SYL मामला: एक बार फिर आमने-सामने हरियाणा औऱ पंजाब

पंजाब में 121 किमी नहर बननी थी. टुकड़ों में निर्माण के बाद ज्यादातर हिस्सा फिर पाटा. पटियाला-रोपड़ में किसानों ने 42 किलोमीटर हिस्सा समतल कर दिया.

News18 Haryana
Updated: July 11, 2019, 3:54 PM IST
SYL मामला: एक बार फिर आमने-सामने हरियाणा औऱ पंजाब
एसवाईएल मामले पर फिर से आमने सामने हरियाणा-पंजाब
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Updated: July 11, 2019, 3:54 PM IST
एसवाईएल को लेकर दशकों से हरियाणा-पंजाब में विवाद चला आ रहा है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी मामले का हल नहीं निकला. पंजाब ने फैसला मानने से इंकार कर दिया तो हरियाणा मामले को फिर से सुप्रीम कोर्ट ले गया. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को मध्यस्थता कर हल निकालने को कहा है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि हल निकालें वरना सुप्रीम कोर्ट फैसला सुनाएगा.

क्या है SYL नहर की स्थिति ?

एसवाईएल नर की कुल लंबाई 212 किलोमीटर है. हरियाणा 91 किमी. के अपने हिस्से की नहर बना चुका है. ये नहर अंबाला से करनाल के मूनक तक जाती है. SYL बनने से हरियाणा के 6 जिलों को सबसे ज्यादा फायदा होगा. इन जिलों में रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, मेवात, गुरुग्राम, फरीदाबाद और झज्जर शामिल है. पंजाब में 121 किमी नहर बननी थी. टुकड़ों में निर्माण के बाद ज्यादातर हिस्सा फिर पाटा. पटियाला-रोपड़ में किसानों ने 42 किलोमीटर हिस्सा समतल कर दिया.

कब-कब हुआ SYL का विवाद ?

24 मार्च 1976 में केंद्र सरकार ने SYL की अधिसूचना जारी की गई. 31 दिसंबर 1981 को हरियाणा में SYL का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया. 8 अप्रैल 1982 को इंदिरा गांधी ने पटियाला के कपूरी गांव में इस नहर की नींव रखी. 24 जुलाई 1985 को राजीव-लौंगोवाल समझौता हुआ. 1996 में समझौता सिरे नहीं चढ़ने पर हरियाणा सुप्रीम कोर्ट की शरण में जा पहुंचा.



सुप्रीम कोर्ट ने दिया एसवाईएल बनाने का निर्देश
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15 जनवरी 2002 को SC ने पंजाब को एक साल में SYL बनाने का निर्देश दिया. 12 जुलाई 2004 को पंजाब विधानसभा ने एक्ट पास कर जल समझौते को रद्द कर दिया. राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट से रेफरेंस मांगा और 12 साल मामला ठंडे बस्ते में रहा.

14 मार्च 2016 को पंजाब सरकार ने नहर के लिए अधिग्रहित जमीन किसानों को लौटा दी. 2016 में ही पंजाब ने हरियाणा सरकार का 191 करोड़ रुपये का चेक लौटा दिया. 10 नवंबर 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर से हरियाणा के पक्ष में फैसला दे दिया. पंजाब ने अभी तक SYL नहर का निर्माण शुरू नहीं किया.

पंजाब ने जब सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं माना तो हरियाणा फिर कोर्ट की शरण में गया. अब हरियाणा को सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है कि उसे उसके हक का पानी मिलेगा जिससे प्रदेश की सूखी जमीन की प्यास बुझेगी और खुशहाली आएगी.

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First published: July 11, 2019, 3:51 PM IST
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