बादलों की बेवफाई और बिजली की रुसवाई ने फेरा किसानों के अरमानों पर पानी

स्थिति ऐसी बन रही है कि अकाल की ससुराल कहे जाने वाले राजस्थान सीमा से सटे इस क्षेत्र में एक बार फिर से अकाल की काली परछाई मंडराती नजर आने लगी है.

Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: June 11, 2019, 11:24 AM IST
बादलों की बेवफाई और बिजली की रुसवाई ने फेरा किसानों के अरमानों पर पानी
गर्मी के मौसम से किसान परेशान
Pardeep Sahu
Pardeep Sahu | News18 Haryana
Updated: June 11, 2019, 11:24 AM IST
सूर्यदेव के निरंतर बढ़ते प्रकोप से दादरी जिला क्षेत्र सुलग उठा है और यहां पारा 47 डिग्री को छू गया है. राजस्थान सीमा से सटे इस इलाके में बादलों की बेवफाई और बिजली की रुसवाई ने किसानों के अरमानों पर पानी फेर कर रख दिया है. स्थिति ऐसी बन रही है कि अकाल की ससुराल कहे जाने वाले राजस्थान सीमा से सटे इस क्षेत्र में एक बार फिर से अकाल की काली परछाई मंडराती नजर आने लगी है.

यहां के किसान खरीफ की फसलों को बोनस के रूप में मानते हैं. क्योंकि इन फसलों पर लागत रबी के मुकाबले बहुत कम आती है. इस बार करीब एक पखवाड़े पूर्व जब क्षेत्र में जोरदार बारिश हुई तो किसानों ने बड़े अरमानों के साथ हजारों एकड़ भूमि पर खरीफ फसलों की बिजाई कर डाली.

आसमान पर मंडराते है बाद, मगर नहीं लेते बरसने का नाम

लोगों को उम्मीद थी कि मॉनसून की वर्षा जल्द होगी और उनकी फसलों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी मगर हुआ इसके विपरीत. एक बार बरसने के बाद बादल जैसे किसानों के साथ बेवफाई पर उतर आए. वे आसमान पर मंडराते रोज हैं मगर बरसने का नाम नहीं ले रहे.

किसानों का लाखों रुपये डूबे

गर्मी का आलम यह है कि किसानों द्वारा बोई गई फसलें सूर्यदेव के ताप से झुलस चुकी हैं और किसानों का लाखों रूपया डूब गया है. क्षेत्र में नहरी सिंचाई न के बराबर ही होती है और इनका पानी अधिकतर खारे पानी वाले गावों में पेयजल के लिए प्रयुक्त किया जाता है. इस बार सूखी पडी नहरों के कारण जहां लोग बूंद-बूंद पानी को तरस गए हैं. वहां जोहड आदि प्राकष्तिक जलाशयों के सूख जाने के कारण पशु-पक्षियों का मारे गर्मी के बुरा हाल है. रही-सही कसर बिजली की रूसवाई ने निकाल दी है. लोगों के पास ट्यूबवेल तो हैं मगर बिजली नहीं.

22 जून तक मॉनसून पहुंचेगा हरियाणा
बिजली के बिना घरों में लगे कूलर, पंखे, फ्र्रीज आदि उपकरण मात्र शो-पीस बनकर रह गए हैं. मौसम विभाग के ताजा अनुमानों के अनुसार हरियाणा में 22 जून के बाद बाद मानसून आने की संभावना है. पहले से ही खरीफ फसलों की बिजाई पर भारी पैसा लगा चुके किसानों के लिए देरी से होने वाली वर्षा केवल आफत ही साबित होगी.

पशुओं के लिए चारे के भी पड़ सकते हैं लाले

मॉनसून के आगमन में हो रही अप्रत्याशित देरी और असामान्य तापमान से दरपेश खतरे से लोगों को निजात दिलाने के लिए सरकार द्वारा किया जा रहा कोई भी उपाय धरातल पर नजर नहीं आता. ऐसे में किसानों और अन्य लोगों के सामने स्वयं को नियति के भरोसे छोड देने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है. हालात ऐसे ही रहे तो अनाज तो दूर पशुओं के लिए चारे के भी लाले पड़ सकते हैं.

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