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यहां बेनाम बीमारी दे रही मौत, पशुओं के भयावह हालात
Charkhi-Dadri News in Hindi

Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: January 9, 2019, 3:51 PM IST
यहां बेनाम बीमारी दे रही मौत, पशुओं के भयावह हालात
प्रतिकात्मक तस्वीर

राजस्थान से आई इस अज्ञात बीमारी के कारण पशुपालकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं.

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चरखी दादरी के ग्रामीण क्षेत्रों में बेनाम बीमारी से दुधारू पशुओं की मौत का सिलसिला नहीं थमने से पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है. जिले के गांव मेहड़ा में फैली इस बीमारी ने अब तक करीब 50 दुधारूपशुओं को मौत की नींद सुला दिया है. गांव के दुधारू पशुओं में आई अज्ञात बीमारी ने पशुपालकों में कोहराम मचाया हुआ है. ग्रामीणों की मानें तो दो दिन बुखार आने के बाद पशु की मौत हो रही है. हालांकि पशुपालन विभाग की टीम ने कमान संभालते हुए उपचार शुरू कर दिया है. बावजूद इसके भैंसों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है.

पशु चिकित्सकों के अनुसार यह बीमारी सर्दी के कारण गलघोंटू या मुंहखुर की तरह ही है. साथ लगते प्रदेश के गांवों में पशुओं का व्यापार करने की वजह से इस बीमारी ने तेजी से पांव पसार लिए हैं. जिसके चलते कई गांवों के पशु इस अज्ञात बीमारी का शिकार हो गए हैं.

बढ़ी पशुपालकों की चिंता

राजस्थान से आई इस अज्ञात बीमारी के कारण पशुपालकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं. पशु पालक विनय कुमर, ईश्वर सिंह, राजेश कुमार व सुरेश कुमार आदि ने बताया कि पिछले एक सप्ताह के दौरान उनके गांव में दुधारू पशुओं में आई बैनाम बीमारी के कारण लगातार काल का ग्रास हो रहे हैं. ऐसे में उन्हें भी भय सता रहा है कि कहीं उनके पशु भी इस बीमारी का शिकार न हो जाएं.

बेशकीमती हो चुके हैं मवेशी

पिछले तीन चार सालों में मवेशियों के दामों में काफी उछाल आया है. चरखी दादरी, नारनौल, भिवानी व महेंद्रगढ में मुर्राह नस्ल की भैंसें चार से पांच लाख रुपए तक बिक चुकी हैं. वहीं अन्य नस्लों की भैंसों का भी दाम कम से कम 70 से 90 हजार रुपए की होती हैं. ऐसे में यदि एक भैंस की मौत होती है तो पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान होता है. इसी बात को देखते हुए पशु पालक इस अज्ञात बीमारी से ज्यादा चिंतित हैं.

क्या कहते हैं अधिकारीपशुपालन विभाग के उपमंडल अधिकारी डा. ईश्वर सिंह का कहना है कि पशुओं में फैली इस अज्ञात बीमारी से बचाव के लिए विभाग कार्रवाई कर रहा है. मृत पशुओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं. वहीं नि:शुल्क टीकाकरण भी किया जा रहा है.

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First published: January 9, 2019, 3:41 PM IST
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