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श्वेत पत्र तो बस ट्रेलर था, फिल्म अभी बाकी है: सीएम

मनोहर सरकार का पहला श्वेतपत्र हुड्डा सरकार पर आरोपों का ट्रेलर भर था। आरोपों की पूरी कहानी श्वेतपत्र पार्ट टू में सामने आएगी। ये दावा किया है मनोहर सरकार ने। मनोहर सरकार की मानें तो श्वेत पत्र का दूसरा हिस्सा हुड्डा सरकार के काले कारमानों की ऐसी कहानी पेश करेगा जो हरियाणा की जनता के साथ हुई लूट को बेपर्दा करेगी।

मनोहर सरकार का पहला श्वेतपत्र हुड्डा सरकार पर आरोपों का ट्रेलर भर था। आरोपों की पूरी कहानी श्वेतपत्र पार्ट टू में सामने आएगी। ये दावा किया है मनोहर सरकार ने। मनोहर सरकार की मानें तो श्वेत पत्र का दूसरा हिस्सा हुड्डा सरकार के काले कारमानों की ऐसी कहानी पेश करेगा जो हरियाणा की जनता के साथ हुई लूट को बेपर्दा करेगी।

मनोहर सरकार का पहला श्वेतपत्र हुड्डा सरकार पर आरोपों का ट्रेलर भर था। आरोपों की पूरी कहानी श्वेतपत्र पार्ट टू में सामने आएगी। ये दावा किया है मनोहर सरकार ने। मनोहर सरकार की मानें तो श्वेत पत्र का दूसरा हिस्सा हुड्डा सरकार के काले कारमानों की ऐसी कहानी पेश करेगा जो हरियाणा की जनता के साथ हुई लूट को बेपर्दा करेगी।

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मनोहर सरकार का पहला श्वेतपत्र हुड्डा सरकार पर आरोपों का ट्रेलर भर था। आरोपों की पूरी कहानी श्वेतपत्र पार्ट टू में सामने आएगी। ये दावा किया है मनोहर सरकार ने। मनोहर सरकार की मानें तो श्वेत पत्र का दूसरा हिस्सा हुड्डा सरकार के काले कारमानों की ऐसी कहानी पेश करेगा जो हरियाणा की जनता के साथ हुई लूट को बेपर्दा करेगी।

आरोपों पर सफाई का लिहाफ कैसे उढ़ाया जाए ये कांग्रेसियों से बेहतर शायद ही कोई बता सके। आंच हुडडा पर आई तो बचाव के लिए योद्धा भी मैदान कूद पड़े। संपत सिंह कह रहे हैं कि मनोहर सरकार का श्वेतपत्र झूठ का वो पुलिंदा है। जो खुद की नाकामियों को छिपाने के लिए सरकार ने बनाया है।

संपत सिंह को जवाब देने में सरकार ने जरा सी भी देर नहीं की। मनोहर सरकार के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कांग्रेस को चुनौती दे डाली कि अगर कांग्रेस के ये आरोप झूठे लग रहे हैं तो तथ्यों के साथ आंकड़े पेश कर दें। दूध का दूध और पानी का पानी सब कुछ साफ हो जाएगा।

आरोपों पर सफाई और सफाई पर सवाल आजाद लोकतंत्र की निशानी है और ऐसा होना भी चाहिए। लेकिन बीच मझधार में फंसी जनता कुछ सवाल प्रदेश के हुकक्मरानों के साथ साथ सत्ता के दूसरे पायदान पर खड़े विपक्ष से पूछ रही है। सवाल ये कि आंकड़ों की इस नूराकुश्ती में जनता आखिर विश्वास किस पर जताएं। आरोपों के पुलिंदे को सच मानकर पूर्व सरकार को कोसें या फिर आरोपों पर पोती गई सफाई को सच मानकर खुद को सांत्वना दे।

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