अमेरिका में पत्नी और लंदन में पति का नहीं बन रहा था मैरिज सर्टिफिकेट, हाईकोर्ट ने बदल दी पुरानी व्यवस्था

मैरिज सर्टिफिकेट के बिना पत्नी से मिलने लंदन से अमेरिका नहीं जा सका पति, हाईकोर्ट के इस आदेश ने मुश्किल की आसान . 

मैरिज सर्टिफिकेट के बिना पत्नी से मिलने लंदन से अमेरिका नहीं जा सका पति, हाईकोर्ट के इस आदेश ने मुश्किल की आसान . 

हरियाणा हाई कोर्ट ने विदेश में रहे रहे एक दंपति की याचिका की सुनवाई करते  हुए एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है. इस आदेश में देते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये दंपती का विवाह पंजीकरण करने की अनुमति दी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 20, 2021, 12:34 AM IST
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चंडीगढ़. विदेश में रह रहे दंपति को आखिरकार विवाह सर्टिफिकेट ( Marriage Certificate) को लेकर राहत मिल ही गई है. हरियाणा हाई कोर्ट ( Haryana High Court ) ने विदेश में रहे रहे एक दंपति की याचिका की सुनवाई करते  हुए एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है. इस आदेश में देते हुए वीडियो कांफ्रेंसिंग ( Video Conferencing) के जरिये दंपती का विवाह पंजीकरण करने की अनुमति दी है. हाई कोर्ट ने यह आदेश गुरुग्राम निवासी दंपती अमी रंजन और उनकी पत्नी मिशा वर्मा की याचिका पर सुनाया. विदेश में होने के कारण इनका विवाह पंजीयन नहीं हो पा रहा था.

अमी रंजन एक आईटी प्रोफेशनल हैं और वे लंदन में रहते हैं. उनकी पत्नी मिशा वर्मा डॉक्टर हैं, जो अमेरिका में कार्यरत हैं. दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज के तहत गुरुग्राम में 7 दिसंबर 2019 को शादी की थी. शादी के कुछ सप्ताह के बाद वह लंदन और पत्नी अमेरिका चली गई. पति को अपनी पत्नी के पास लंदन से अमेरिका जाने के लिए वीजा के लिए मैरिज सर्टिफिकेट की आवश्यकता पड़ी. इसके लिए दोनों ने पत्र से गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर-कम-मैरिज अफसर से उनका विवाह पंजीकरण करने का अनुरोध किया था. मैरिज सर्टिफिकेट के लिए दोनों ने कहा कि लाकडाउन के कारण वह विदेश से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से डिप्टी कमिश्नर-कम-मैरिज अफसर के सामने पेश होने को तैयार हैं. इस पर डिप्टी कमिश्नर-कम-मैरिज अफसर ने विवाह पंजीकरण करने से मना कर दिया. अफसर ने दोनों को उनके सामने पेश होने की बात कही. अफसर ने दलील दी कि विशेष विवाह अधिनियम, 1954 के तहत विवाह का पंजीकरण दोनों के पेश होने के बगैर नहीं हो सकता.

विवाह पंजीकरण नहीं बनने को लेकर डीसी के इसी आदेश को अमी रंजन ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी. हाई कोर्ट की एकल बेंच ने भी डीसी के आदेश को सही ठहराया था. एकल बेंच ने अपने आदेश में कहा था कि विवाह प्रमाणपत्र बुक पर हस्ताक्षर करने के लिए मैरिज अफसर के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने से छूट नहीं दी जा सकती है. इसके बाद दंपती ने डिविजन बेंच में चुनौती दी थी. जस्टिस रितु बाहरी और जस्टिस अर्चना पुरी की खंडपीठ ने अपील पर सुनवाई की. इस मामले में दंपती ने मैरिज अफसर के सामने पेश होने से छूट नहीं मांगी है, बल्कि केवल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का अनुरोध किया है. इस मामले में तमाम दलीलें दखीं गईं.

दंपति का पक्ष रखते हुए बेंच ने कहा कि तकनीकी तौर पर सभी दस्तावेज डिजिटल रूप में मौजूद हैं. ऐसे में याचिका कार्ता के हस्ताक्षर डिजिटल रूप से लिए जा सकते हैं. वीडियो कांफ्रेंस को विवाह अधिनियम के खिलाफ नहीं माना गया. हाई कोर्ट ने गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर-कम-मैरिज अफसर के आदेश को रद करते हुए आदेश जारी कर दिया. इसमें कहा कि वह याची पति-पत्नी को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए पेश होने को स्वीकार करे. कोर्ट ने पति-पत्नी के रिश्तेदारों को गवाह के तौर पर फिजिकल तौर पर गुरुग्राम के डिप्टी कमिश्नर-कम-मैरिज अफसर के सामने पेश होना होगा. हाईकोर्ट ने विवाह का पंजीकरण करने का आदेश दे दिया.
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