दंगल के अखाड़े पर ब्रेक, अब राजनीति का अखाड़ा शुरू
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दंगल के अखाड़े पर ब्रेक, अब राजनीति का अखाड़ा शुरू
बबीता फोगाट

बबीता फौगाट कहती हैं कि मैरिकोम और विजेंदर बॉक्सर से प्रेरणा लेकर राजनीति में आने का निर्णय लिया. वे राष्ट्रवादी पार्टी से जुडक़र राजनीति करना चाहती थी, इसलिए बीजेपी ज्वाइन की है.

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चरखी दादरी. अंतर्राष्ट्रीय महिला रेसलर बबीता फोगाट (Babita Phogat) अब दंगल (Dangal)के अखड़े पर ब्रेक लगाकर राजनीति (Politics) के अखाड़े उतरकर जनसेवा के लिए मैदान में उतरेगी. खिलाड़िय़ों की आवाज उठाने के बाद जनता की आवाज उठाने के लिए पुलिस में एसआई की नौकरी से रिजाइन देकर जनसेवा के लिए चुनाव लड़ऩे की मंशा है. बबीता बाढड़ा या चरखी दादरी विधानसभा से चुनाव लडऩे की इच्छुक हैं. कहती हैं कि पार्टी जहां से भी चुनाव लड़वाएं वह पूरी तरह से राजनीति के रिंग में उतरने के लिए तैयार हैं.

बीजेपी ज्वाइन करने और पुलिस का इस्तीफा मंजूर होने के बाद बबीता फौगाट अपने गांव बलाली में न्यूज 18 से विशेष बातचीत की. बबीता फौगाट कहती हैं कि मैरिकोम और विजेंदर बॉक्सर से प्रेरणा लेकर राजनीति में आने का निर्णय लिया. वे राष्ट्रवादी पार्टी से जुडक़र राजनीति करना चाहती थी, इसलिए बीजेपी ज्वाइन की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशहित के लिए किए गए कार्यों से वे बेहद प्रभावित हुई हैं.

पहले खिलाड़ी होने के नाते खिलाडिय़ों की आवाज उठाई है. अब एक प्लेटफार्म पर खिलाडिय़ों के साथ-साथ आमजन की आवाज उठाना चाहती हूं. इसलिए विधानसभा का चुनाव लडक़र जनप्रतिनिधि के नाते उनका काम आसान हो जाएगा. बबीता कहती हैं कि खिलाडिय़ों के लिए आवाज उठाती रही हूं और आगे भी उठाती रहूंगी. खिलाडिय़ों की सुनी नहीं गई तो वे राजनीति में आई हैं ताकि वे खिलाडिय़ों की आवाज को एक प्लेटफार्म पर अच्छे से रख पाएंगी.



चोटिल होने के चलते अखाड़ा छोड़ा
बबीता फौगाट का कहना है कि वह एक वर्ष पूर्व तक वह खेलती रही हैं. अब चोटिल होने के चलते अखाड़ा छोडऩा पड़ा और राजनीति में आई हैं. उसकी राजनीति के साथ-साथ खेल के मैदान में भी रहने की इच्छा है. खेल के बाद राजनीति में सफल होने के लिए वह जी-तोड़ मेहनत करना चाहती हैं.

बबीता फोगाट


बाढड़ा या दादरी विधानसभा को प्राथमिकता, कही से भी चुनाव लडऩे को तैयार

राजनीतिक परिवार में पली-बढ़ी बबीता फौगाट कहती हैं कि उसकी माता व चाचा गांव के कई सालों तक सरपंच रहे हैं. इसके अलावा पिता जी व चाचा राजनीतिक पार्टियों से जुड़े रहे हैं. ऐसे में परिवार के बीच रहते हुए राजनीति सीखी है और अब राजनीति में उतरने का फैसला लिया है. उसकी प्राथमिकता है कि वह विधानसभा का चुनाव बाढड़ा या चरखी दादरी से लड़ें. पार्टी हाईकमान किसी भी क्षेत्र से उसे चुनाव लड़वाएं, वह पूरी तरह से तैयार है.

खिलाडिय़ों की आवाज उठाई तो खेल नीति में बदलाव हुआ

बबीता फौगाट कहती हैं कि बीजेपी ज्वाइन करने के बाद उनकी मुख्यमंत्री मनोहर लाल से खेलों के बारे में विस्तार से चर्चा हुई हैं. खिलाडिय़ों की आवाज उनके समक्ष रखी तो उन्होंने खेल नीति में कई बदलाव किए हैं. जिनका खिलाडिय़ों को सीधे रूप से फायदा मिलेगा.

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