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हरियाणा में डीएपी खाद की किल्लत, महिलाएं चूल्हा-चौका तो बच्चों की छुट्टी करवाकर लगा रहे लाइनों में

हरियाणा में डीएपी खाद की किल्लत, महिलाएं चूल्हा-चौका तो बच्चों की छुट्टी करवाकर लगा रहे लाइनों में

खााद के लिए लाइनों में लगे लोग

खााद के लिए लाइनों में लगे लोग

DAP fertilizer shortage in Haryana: डीएपी खाद लेने के लिए सुबह 4 बजे से महिला-बुजुर्गों के साथ-साथ स्कूली बच्चे भी लाइनों में लग रहे हैं. दोपहर तक खाद केन्द्र पर महिला पुरुषों की भारी भीड़ जुट गई.

चरखी दादरी. सूबे में इस समय जहां डीएपी खाद की काफी किल्लत चल रही है. सरकार के दावों के बावजूूद भी किसानों (Farmers) को खाद के लिए मारा-मारी करने पर विवश होना पड़ रहा है. चरखी दादरी (Charkhi Dadri) में डीएपी खाद के बैग लेने के लिए किसानों को अपने बच्चों की स्कूल से छुट्टी करवाकर लाइनों में लगा रहे हैं. वहीं महिलाएं चूल्हा-चौका छोडक़र रबी फसल की बिजाई की चिंता में खाद के लिए अल सुबह से लाइनों में खड़ा होने पर विवश है.

किसानों का कहना है कि साहब… क्या करें, बच्चों को स्कूल में भेजने की बजाए उन्हें अपनी फसल की चिंता है. इसलिए बच्चों की स्कूल से छुट्टी करवाकर लाइनों में लगा रहे हैं. मर-पड़क़र एकआध डीएपी खाद का बैग मिलता है. डीएपी खाद पाने के लिए जहां महिलाएं भी चूल्हा-चौका छोडकऱ लाइनों में लगती है, वहीं बुजुर्ग भी भूखे-प्यासे डीएपी खाद पाने के लिए भटक रहे हैं.

चरखी दादरी जिले में डीएपी खाद की असलियत कुछ ऐसी ही है. यहां पुरानी अनाजमंडी में डीएपी खाद लेने के लिए सुबह 4 बजे से महिला-बुजुर्गों के साथ-साथ स्कूली बच्चे भी लाइनों में लग रहे हैं. दोपहर तक खाद केन्द्र पर महिला पुरुषों की भारी भीड़ जुट गई. जिसमें स्कूली छात्राएं भी अपने परिजनों के साथ खाद के लिए लाइन में लगी हुई दिखाई दी. वहीं महिलाओं की भी खासी भीड़ लगी रही. बीच बीच में लोगों के बीच नोकझोंक भी हुई. हालांकि बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली.

खाद के लिए लाइनों में लगे किसानों ने बताया कि मजबूरी है साहब बच्चों की स्कूल छुट्टी करवाकर खाद के लिए आना पड़ता है. किसान रामबीर ने बताया कि उसके दोनों बच्चों की स्कूल से छुट्टी करवाकर यहां खाद के लिए पहुंचे हैं. उन्हें अपनी फसल की चिंता इस कदर है कि बच्चों को स्कूल की बजाए खाद जरूरी हो गया है.

महिलाओं ने कही ये बात

वहीं बबली व निर्मला ने बताया कि वे अपना चूल्हा-चौका छोडक़र खाद के लिए सुबह 4 बजे से लाइन में लगी हैं. पहले जब वे अल सुबह आई तो नंबर आने पर खाद समाप्त हो गया. अब रोटी की नहीं बल्कि खेती की ज्यादा चिंता है. जब फसल ही पैदा नहीं कर पाएंगे तो क्या खाएंगे.  महिलाओं ने बताया कि वोट के समय तो नेता घर तक पहुंच जाते हैं. जब किसान को जरूरत होती है तो ये नेता दिखाई नहीं देते. उन्होंने बताया कि फसल खराब होने के भय से खाद लेने पहुंची हैं. दो दिन से खाद नहीं मिल पा रही है.

खाद कम है, भीड़ ज्यादा

हैफेड अधिकारी राजेश कुमार ने फोन पर बताया कि पीछे से खाद की सप्लाई कम आ रही है. जबकि खाद लेने के लिए किसानों की भीड़ ज्यादा है. ऐसे में प्रत्येक किसान को दो बैग उपलब्ध करवाए जा रहे हैं. जल्द ही खाद की किल्लत दूर हो जाएगी.

Tags: Farmer Agitation, Farmers, Haryana Farmers

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