हरियाणा में अकालियों का नया पैंतरा, बीजेपी से कर डाली ये मांग

अकाली दल हरियाणा में बीजेपी के साथ गठबंधन तो चाहता है, लेकिन अपनी जड़े मजबूत भी करना चाहता है

News18 Haryana
Updated: June 19, 2019, 4:49 PM IST
हरियाणा में अकालियों का नया पैंतरा, बीजेपी से कर डाली ये मांग
मनोहर लाल खट्टर और सुखबीर सिंह बादल
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Updated: June 19, 2019, 4:49 PM IST
हरियाणा में विधानसभा चुनाव के नज़दीक आने के साथ ही सियासी चहलकदमी तेज़ हो गई है. लोकसभा चुनावों में दस की दस सीटें जीतने के बाद प्रदेश की मनोहर लाल सरकार एक बार फिर सत्ता में लौटने को लेकर आश्वस्त है. बीजेपी 75 सीटें जीतने का दावा कर रही है और वो भी खुद अकेले अपने दम पर, वहीं अकाली दल हरियाणा में अपनी जड़ें तलाश रहा है.  एनडीए का ये साथी दल हरियाणा में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की फिराक में है.

30 सीटें मांग रहा अकाली दल

अकाली दल हरियाणा में बीजेपी के साथ गठबंधन तो चाहता ही है, कम से कम 30 सीटें भी अपने खाते में मांग रहा है. प्रदेश बीजेपी को नहीं लगता कि वो उसे इतनी सीटें दी जा सकती हैं, लिहाज़ा पार्टी नेता अभी अपने ही दम पर मिशन 75 हासिल करने की बात कर रहे हैं.

हरियाणा अकाली दल का इनेलो से साथ था गठबंधन

बता दें कि इसके पहले हरियाणा में अकाली दल का सहयोग और समर्थन इंडियन नेशनल लोकदल के साथ रहता था. हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों  को छोड़ दें तो उसने हर चुनाव में इनेलो का ही साथ दिया है. पिछले लोकसभा चुनावों में तो हिसार से इनेलो के प्रत्याशी रहे दुष्यंत चौटाला का प्रचार करने भी सरदार प्रकाश सिंह बादल पहुंचे थे. हालांकि संसदीय चुनाव में अकाली दल ने भाजपा का साथ दिया था, लेकिन तब उसने कोई सीट नहीं मांगी थी.

इस आधार पर अकाली दल मांग रहा इतनी सीटें

संसदीय चुनाव के बाद अकाली दल के हरियाणा के प्रभारी व राज्यसभा सदस्य बलविंदर सिंह भूंदड़ ने हरियाणा के नेताओं के साथ मीटिंग करके अब भाजपा से 30 सीटें मांग लीं हैं. उनकी दलील है कि अकाली दल का कुरुक्षेत्र, अंबाला, फतेहाबाद, सिरसा आदि में अच्छा आधार है. इस पंजाबी व सिख बहुल इलाकों की सीटें उन्हें दी जानी चाहिए.
30 सीटें मिलना मुश्किल

अकाली दल की राजनीति पर नजर रखने वालों का मानना है कि पार्टी को इतनी सीटें मिलनी मुश्किल हैं. लेकिन भाजपा पंजाब में ज्यादा पांव न पसारे, ऐसा इसलिए किया गया है. बता दें कि इनेलो के साथ समझौता होने पर भी वे पार्टी को दो से तीन सीटें ही देते रहे हैं.

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