विधानसभा चुनाव में दादरी जिले के वोटरों की नब्ज: जिधर जाएंगे जाट, उसके होंगे ठाठ!
Charkhi-Dadri News in Hindi

विधानसभा चुनाव में दादरी जिले के वोटरों की नब्ज: जिधर जाएंगे जाट, उसके होंगे ठाठ!
हरियाणा गठन के समय से ही जाटों का रहा है जलवा

चरखी दादरी जिला की बाढड़ा व दादरी विधानसभा सीट भी जाट बहुल हैं. इन दोनों सीटों का पिछला इतिहास देखा जाए तो यहां से अधिकांश बार जाट समाज से ही विधायक बनकर विधानसभा में पहुंचे हैं.

  • Share this:
चरखी दादरी. हरियाणा की राजनीति में जाट वोट बैंक का दबदबा रहा है. चरखी दादरी (Charkhi Dadri) जिला की बाढड़ा व दादरी विधानसभा सीट भी जाट बहुल हैं. इन दोनों सीटों का पिछला इतिहास देखा जाए तो यहां से अधिकांश बार जाट समाज (Jat Community) से ही विधायक बनकर विधानसभा में पहुंचे हैं. यह कहना गलत नहीं कि जिधर जाट जाएंगे, उसके ठाठ होंगे. जाटों की अच्छी खासी संख्या है जो हार जीत का फैसला कर सकें. इसीलिए सभी सियासी दल हमेशा टिकट वितरण में जाट वोट बैंक को रिझाने की कोशिश करते हैं.

भाजपा, कांग्रेस, इनेलो व जजपा पार्टी द्वारा जाट वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए हैं. जजपा को जहां अपने कैडर वोट से उम्मीद है वहीं कांग्रेस भी अपने पुराने इतिहास को दोहराते हुए लाभ उठाना चाहती है. हालांकि कभी दादरी व बाढड़ा क्षेत्र इनेलो का गढ़ माना जाता था. लोकसभा व विधानसभा चुनावों में इनेलो के प्रत्याशियों को इस क्षेत्र से खासी बढ़त मिलती रही है. 2014 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां से जाट वोटों में भाजपा ने अच्छी सेंध लगाई है. यहीं कारण है कि बाढड़ा में सुखविंद्र श्योराण ने पहली बार 39 हजार 139 वोट लेते हुए कमल का फूल खिलाने में कामयाब हुए. हालांकि दादरी में कमल नहीं खिल पाया, लेकिन इस क्षेत्र से भाजपा के सोमबीर सांगवान ने 41 हजार 790 वोट लेकर दूसरे स्थान पर रहे.

भाजपा ने लगाई जाट वोट बैंक में सेंध



दादरी जिला की दादरी व बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा पार्टी द्वारा पहली बार 2019 के चुनाव में सेंध लगाने में सफल रही है. बाढड़ा विधानसभा से भाजपा के सुखविंद्र श्योराण ने हरियाणा बनने के बाद पहली बार भाजपा का परचम लहराया है. वहीं दादरी विधानसभा सीट पर भी भाजपा ने सेंध लगाते हुए दूसरे स्थान हांसिल करने में कामयाब रही है. माना यह भी जा रहा है कि इस बार के विधानसभा चुनाव में भाजपा पार्टी द्वारा दोनों सीटों पर मुकाबले में खड़ी होगी.
हरियाणा गठन के समय से ही जाटों का रहा है जलवा

हरियाणा बनने के बाद 1967 से ही बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र से जाट प्रत्याशी विधायक बनता आ रहा है. वहीं दादरी विधानसभा सीट 1977 से सामान्य सीट बनी है. सामान्य सीट बनने के बाद लगातार यहां से जाट प्रत्याशी ही विधायक बना है. बाढड़ा में श्योराण तो दादरी में फौगाट व सांगवान गोत्र से विधायक बने हैं.

बाढड़ा में मांढी परिवार की तीसरी पीढ़ी को भी मिला ताज

बाढड़ा विधानसभा क्षेत्र से 1967 के पहले चुनाव में श्योराण गोत्र के अतर सिंह मांढी विधायक बने थे. उसके बाद 1991 में  विधायक बने. 1996 के चुनाव में अतर सिंह के बेटे नृपेंद्र मांढी ने हविपा की टिकट से चुनाव जीता. 2014 के चुनाव में यहां से मांढी परिवार की तीसरी पीढी के सुखविंद्र मांढी सबसे कम उम्र के विधायक बने हैं.

गैर जाट मतदाता भी दिखाएंगे दम

गैर जाट मतदाताओं को लुभाने के लिए भी सभी सियासी दल लगे हुए हैं कांग्रेस जहां दलित वोट बैंक को अपना कैडर वोट मानती है वहीं भाजपा इस बार सभी गैर जाट वोटों को मोदी लहर के सहारे रिझाना चाह रही है. जजपा व इनेलो भी सभी गैर जाट मतदाताओं के नेताओं को एक प्लेटफार्म पर लाने का प्रयास कर रहे हैं.

ये भी पढ़ें:- हरियाणा विधानसभा चुनाव: BJP में शामिल होंगे पूर्व हॉकी खिलाड़ी संदीप सिंह

ये भी पढ़ें:- हरियाणा में मुस्लिमों को भी विधानसभा चुनाव का टिकट दे सकती है बीजेपी!
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज

corona virus btn
corona virus btn
Loading