चरखी दादरी: जमीन बचाने का जज्बा, टेंशन में किसानों की जान को खतरा
Charkhi-Dadri News in Hindi

चरखी दादरी: जमीन बचाने का जज्बा, टेंशन में किसानों की जान को खतरा
जमीन को लेकर सड़क पर उतरे किसानों की हो रही हैं लगातार मौत

पिछले 7 महीने के दौरान अब तक दादरी जिले में पांच किसानों की मौत हो चुकी है. लगातार किसानों की हो रही मौतों से धरनारत किसानों के हौंसले टूटते जा रहे हैं.

  • Share this:
चरखी दादरी. एक तरफ जहां किसान (Farmer) अपनी जमीन बचाने के लिए 7 महीने से जज्बे के साथ सडक़ों पर डटे हुए हैं तो दूसरी तरफ सरकार (Government) का 9 हजार करोड़ की परियोजना (Projects) पर किसानों द्वारा संकट पैदा किया जा रहा है. नारनौल से गंगेहड़ी तक बनने वाले नेशनल हाईवे ग्रीन कारिडोर (National Higway green corridor) 152डी की अधिग्रहीत जमीन का उचित मुआवजा की मांग को लेकर धरनारत किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिलने से जमीन जाने की टेंशन में लगातार मौत हो रही हैं.

पिछले 7 महीने के दौरान अब तक दादरी जिले में पांच किसानों की मौत हो चुकी है. लगातार किसानों की हो रही मौतों से धरनारत किसानों के हौंसले टूटते जा रहे हैं. पुलिस द्वारा धरनारत किसानों पर किसान की आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज करने के बावजूद भी किसान अब आर-पार की लड़ाई लडऩे के मूड़ से डटे हुए हैं.
बता दें कि ग्रीन कारिडोर 152 डी का करीब 230 किलोमीटर लंबे निर्माण को लेकर एनएचआई द्वारा चार हजार करोड़ रुपए की राशि किसानों की अधिग्रहीत जमीन को लेकर तय की गई है.

मार्ग निर्माण में दादरी जिला 17 गांवों के किसानों की 750 एकड़ जमीन अधिग्रहण में आई है. सरकार व एनएचआई द्वारा किसानों को मुआवजा निर्धारण करने के लिए अवार्ड घोषित किए गए थे, जिसके बाद किसानों ने रोष जताते हुए मुआवजा कम मिलने की बात कही और गत 26 फरवरी से गांव रामनगर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया. इस दौरान प्रदेश व केंद्र सरकार द्वारा जमीन के कलेक्टर रेट निर्धारित करके मुआवजा राशि को बढ़ाने की घोषणा की गई. लेकिन नोटिफिकेशन जारी नहीं होने के कारण किसानों को बढ़ा हुआ मुआवजा भी जारी नहीं किया गया.
पांच किसानों की हुई मौत



जमीन अधिग्रहण से प्रभावित किसान बीते सात माह से धरना दे रहे हैं. इस दौरान जमीन अधिग्रहण से प्रभावित पांच किसानों की मौत हो चुकी है. सबसे पहले 12 मई को गांव खातीवास निवासी किसान जगदीश ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर आत्महत्या कर ली थी. उसके बाद गांव ढाणी फौगाट निवासी किसान रामअवतार की ढाणी फौगाट धरने पर व खातीवास निवासी किसान धर्मपाल की अपने घर पर हार्ट अटैक से मौत हो गई थी. वहीं गांव दातौली निवासी किसान दलबीर ने रामनगर धरने पर जहर खाकर जान दे दी थी व गांव ढाणी फौगाट निवासी किसान महेंद्र की हार्ट अटैक से मौत हुई है.

किसानों आक्रोश में, उचित मुआवजा मिलने तक डटने का फैसला

पांच किसानों की मौत के बाद भी गांव रामनगर व ढाणी फौगाट में किसानों में धरने यथावत जारी हैं. धरनों पर किसानों द्वारा सरकार के प्रति आक्रोश है और उचित मुआवजा मिलने तक किसी भी सूरत में सडक़ों पर डटे रहने का फैसला लिया है. धरना कमेटी सदस्य विनोद मोड़ी ने कहा कि सरकार किसानों की मांगों की ओर कोई ध्यान नहीं दे रही है. जिससे किसान मानसिक तनाव में हैं और लगातार उनकी मौत होती जा रही है. किसान अपनी जमीन जाने के डर से टेंशन में रहते हैं जिससे किसानों की लगातार मौत हो रही हैं.

धरनारत किसानों पर ही केस दर्ज

पिछले दिनों गांव दातोली निवासी किसान दलबीर के आत्महत्या मामले में झोझूकलां थाना पुलिस ने धरना संयोजक समिति और धरनास्थल पर मौजूद किसानों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है. थाना प्रभारी अनूप सिंह ने फोन पर बताया कि दलबीर की मौत से पहले की जो वीडियो सामने आई है उसकी जांच कर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया है.

ये भी पढ़ें- तलाक देने पर अड़ी पत्नी को मनाने पहुंचा था पति, नहीं मानी तो मारी गोली

ये भी पढ़ें- सुरजेवाला का बयान- कोई कांग्रेस का लीडर भी मेरे खिलाफ कान में फूंक मारने आएगा
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज