Assembly Banner 2021

आजादी की पहली लड़ाई मेरठ से नहीं अंबाला से शुरू हुई थी, वॉर मेमोरियल बनाकर दुनिया को बताएगी खट्टर सरकार

अंबाला में वार मेमोरियल बनाएगी खट्टर सरकार   (फाइल फोटो)

अंबाला में वार मेमोरियल बनाएगी खट्टर सरकार (फाइल फोटो)

War Memorial : मुख्यमंत्री इस वार मेमोरियल को एक ऐसा रूप देना चाहते हैं, जिससे आने वाली पीढिय़ां 1857 की क्रांति, हमारे शहीद और उस वक्त में हरियाणा के लोगों के योगदान को समझ सके.

  • Share this:
मनोज कुमार

अंबाला. देश- दुनिया, विकीपीडिया, इतिहासकार भले ही मानें कि अंग्रेजों के खिलाफ भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की शुरूआत 10 मई 1857 को मेरठ से हुई थी, लेकिन हरियाणा की खट्टर सरकार ऐसा नहीं मानती. उसके मुताबिक ने 1857 का संग्राम मेरठ से नहीं, बल्कि अंबाला से शुरू हुआ था. इसके कई प्रमाण हैं. हरियाणा (Haryana) के अंबाला जिले बन रहे वार मेमोरियल (War Memorial) में अंबाला के लोगों का 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को विशेष रूप से प्रदर्शित किया जाएगा.

हरियाणा के मुख्य सचिव विजय वर्धन ने बुधवार को इतिहासकारों के साथ बैठक करते हुए कहा कि इस वार मेमोरियल को इस तरह से तैयार किया जाए जिसमें आने वाला हर व्यक्ति ना केवल ये जान पाए कि 1857 का संग्राम सबसे पहले मेरठ से नहीं अंबाला कैंट से शुरू हुआ था, बल्कि वो उस वक्त के ऐतिहासिक लोकगीत और प्रचलित पोशाक और हथियारों के विषय में भी जानकारी प्राप्त कर सके.



वार मेमोरियल को भव्य रूप देना चाहते हैं खट्टर
मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल इस वार मेमोरियल को एक ऐसा रूप देना चाहते हैं. जिससे आने वाले कई सालों तक हमारी पीढिय़ां 1857 की क्रांति, हमारे शहीद और उस वक्त में हरियाणा के लोगों के योगदान को समझ सके. मुख्य सचिव ने कहा कि बहुत सारे लोग यह मानते हैं कि 1857 की लड़ाई मेरठ से शुरू हुई थी जबकि उससे कुछ वक्त पहले ही 10 मई 1857 को अंबाला कैंट में यह लड़ाई शुरू हो चुकी थी. जिसका प्रमाण 10 मई 1857 को ब्रिटिश सरकार का भेजा गया टेलीग्राम है. जिसे अंबाला कैंट में बनने वाले वार मेमोरियल में सहेज कर रखा जाएगा.

स्वाधीनता की अलख जगाने वाले लोकगीतों को पुनर्जीवित किया जाए
इस मौके पर बहुत सारे इतिहासकारों ने भी अपने-अपने विचार इस वार मेमोरियल को लेकर दिए. इसके अलावा मुख्य सचिव ने कहा कि यह बहुत जरूरी है कि उस वक्त कौन -कौन से लोकगीत हरियाणा में आम लोगों के अंदर स्वाधीनता की भावना पैदा कर रहे थे उनको फिर से जीवित किया जाए . इसके अलावा उस वक्त कि ऐतिहासिक सडक़ों का प्रतिरूप भी इस तरह से बनाया जाए कि आम आदमी भी उन सडक़ों पर घूमने जैसा अनुभव कर सकें.

वार मेमोरियल के कार्यों के लिए कमेटियां बनेंगी
हरियाणा आर्काइव विभाग (Haryane Archive Department) के निदेशक की तरफ से भी कुछ उर्दू के वह खत जो उस वक्त के राजाओं ने भेजे थे वह भी उपलब्ध कराए गए . जिनको अंग्रेजी और हिंदी में अनुवाद करके उपलब्ध कराने के लिए मुख्य सचिव की तरफ से आदेश दिए गए हैं. इतिहासकारों का यह मत था कि यह वार मेमोरियल जब तक लोगों के साथ नहीं जुड़ पाएगा जब तक कि हम सही सूचनाएं और उस वक्त की सच्ची तस्वीर लोगों तक ना दिखा पाए. मुख्य सचिव विजय वर्धन कहा कि वार मेमोरियल के अलग-अलग हिस्सों और वहां पर होने वाले अलग अलग कार्यों के लिए कमेटी और सब कमेटी जल्दी ही बनाई जाए ताकि इसका क्रियान्वयन जल्द से जल्द किया जा सके.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज