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इस पार्क से बजा था आजादी का बिगुल, आज उसकी हो रही है अनदेखी

इस पार्क से बजा था आजादी का बिगुल, आज उसकी हो रही है अनदेखी

देश की आजादी में हिसार जिले का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। यहां के जाबांजों ने फिरंगियों के साथ कई बार आमने-सामने की लड़ाई लड़ी। देश की आजादी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई हिसार में नागौरी गेट से आरंभ हुई। 19 अगस्त 1857 वर्तमान समय के लाला लाजपतराय चौक पर अंग्रेजों के साथ आमने-सामने की लड़ाई हुई। इस लड़ाई में 435 भारत मां के जाबांजों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस लड़ाई में काफी संख्या में अंग्रेज भी मारे गए, लेकिन अंग्रेजों ने जानबूझकर मृतक फिरंगियों की संख्या नहीं बताई।

देश की आजादी में हिसार जिले का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। यहां के जाबांजों ने फिरंगियों के साथ कई बार आमने-सामने की लड़ाई लड़ी। देश की आजादी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई हिसार में नागौरी गेट से आरंभ हुई। 19 अगस्त 1857 वर्तमान समय के लाला लाजपतराय चौक पर अंग्रेजों के साथ आमने-सामने की लड़ाई हुई। इस लड़ाई में 435 भारत मां के जाबांजों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस लड़ाई में काफी संख्या में अंग्रेज भी मारे गए, लेकिन अंग्रेजों ने जानबूझकर मृतक फिरंगियों की संख्या नहीं बताई।

देश की आजादी में हिसार जिले का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। यहां के जाबांजों ने फिरंगियों के साथ कई बार आमने-सामने की लड़ाई लड़ी। देश की आजादी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई हिसार में नागौरी गेट से आरंभ हुई। 19 अगस्त 1857 वर्तमान समय के लाला लाजपतराय चौक पर अंग्रेजों के साथ आमने-सामने की लड़ाई हुई। इस लड़ाई में 435 भारत मां के जाबांजों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस लड़ाई में काफी संख्या में अंग्रेज भी मारे गए, लेकिन अंग्रेजों ने जानबूझकर मृतक फिरंगियों की संख्या नहीं बताई।

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देश की आजादी में हिसार जिले का योगदान काफी महत्वपूर्ण रहा है। यहां के जाबांजों ने फिरंगियों के साथ कई बार आमने-सामने की लड़ाई लड़ी। देश की आजादी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई हिसार में नागौरी गेट से आरंभ हुई। 19 अगस्त 1857 वर्तमान समय के लाला लाजपतराय चौक पर अंग्रेजों के साथ आमने-सामने की लड़ाई हुई। इस लड़ाई में 435 भारत मां के जाबांजों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। इस लड़ाई में काफी संख्या में अंग्रेज भी मारे गए, लेकिन अंग्रेजों ने जानबूझकर मृतक फिरंगियों की संख्या नहीं बताई।

हिसार क्षेत्र के जाबांजों ने हिंदुस्तान को अंग्रेजों के चुंगल से बाहर निकालने के लिए शस्त्र उठाए और खुलकर फिरंगी सेना को चुनौती दी। इस बारे में जानकारी देते हुए इतिहासकार डा. महेंद्र सिंह ने बताया कि हिसार के नागौरी गेट ने आजादी के सारे पड़ाव देखे हैं। यहां पर 1857 में काफी महत्वपूर्ण लड़ाई हुई। यहां पर हिसार व आसपास के गांवों से एकत्रित हुए भारतीय दल ने फिरंगी सेना को ललकारा था। करीब10 हजार की संख्या में भारतीय जाबांजों ने हाथ में लाठियां, बरछी, कुल्हाड़ी, भाले, तलवार और अन्य देशी हथियारों से लड़ रहे थे, जबकि अंग्रेजी सेना तोप व सेना के साथ मैदान में थी। इस लड़ाई में हमारे 438 बहादुर पूर्वजों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इस लड़ाई में फिरंगियों ने मानवता को तार-तार करते हुए शाम को 123 लोगों को तलाकी गेट पर रोडरोलकर के नीचे कुचल दिया गया। इससे पूरे क्षेत्र में फिरंगियों के खिलाफ एक घृणा का माहौल कायम किया और यह लड़ाई युवाओं में आजादी की जंग लड़ने के लिए प्ररेणादायक बनी।

हिसार क्षेत्र में आजादी के लिए अंग्रेजों के साथ दो-दो हाथ करने के लिए 1857 में हांसी से आरम्भ हुआ। इस बारे में बताते हुए इतिहासकार डा. महेंद्र सिंह ने बताया कि वर्तमान क्रांतिमान पार्क से 1857 में हिसार क्षेत्र में क्रांति की शुरुआत यहीं से हुई। उस समय यहां पर जिला कार्यालय के भवन थे, जबकि उसके सामने जिला उपायुक्त व तहसीलदार के कार्यालय थे। यहां पर क्रांतिकारियों ने हमला करके तत्कालिन उपायुक्त, तहसीलदार को गोली मारी और अंग्रेजों के किले से एक लाख सत्तर हजार रुपए लूटे और जेल में बंद क्रांतिकारियों को मुक्त करवाया। बाद में जब अंग्रेजों ने 1857 की क्रांति को दबा दिया तो हिसार में स्मारक का निर्माण करवाकर क्रांतिकारियों के हाथों मारे गए 44 फिरंगी अधिकारियों के नाम अंकित करके इसको लाटबाग का नाम दिया गया। भारत की आजादी के बाद इसे नगर पालिका पार्क का नाम दिया गया। 1982 में तत्कालिन मुख्यमंत्री चौ.भजनलाल ने इस पार्क को क्रांतिमान पार्क का नाम देते हुए यहां पर चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा को स्थापित किया।

हिसार में हुई क्रांति के सारे निशान लगभग समाप्त हो चुके हैं। तलाकी गेट के अवशेष देखने को मिलत हैं लेकिन नागौरी गेट बिल्कुल समाप्त हो चुका है। सरकार ने हिसार में क्रांतिमान पार्क बनाकर क्रांति की याद करने की कोशिश अवश्य की, लेकिन रखरखाव की कमी के चलते यह पार्क काफी खस्ता हाल में है। इतनी बड़ी क्रांति के गवाह रहे हिसार के क्रांतिवीरों को याद रखने के लिए प्रदेश सरकार ने किसी भी प्रकार का म्यूजियम नहीं बनाया है, इसके चलते आज की पीढ़ी हिसार के वीर जाबांजों की वीरता को करीब-करीब भूल ही चूकी है।

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