विजेंदर को हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत दी है. साथ विजेंदर को आदेश दिए हैं कि वह अंतरिम जमानत के दौरान प्रत्येक सप्ताह पुलिस थाने में हाजिरी देंगे और शांति व्यवस्था को हानि नहीं पहुंचाएंगे.

रामपाल और उसके बेटे को आजीवन कारावास की सजा
बता दें कि रामपाल सहित उसके बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. उसके खिलाफ दो मामले अभी लंबित हैं. वह जेल में है और अब उसने अपनी बेटी की शादी में शामिल होने की इजाजत दिए जाने की हाईकोर्ट से मांग की थी और बताया था कि उसकी बेटी की 15 जुलाई को शादी है और एक पिता होने के नाते उसका अपनी बेटी की शादी में शामिल होना अनिवार्य है. ऐसे में उसे जमानत दी जाए. हाईकोर्ट ने वरिंदर की मांग को स्वीकार करते हुए उसे तीन सप्ताह की अंतरिम जमानत दे दी.
कौन है रामपाल


रामपाल का जन्म सोनीपत के गोहाना तहसील के धनाना गांव में हुआ था. पढ़ाई पूरी करने के बाद रामपाल को हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर की नौकरी मिल गई. नौकरी के दौरान ही रामपाल की मुलाकात 107 साल के कबीरपंथी संत स्वामी रामदेवानंद महाराज से हुई. रामपाल उनका शिष्य बन गया. स्वामी जी के करीब आने के बाद रामपाल उनके रंग में रंगने लगे. 1995 को संत रामपाल ने 18 साल की नौकरी से इस्तीफा दे दिया. सत्संग करने लगे. फिर धीरे-धीरे रामपाल खुद संत बन गए. उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी. कमला देवी नाम की एक महिला ने करोंथा गांव में बाबा रामपाल दास महाराज को आश्रम के लिए जमीन दे दी. फिर 1999 में रामपाल ने सतलोक आश्रम की नींव रखी.
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