10 साल की उम्र में यश का कमाल, नेशनल वुशु चैंपियनशिप में जीता गोल्ड

यश के कोच अजय सांगवान बताते हैं कि जम्मू में हुई नेशनल वुशू प्रतियोगिता में खेलने से पूर्व वेट चैक किया तो तीन किलोग्राम अधिक पाया गया. एक बार तो यश का हौंसला टूट गया था.

Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: April 16, 2018, 7:54 PM IST
10 साल की उम्र में यश का कमाल, नेशनल वुशु चैंपियनशिप में जीता गोल्ड
यश सांगवान
Pardeep Sahu
Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: April 16, 2018, 7:54 PM IST
वह अपना जुनून बरकरार रखेगा और सफलता उसके कदमों में होगी. सतत प्रयास से ही किसी मंजिल को पाया जा सकता है. खासकर, अगर बाल अवस्था में ही आपने लक्ष्य तय कर लिया तो उसे साधना मुश्किल नहीं होगा. दादरी के गांव चरखी निवासी 10 वर्षीय यश सांगवान ने यह भी साबित कर दिया है कि, दिल में कुछ कर गुजरने के जज्बात हों तो बाल उम्र में भी उपलब्धियों की बुलंदी को छुआ जा सकता है. यश के शरारती स्वभाव के कारण बाक्सर बना दिया. यश ने छोटी सी उम्र में अपनी प्रतिभा दिखाते हुए नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड जीतकर मिशाल कायम कर दी.

सच तो यह है कि जीवन के महज 10 बसंत देखने वाला लाडला यश सांगवान की नजर अब ओलंपिक पर है. उसकी आंखों में बसे ओलंपिक गोल्ड मेडल के सपने जुनून के बल हकीकत की धरातल पर उतरने को लालायित है. वह बताता है वक्त के साथ कदमताल करते हुए अभी से पूरी लगन व समर्पण के साथ ओलंपिक में जाने की तैयारी कर रहा है. तभी तो बाक्सिंग और वुशु से खेल जीवन में अनेक उपलब्धियां अर्जित करने वाले यश शर्मा का एकमात्र ध्येय ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिलाना है.

देश को ओलंपिक में स्वर्ण पदक दिलाने का अपना सपना पूरा करने के लिए पिता विजेंद्र सांगवान और मां अजंता ने उसे खेलों के लिए प्रेरित किया. उन्हें आदर्श मानकर ही उसने महज 6 साल की उम्र में खेलों में पर्दापण किया और धीरे-धीरे खंड स्तरीय, जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं के बाद राज्य स्तरीय स्पर्धा में भी अलग पहचान बनाई. यहां उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर यश ने नेशनल गेम में भी स्वर्ण पदक झटक कर छोटी से उम्र में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा लिया.

वेट बढ़ा तो लगातार 9 घंटे दौड़ा

यश के कोच अजय सांगवान बताते हैं कि जम्मू में हुई नेशनल वुशु प्रतियोगिता में खेलने से पूर्व वेट चैक किया तो तीन किलोग्राम अधिक पाया गया. एक बार तो यश का हौंसला टूट गया था. मैच शुरू होने में 11 घंटे बचे थे तो यश ने हार नहीं मानी और लगातार 9 घंटे तक दौड़कर वेट लेवल पर कर लिया. मैच के दौरान सही वेट पाया तो उनका भी हौंसला बढ़ा. देखते ही देखते यश ने राजस्थान, चण्ड़ीगढ़, उडिसा, यूपी, जम्मू कश्मीर के खिलाडियों को पूरी प्रतियोगिता में हराते हुए स्वर्ण पदक को जीत लिया.

यश को दिया ब्रूस ली का नाम

कोच अजय सांगवान के अनुसार यश का वेट ज्यादा होने पर उसे लेवल पर लाने के लिए लगातार 9 घंटे तक दौड़ा. साथी खिलाड़िय़ों ने यश की हिम्मत देखते हुए उसे ब्रूस ली का नाम दे दिया. अजय के अनुसार वुशु टीम के ट्रायल के दौरान होनहार खिलाड़ी का प्रदर्शन देख कर चयनकर्ता आश्चर्यचकित रह गए थे और वे उनके शिष्य से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने यश को सीधा नेशनल चैंपियनशिप के लिए चुन लिया. यश भी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरे और उसने जम्मू में हुई नेशनल वुशु चैंपियनशिप में गोल्ड जीत कर अपनी धाक जमा दी.
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