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हरियाणा: सिर्फ शहीदी दिवस के दिन ही याद आते हैं परिजन, वर्षों से मदद की राह देख रहे शहीदों के आश्रित

शहीद कुलदीप सिंह के भाई संदीप ने बताया कि माता-पिता को सम्मान दिलाने के लिए वे लगातार कई वर्षों से दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे थे.

शहीद कुलदीप सिंह के भाई संदीप ने बताया कि माता-पिता को सम्मान दिलाने के लिए वे लगातार कई वर्षों से दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे थे.

Kargil Vijay Diwas: कारगिल युद्ध के दौरान शहीद होने वाले जवानों में गांव बलकरा निवास वीर चक्र विजेता रणधीर सिंह, मौड़ी निवासी हवलदार राजबीर सिंह, रावलधी निवासी हवलदार राजकुमार, चरखी से सिपाही सुरेश कुमार, महराना से फौजी कुलदीप सिंह शामिल थे.

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चरखी दादरी. जब भी देश की सरहदें खतरे में पड़ीं तो हमारे जांबाजों ने अपना सब कुछ लुटा दिया, ताकि देश पर कोई आंच ना आए और उनकी वजह से ही आज हम खुली हवा में सांस ले रहे हैं. भले ही कारगिल युद्ध (Kargil War) के शहीदों के आश्रितों (Dependents of Martyrs) को केंद्र व राज्य सरकारों, विभिन्न निजी प्रतिष्ठानों ने पर्याप्त मान सम्मान, आर्थिक सहायता, रोजगार के साधन मुहैया करवाएं हों. लेकिन आज भी इस युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुतियां देने वाले जवानों के परिवार इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

शहीद आश्रितों का कहना है कि जो मान-सम्मान मिलना चाहिए वह नहीं मिला. सिर्फ शहीदी दिवस या अन्य शहीदों को लेकर होने वाले कार्यक्रमों में बुलाते हैं और भीड़ दिखाकर सहयोग देने का आश्वासन देकर भूल जाते हैं. वहीं शहीद हुए जवानों की पत्नियों को तो कुछ मिल गया, लेकिन माता-पिता को कुछ नहीं मिला. बेटों के गम में तो दो माताएं भी दुनिया छोडक़र चली गई.

कारगिल के दौरान दादरी क्षेत्र के पांच जवान अपना लोहा मनवाते हुए दुश्मनों के छक्के उड़ाकर शहीद हुए थे. शहीदों को सम्मान दिलाने के लिए जहां कई सामाजिक संगठन आगे आए तो केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा शहीदों को सम्मान के साथ-साथ हक दिलाने के लिए हर बार वायदे किए गए. लेकिन सिर्फ वायदों तक ही सीमित रहेे.  शहीद आश्रितों का कहना है कि उनको सरकार द्वारा दी जाने वाले सुविधाएं ही नहीं मिली हैं. सुविधा व सम्मान पाने के लिए वे वर्षों से भटक रहे हैं. लेकिन उनकी कोई सुध नहीं ली गई है.

दादरी जिले के ये जवान शहीद हुए थे

कारगिल में 20 वर्ष पूर्व क्षेत्र के शहीद होने वाले जवानों में गांव बलकरा निवास वीर चक्र विजेता रणधीर सिंह, मौड़ी निवासी हवलदार राजबीर सिंह, रावलधी निवासी हवलदार राजकुमार, चरखी से सिपाही सुरेश कुमार, महराना से फौजी कुलदीप सिंह शामिल हैं. इन जवानों ने कारगिल युद्ध के दौरान अपना लोहा मनवाया और देश के लिए शहीद हुए. आज भी दादरी के इन जवानों पर हमें नाज है.

आश्रितों को नहीं मिला न्याय, काट रहे हैं चक्कर

शहीद आश्रितों के अनुसार कारगिल युद्ध के दौरान हुए शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली गैस एजेंसी, पेट्रोल पंप व परिवार में किसी को नौकरी देने जैसे कई लाभ शहीद विधवाओं को तो मिल गई. बावजूद इसके माता-पिता को कुछ नहीं मिला. यहां तक कि शहीद विधवा उनके परिवार को छोड़क़र चली गई हैं. पीछे माता-पिता को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. गांव महराना के शहीद कुलदीप सिंह के माता-पिता बेटे के गम में दुनिया छोड़ गए. शहीद भाई संदीप ने बताया कि माता-पिता को सम्मान दिलाने के लिए वे लगातार कई वर्षों से दफ्तरों के चक्कर लगाते रहे थे व आखिर में निराश होकर घर बैठ गए.

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