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किसानों का दर्द दरकिनार कर जाटों को आरक्षण दिलवाने में जुटी भाजपा!

किसानों का दर्द दरकिनार कर जाटों को आरक्षण दिलवाने में जुटी भाजपा!

जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए भाजपा ने मानो आंदोलन सा छेड़ दिया है। ताबड़तोड़ मुलाकातों का दौर जारी है। भाजपा अध्यक्ष की जाट नेताओं से मुलाकात के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री जाट प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और उसके बाद 26 मार्च को नौ राज्यों के जाट प्रतिनीधियों से भाजपा अध्यक्ष बातचीत करेंगे।

जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए भाजपा ने मानो आंदोलन सा छेड़ दिया है। ताबड़तोड़ मुलाकातों का दौर जारी है। भाजपा अध्यक्ष की जाट नेताओं से मुलाकात के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री जाट प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और उसके बाद 26 मार्च को नौ राज्यों के जाट प्रतिनीधियों से भाजपा अध्यक्ष बातचीत करेंगे।

जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए भाजपा ने मानो आंदोलन सा छेड़ दिया है। ताबड़तोड़ मुलाकातों का दौर जारी है। भाजपा अध्यक्ष की जाट नेताओं से मुलाकात के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री जाट प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और उसके बाद 26 मार्च को नौ राज्यों के जाट प्रतिनीधियों से भाजपा अध्यक्ष बातचीत करेंगे।

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    जाटों को आरक्षण दिलाने के लिए भाजपा ने मानो आंदोलन सा छेड़ दिया है। ताबड़तोड़ मुलाकातों का दौर जारी है। भाजपा अध्यक्ष की जाट नेताओं से मुलाकात के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री जाट प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और उसके बाद 26 मार्च को नौ राज्यों के जाट प्रतिनीधियों से भाजपा अध्यक्ष बातचीत करेंगे।

    ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि सरकार के लिए किसानों को रहात देने ज्यादा जरूरी है या फिर जाटों को आरक्षण दिलाना।
    दरअसल, जाटों को आरक्षण दिलवाना भाजपा और उसकी हुकूमत के लिए अब सबसे बड़ा मिशन बन चुका है। बेमौसमी बरसात से हुई बर्बादी और उसके दर्द से कराहते किसान को बीच मझधार में छोड़कर भाजपा इस मंथन में जुटी है कि जाटों को आखिरकार आरक्षण कैसे दिलावाया जाए।

    ऐसी क्या दलील पेश की जाए कि देश की सबसे बड़ी अदालत को यह महसूस हो जाए कि आजादी के छह दशक बाद भी जाट वाकई सामाजिक और आर्थिक पैमाने पर पिछड़े हैं। इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए भाजपा के नेता महामंथन में जुटे हैं। हरियाणा से लेकर दिल्ली के 16 अशोका रोड तक मुलाकातों का दौर जारी है। बुधवार को सीएम मनोहर लाल प्रदेश के जाट प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे और उसके बाद 26 मार्च को भाजपा के राषट्रीय अध्यक्ष 9 राज्यों के जाट प्रतिनिधियों से मुलाकात करेंगे।

    चुनाव से पहले जाट वोट को अपने खाते में जोड़ने के लिए यूपीए सरकार ने आनन फानन में अधिसूचना जारी कर दी थी और अब जब सुप्रीम कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया है। अब भाजपा जाटों को यह अहसास कराने की कोशिश कर रही है कि उनकी असली हमदर्द भाजपा ही है। कांग्रेस ने जो किया उसी की सजा अब जाट भोग रहे हैं। आरक्षण का मुद्दा ही ऐसा है,जो सियासत में तूफान लाने के लिए काफी है। मौजूदा हालात भी उसी सियासी तूफान का एक झोंका है, जिसे शांत करने का दावा कर भाजपा खुद को सवालों में घसीट रही है।

    सवाल यह कि सरकार के लिए देश के अन्नदाता का दर्द आरक्षण की आग से बड़ा आखिर कैसे हो सकता है? ये सवाल हम नहीं देश और प्रदेश के मौजूदा हालात उठा रहे हैं। बेमौसमी बरसात में हुई बर्बादी से हलकान किसान खून के आंसू रो रहा है और देश पर राज करने वाले हुकमरान जाटों को आरक्षण दिलवाने के आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं। इसे किसानों के जख्मों पर नमक नहीं तो और क्या समझें।

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    Tags: BJP

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