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हरियाणा के इस सरकारी स्कूल में एक कमरे में लगती हैं 3-3 कक्षाएं

सरकारी स्कूल में एक कमरे में चल रही 3 कक्षाएं

सरकारी स्कूल में एक कमरे में चल रही 3 कक्षाएं

स्कूल स्टाफ (School Staff) द्वारा अपने स्तर पर झाडिय़ां डालकर अस्थाई चारदिवारी बनाने का प्रयास किया है. लेकिन फिर भी स्कूल (School) में आवारा पशुओं का हमेशा भय सताता रहता है.

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चरखी दादरी. सर्द मौसम में विद्यार्थियों (Students) के लिए इस स्कूल (School) में ना तो बैंच हैं और ना ही छत है. कभी खुले आसमान के नीचे तो कभी एक कमरे में तीन-तीन कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ना पड़ता है. मिडिल स्कूल में सिर्फ तीन कमरों के सहारे बच्चे अपना भविष्य तलाश रहे हैं. तीन कमरों में भी एक कमरा स्टाफ का है, वहीं दो कमरों में पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के बैठाने की जगह है. ऐसे में विद्यार्थियों को या तो खुले आसमान के नीचे या फिर बरामदे में जमीन पर बैठकर पढऩा पड़ रहा है.

यह हाल चरखी दादरी जिले के गांव झोझू खुर्द के राजकीय मिडिल स्कूल का है. हालांकि प्रदेश सरकार द्वारा सरकारी स्कूलों के लिए करोड़ों रुपए के बजट देने व प्रर्याप्त प्रबंधों के बीच पढ़ाई के दावे किए जा रहे हैं. बावजूद इसके ये दावें कितने सहीं हैं, यह स्कूल के हालातों को देखकर लगता है. स्कूल की चारदिवारी का नामोनिशान ही नहीं है.

स्कूल स्टाफ द्वारा अपने स्तर पर झाडिय़ां डालकर अस्थाई चारदिवारी बनाने का प्रयास किया है. लेकिन फिर भी स्कूल में आवारा पशुओं का हमेशा भय सताता रहता है. राजकीय मिडिल स्कूल के दो कमरों में ही पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है. कमरों की कमी के चलते कड़कड़ाती ठंड में बच्चों को खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठना पड़ रहा है.

बता दें कि गांव की पंचायत के अनुरोध पर वर्ष 2007 में प्राइमरी स्कूल को अपग्रेड पर मिडिल स्कूल बनाया गया था. उस दौरान स्कूल की पुरानी बिल्डिंग में बच्चों को पढ़ाया जाता था. लेकिन बिल्डिंग जर्जर होने के कारण स्कूल की पुरानी बिल्डिंग को तोड़कर तीन कमरों का निर्माण करवाया गया. स्कूल के लिए कोई ग्रांट नहीं आने के कारण ग्राम पंचायत व स्कूल स्टाफ सदस्यों द्वारा अपने स्तर पर की कुछ सुविधाएं उपलब्ध करवाई गई हैं. बिल्डिंग की कमी के चलते दोनों कमरों व बरामदे में विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा है.

स्कूल अपग्रेड करने के बाद नहीं ली सुध

सरपंच मनोज कुमार ने बताया कि सरकार ने वर्ष 2007 में गांव के प्राइमरी स्कूल को अपग्रेड कर मिडिल स्कूल बनाया था. अपग्रेड होने के बाद से सरकार व विभाग ने कोई सुध नहीं ली. ग्राम पंचायत ने अपने स्तर पर पुरानी जर्जर बिल्डिंग को तुड़वाकर तीन कमरों का निर्माण करवाया है. अब सिर्फ तीन कमरों में आठ कक्षाएं लगानी पड़ रही हैं. हालांकि इस संबंध  में ग्राम पंचायत द्वारा अनेकों बार संबंधित विभाग के आला अधिकारियों से लेकर सरकार तक गुहार लगाई जा चुकी हैं. सिर्फ आश्वासन के अलावा स्कूल की किसी ने कोई सुध नहीं ली.

हमेशा बना रहता है भय

स्कूल प्रबंधन कमेटी के प्रधान श्रीनिवास ने बताया कि ठंड में बच्चों को जमीन पर बैठकर पढऩा पड़ रहा है. स्कूल की चारदिवारी व कमरें नहीं होने के कारण आसपास से आवारा पशुओं व कीड़ों का भय हमेशा रहता है. विद्यार्थियों को पढऩे की बजाए अपनी सुरक्षा को लेकर ज्यादा चिंता रहती है.
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